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देवी मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब
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12 : संग्रामपुर : कालिकन धान में दर्शन के पंक्तिबद्ध श्रद्धालु। -संवाद
- फोटो : AMETHI
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गौरीगंज (अमेठी)। शारदीय नवरात्र की शुरुआत बृहस्पतिवार को कलश स्थापना के साथ हुई। नवरात्र के पहले दिन भोर से ही देवी मंदिरों में मां के जयकारे गूंजने लगे। प्रमुख देवी मंदिरों के साथ श्रद्धालुओं ने अपने घरों में कलश स्थापित कर मां के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा की। कई स्थानों पर सुसज्जित पांडाल में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर परिवार व समाज के साथ देश कल्याण की मंगल कामना की गई।
शारदीय नवरात्र के पहले दिन लोगों ने देवी मंदिरों व अपने घरों में कलश स्थापित कर मां के प्रथम शैलपुत्री स्वरूप की पूजा की। शहर से लेकर गांवों तक में कलश स्थापना का क्रम सुबह से शुरू होकर देर शाम तक चलता रहा। नवरात्र का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं ने अपने घरों में तथा देवी मंदिरों में कलश स्थापित कर मां दुर्गा की पूजा अर्चना की।
क्षेत्र के प्रसिद्ध देवी मंदिरों पर भोर चार बजे से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। मंदिर परिसर से लेकर रास्तों पर भी मां के जयकारे गूंजते रहे। भीड़ को देखते हुए मंदिर कमेटी के साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने के इंतजाम किए गए थे।
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कालिकन धाम, दुर्गन भवानी, अहोरवा भवानी, हिंगलाज माता मंदिर, माता मवई धाम, देवीपाटन सहित कई प्राचीन ऐतिहासिक देवी मंदिरों में दिन भर आस्था का सैलाब उमड़ता रहा। इसके अतिरिक्त ग्रामीण क्षेत्र में कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पांडाल सजाकर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर सामूहिक पूजन-अर्चन कर परिवार, समाज व देश के कल्याण की मनोकामना।
सभी देवी मंदिरों में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम दिखाई पड़े। सुरक्षा कर्मी लोगों को कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए दर्शन करने के लिए पंक्तिबद्ध करते रहे। मंदिर कमेटी के कार्यकर्ता भी पूरे दिन इसी कवायद में जुटे रहे।
कालिकन धाम में उमड़े श्रद्धालु
संग्रामपुर। नवरात्र का पहला दिन सिद्धपीठ कालिकन धाम मां की भक्ति के रंग में रंगा दिखा। कालिकन धाम में भोर से ही शंख और घंटे-घड़ियाल के साथ जय माता दी के उद्घोष गूंजने लगे। घरों में वैदिक अनुष्ठानों के बीच कलश स्थापना हुई। कालिकन धाम में भक्तों की भारी भीड़ दिखाई दी। भक्तों की ओर से लगाए जाने वाले जयकारों से मंदिर परिसर दिन भर गुंजायमान रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने व्रत रखा। इसके लिए सामान की जमकर खरीदारी की। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं में महिलाओं की संख्या ज्यादा रही। (संवाद)
अनेक नामों से प्रसिद्ध है मां का यह रूप
संग्रामपुर। कालिकन धाम के पीठाधीश्वर श्रीमहाराज ने बताया कि प्रथम दिन माता शैलपुत्री की पूजा की गई। शैलपुत्री माता का यह रूप अनेक नामों से प्रसिद्ध है। इनमें शुभांगी, उमा, पार्वती, दुर्गा, सती, शिवांगी, गौरी, महेश्वरी, अर्पणा व पर्वतवासिनि नाम शामिल हैं। पूर्व जन्म में इनके पिता दक्ष थे। राजा दक्ष ने यज्ञ किया पर अपने दामाद शिव को निमंत्रण नहीं दिया। भगवान शंकर की अनुमति के बिना सती अपने पिता के यहां चली गईं। यज्ञ स्थल पर पहुंचने पर सती का तिरस्कार हुआ। इस पर सती यज्ञ की अग्नि में कूद पड़ीं। सती का अगला जन्म शैलराज की पुत्री पार्वती के रूप में हुआ। (संवाद)
बड़ी संख्या में लोगों ने किया दर्शन
इन्हौना। आदिशक्ति पीठ मां अहोरवा भवानी का मंदिर प्राचीन मंदिरों में शुमार है। बृहस्पतिवार को इस मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। दूर दराज से आए लोग सुबह से ही मंदिर पहुंचने लगे। मंदिर पहुंचने वाले ने मां का दर्शन पूजन कर परिवार, समाज व देश के कल्याण की कामना की। पंडित श्रीकृष्ण मिश्र ने बताया कि मां के दरबार में भक्तों द्वारा सच्चे मन से मांगी गई हर मनौती पूरी होती है। (संवाद)
देवीपाटन में श्रद्धालुओं का रेला
