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50 लाख मानव दिवस रोजगार का सृजन
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गौरीगंज : बाजार शुकुल के मवइया रहमतगढ़ में मनरेगा योजना मेें तालाब की खोदाई करते श्रमिक। -संवाद
- फोटो : AMETHI
गौरीगंज (अमेठी)। वित्तीय वर्ष 2021-22 में जिले में मनरेगा योजना के तहत कुल 2,72,491 परिवारों ने रोजगार मांगा था। इनमें से एक लाख से अधिक परिवार को रोजगार दिया गया। इसके सापेक्ष अकेले 50 हजार महिला मुखिया घर वाले परिवार को रोजगार मुहैया कराया गया है। इन परिवारों के हिसाब से अब तक कुल 50 लाख 46 मानव दिवस का सृजन कर मजदूरों को 100 दिन या इससे कम का रोजगार मुहैया कराया जा चुका है। जिलेे में आठ हजार परिवार ऐसे हैं जिन्हें पूरे 100 दिन का रोजगार दिया गया।
गरीब मजदूरों को रोजगार के लिए पलायन नहीं करना पड़े इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से मनरेगा योजना संचालित की जाती है। शासन के निर्देश पर सीडीओ डॉ. अंकुर लाठर की ओर से पंचायत चुनाव के समय भी मनरेगा योजना के तहत कार्य संचालित कराए जा रहे थे। पंचायत चुनाव संपन्न होने के बाद सीडीओ ने सभी खंड विकास अधिकारियों को प्रत्येक गांव में कम से कम एक काम मनरेगा योजना के तहत संचालित करने का निर्देश दिया था। यही नहीं सीडीओ स्वयं इसकी मॉनीटरिंग भी करती थीं। आदेश का पालन नहीं होने पर कई पंचायत कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए संबंधित बीडीओ को चेतावनी भी जारी की जा चुकी है।
अफसरों के निरंतर प्रयास के चलते मौजूदा वित्तीय वर्ष 2021-22 में जिले के कुल दो लाख 72 हजार 491 परिवार ने रोजगार मांगा। इसके सापेक्ष विभाग की ओर से अब तक कुल एक लाख पांच हजार 775 परिवार को रोजगार मुहैया कराया गया। इनमें से अकेले 50 हजार 46 महिला मुखिया वाले परिवार को रोजगार दिया गया है। जिले भर में अब तक 50 लाख पांच हजार 624 मानव दिवस का सृजन कर रोजगार मांगने वाले मजदूरों को रोजगार दिया गया। इनमें से अकेले 18 लाख, 23 हजार 855 महिलाओं को मनरेगा योजना से रोजगार मिला। यही नहीं अब तक आठ हजार 75 परिवार 100 दिन का रोजगार पूरा कर चुका है।
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किस वर्ग के कितनों ने मांगा रोजगार
चालू वित्तीय वर्ष में अनुसूचित जाति के 70,408, अनुसूचित जनजाति के 705 तथा अन्य के 2,01,378 समेत कुल 2,72,491 (सभी परिवार) परिवारों ने मनरेगा योजना के तहत रोजगार मांगा है।
वर्गवार दिया गया रोजगार
परिवारों की ओर से रोजगार मांगने के बाद पंचायत विभाग द्वारा अब तक अनूसूचित जाति के 29,326, अनुसूचित जनजाति के 284 तो अन्य के 76,165 समेत कुल 1,05,775 (सभी संख्या परिवार में) को रोजगार दिया जा चुका है। इसमें अकेले 50,046 महिला परिवार है। इनमें से 13,74,728 अनुसूचित जाति, 13,741 अनुसूचित जनजाति, 36,17,155 अन्य समेत कुल 50,05,624 लोगों को रोजगार मुहैया कराया जा चुका है। इनमें से भी 18,23,855 महिलाओं को रोजगार दिया गया है।
मांग पर दिया जा रहा रोगजार
