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फूलों की मांग घटने से चिंता में किसान
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जगदीशपुर (अमेठी)। क्षेत्र के नियावां गांव के चंदिका मौर्या व संतलाल, ढुडेहरी के रामराज मौर्या, हंसवा सुरवन के रामतीरथ, पूरे लाल खां के बाल किशन, सरैया पीरजादा के महराजदीन, गाईमऊ के देशराज, कोयलारा मुबारकपुर, रस्तामऊ व आजादपुर आदि गांवों के कई लोग फूलों की खेती करते हैं।
इस खेती से उनको अच्छी आय होती थी। एक साल से कोरोना के चलते फूल की खेती करने वाले आर्थिक संकट में घिरे हैं। धार्मिक स्थल बंद हैं। वैवाहिक व अन्य आयोजन न होने से फूलों की मांग न के बराबर है।
नियांवा निवासी राहुल बताते हैं कि पहले 150 रुपये में बिकने वाला गुलाब अभी 50 रुपये प्रति किलो में बिक रहा है। व्यापारी सौ से 150 रुपये में बिकने वाले बंडल को अभी 30 से 50 रुपये में बेच रहा है।
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फूलों ने बदली रामराज की किस्मत
ढुडेहरी के किसान रामराज मौर्य ने गुलाब के फूलों की खेती से अपने परिवार की माली हालत बदली और चार बेटों में तीन को उच्च शिक्षा दिलाई। चौथा बेटा डी-फार्मा कर रहा है। इनके बेटे गुलाब की खेती में हाथ बटाते हैं। उन्होने बताया कि वह करीब 25 सालों से गुलाब के फूलों की खेती कर रहे हैं। उनसे प्रेरणा लेकर गांव व क्षेत्र के दर्जनों लोग गुलाब की खेती कर स्वावलंबी बने हैं।
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इस खेती से उनको अच्छी आय होती थी। एक साल से कोरोना के चलते फूल की खेती करने वाले आर्थिक संकट में घिरे हैं। धार्मिक स्थल बंद हैं। वैवाहिक व अन्य आयोजन न होने से फूलों की मांग न के बराबर है।
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नियांवा निवासी राहुल बताते हैं कि पहले 150 रुपये में बिकने वाला गुलाब अभी 50 रुपये प्रति किलो में बिक रहा है। व्यापारी सौ से 150 रुपये में बिकने वाले बंडल को अभी 30 से 50 रुपये में बेच रहा है।
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फूलों ने बदली रामराज की किस्मत
ढुडेहरी के किसान रामराज मौर्य ने गुलाब के फूलों की खेती से अपने परिवार की माली हालत बदली और चार बेटों में तीन को उच्च शिक्षा दिलाई। चौथा बेटा डी-फार्मा कर रहा है। इनके बेटे गुलाब की खेती में हाथ बटाते हैं। उन्होने बताया कि वह करीब 25 सालों से गुलाब के फूलों की खेती कर रहे हैं। उनसे प्रेरणा लेकर गांव व क्षेत्र के दर्जनों लोग गुलाब की खेती कर स्वावलंबी बने हैं।