अमेठी। शहर स्थित श्रीदेवीपाटन मंदिर, गायत्री माता मंदिर व काली माता मंदिर में सुबह से ही भक्तों की कतार लगी रही। एसडीएम महात्मा सिंह ने श्रीदेवीपाटन मंदिर पहुंचकर माता के दर्शन किए और सुरक्षा व्यवस्था आदि का जायजा लिया। मंदिरों पर श्रद्धालुओं की सुविधा और व्यवस्था को लेकर पुलिस बल तैनात है। साथ ही प्रतिष्ठित देवी मंदिरों में नवरात्र के पहले दिन भक्तों की भारी भीड़ रही। नारियल चुनरी और विविध प्रसाद चढ़ाकर श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। घरों में भी घटस्थापना कर व्रतियों ने अनुष्ठान शुरू किया।
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शारदीय नवरात्र के पहले दिन लोगों ने देवी मंदिरों व अपने घरों में कलश स्थापित कर मां के प्रथम शैलपुत्री स्वरूप की पूजा की। शहर से लेकर गांवों तक में कलश स्थापना का क्रम सुबह से शुरू होकर देर शाम तक चलता रहा। नवरात्र का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं ने अपने घरों में तथा देवी मंदिरों में कलश स्थापित कर मां दुर्गा की पूजा अर्चना की।
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क्षेत्र के प्रसिद्ध देवी मंदिरों पर भोर चार बजे से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। मंदिर परिसर से लेकर रास्तों पर भी मां के जयकारे गूंजते रहे। भीड़ को देखते हुए मंदिर कमेटी के साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने के इंतजाम किए गए थे।
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कालिकन धाम, दुर्गन भवानी, अहोरवा भवानी, हिंगलाज माता मंदिर, माता मवई धाम, देवीपाटन सहित कई प्राचीन ऐतिहासिक देवी मंदिरों में दिन भर आस्था का सैलाब उमड़ता रहा। इसके अतिरिक्त ग्रामीण क्षेत्र में कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पांडाल सजाकर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर सामूहिक पूजन-अर्चन कर परिवार, समाज व देश के कल्याण की मनोकामना।
सभी देवी मंदिरों में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम दिखाई पड़े। सुरक्षा कर्मी लोगों को कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए दर्शन करने के लिए पंक्तिबद्ध करते रहे। मंदिर कमेटी के कार्यकर्ता भी पूरे दिन इसी कवायद में जुटे रहे।
कालिकन धाम में उमड़े श्रद्धालु
संग्रामपुर। नवरात्र का पहला दिन सिद्धपीठ कालिकन धाम मां की भक्ति के रंग में रंगा दिखा। कालिकन धाम में भोर से ही शंख और घंटे-घड़ियाल के साथ जय माता दी के उद्घोष गूंजने लगे। घरों में वैदिक अनुष्ठानों के बीच कलश स्थापना हुई। कालिकन धाम में भक्तों की भारी भीड़ दिखाई दी। भक्तों की ओर से लगाए जाने वाले जयकारों से मंदिर परिसर दिन भर गुंजायमान रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने व्रत रखा। इसके लिए सामान की जमकर खरीदारी की। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं में महिलाओं की संख्या ज्यादा रही। (संवाद)
अनेक नामों से प्रसिद्ध है मां का यह रूप
संग्रामपुर। कालिकन धाम के पीठाधीश्वर श्रीमहाराज ने बताया कि प्रथम दिन माता शैलपुत्री की पूजा की गई। शैलपुत्री माता का यह रूप अनेक नामों से प्रसिद्ध है। इनमें शुभांगी, उमा, पार्वती, दुर्गा, सती, शिवांगी, गौरी, महेश्वरी, अर्पणा व पर्वतवासिनि नाम शामिल हैं। पूर्व जन्म में इनके पिता दक्ष थे। राजा दक्ष ने यज्ञ किया पर अपने दामाद शिव को निमंत्रण नहीं दिया। भगवान शंकर की अनुमति के बिना सती अपने पिता के यहां चली गईं। यज्ञ स्थल पर पहुंचने पर सती का तिरस्कार हुआ। इस पर सती यज्ञ की अग्नि में कूद पड़ीं। सती का अगला जन्म शैलराज की पुत्री पार्वती के रूप में हुआ। (संवाद)
बड़ी संख्या में लोगों ने किया दर्शन
इन्हौना। आदिशक्ति पीठ मां अहोरवा भवानी का मंदिर प्राचीन मंदिरों में शुमार है। बृहस्पतिवार को इस मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। दूर दराज से आए लोग सुबह से ही मंदिर पहुंचने लगे। मंदिर पहुंचने वाले ने मां का दर्शन पूजन कर परिवार, समाज व देश के कल्याण की कामना की। पंडित श्रीकृष्ण मिश्र ने बताया कि मां के दरबार में भक्तों द्वारा सच्चे मन से मांगी गई हर मनौती पूरी होती है। (संवाद)
देवीपाटन में श्रद्धालुओं का रेला
अमेठी। शहर स्थित श्रीदेवीपाटन मंदिर, गायत्री माता मंदिर व काली माता मंदिर में सुबह से ही भक्तों की कतार लगी रही। एसडीएम महात्मा सिंह ने श्रीदेवीपाटन मंदिर पहुंचकर माता के दर्शन किए और सुरक्षा व्यवस्था आदि का जायजा लिया। मंदिरों पर श्रद्धालुओं की सुविधा और व्यवस्था को लेकर पुलिस बल तैनात है। साथ ही प्रतिष्ठित देवी मंदिरों में नवरात्र के पहले दिन भक्तों की भारी भीड़ रही। नारियल चुनरी और विविध प्रसाद चढ़ाकर श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। घरों में भी घटस्थापना कर व्रतियों ने अनुष्ठान शुरू किया।