सीडीओ डॉ. अंकुर लाठर ने बताया कि जिले के सभी मजदूरों को जिले में ही रोजगार मुहैया कराना उनकी प्रतिबद्धता है। कहा कि रोजगार की मांग करने के तीन दिन के भीतर उक्त को रोजगार मुहैया कराने का निर्देश दिया गया है। कहा कि जिले में पर्याप्त मात्रा में रोजगार के अवसर हैं। कहा कि वास्तव में काम करने वाले किसी भी मजदूर को मजदूरी के लिए जिले से बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
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गरीब मजदूरों को रोजगार के लिए पलायन नहीं करना पड़े इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से मनरेगा योजना संचालित की जाती है। शासन के निर्देश पर सीडीओ डॉ. अंकुर लाठर की ओर से पंचायत चुनाव के समय भी मनरेगा योजना के तहत कार्य संचालित कराए जा रहे थे। पंचायत चुनाव संपन्न होने के बाद सीडीओ ने सभी खंड विकास अधिकारियों को प्रत्येक गांव में कम से कम एक काम मनरेगा योजना के तहत संचालित करने का निर्देश दिया था। यही नहीं सीडीओ स्वयं इसकी मॉनीटरिंग भी करती थीं। आदेश का पालन नहीं होने पर कई पंचायत कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए संबंधित बीडीओ को चेतावनी भी जारी की जा चुकी है।
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अफसरों के निरंतर प्रयास के चलते मौजूदा वित्तीय वर्ष 2021-22 में जिले के कुल दो लाख 72 हजार 491 परिवार ने रोजगार मांगा। इसके सापेक्ष विभाग की ओर से अब तक कुल एक लाख पांच हजार 775 परिवार को रोजगार मुहैया कराया गया। इनमें से अकेले 50 हजार 46 महिला मुखिया वाले परिवार को रोजगार दिया गया है। जिले भर में अब तक 50 लाख पांच हजार 624 मानव दिवस का सृजन कर रोजगार मांगने वाले मजदूरों को रोजगार दिया गया। इनमें से अकेले 18 लाख, 23 हजार 855 महिलाओं को मनरेगा योजना से रोजगार मिला। यही नहीं अब तक आठ हजार 75 परिवार 100 दिन का रोजगार पूरा कर चुका है।
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किस वर्ग के कितनों ने मांगा रोजगार
चालू वित्तीय वर्ष में अनुसूचित जाति के 70,408, अनुसूचित जनजाति के 705 तथा अन्य के 2,01,378 समेत कुल 2,72,491 (सभी परिवार) परिवारों ने मनरेगा योजना के तहत रोजगार मांगा है।
वर्गवार दिया गया रोजगार
परिवारों की ओर से रोजगार मांगने के बाद पंचायत विभाग द्वारा अब तक अनूसूचित जाति के 29,326, अनुसूचित जनजाति के 284 तो अन्य के 76,165 समेत कुल 1,05,775 (सभी संख्या परिवार में) को रोजगार दिया जा चुका है। इसमें अकेले 50,046 महिला परिवार है। इनमें से 13,74,728 अनुसूचित जाति, 13,741 अनुसूचित जनजाति, 36,17,155 अन्य समेत कुल 50,05,624 लोगों को रोजगार मुहैया कराया जा चुका है। इनमें से भी 18,23,855 महिलाओं को रोजगार दिया गया है।
मांग पर दिया जा रहा रोगजार
सीडीओ डॉ. अंकुर लाठर ने बताया कि जिले के सभी मजदूरों को जिले में ही रोजगार मुहैया कराना उनकी प्रतिबद्धता है। कहा कि रोजगार की मांग करने के तीन दिन के भीतर उक्त को रोजगार मुहैया कराने का निर्देश दिया गया है। कहा कि जिले में पर्याप्त मात्रा में रोजगार के अवसर हैं। कहा कि वास्तव में काम करने वाले किसी भी मजदूर को मजदूरी के लिए जिले से बाहर नहीं जाना पड़ेगा।