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Amethi News: राम कथा सुनने से दूर होता है संशय
Tue, 29 Oct 2024 01:11 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Tue, 29 Oct 2024 01:11 AM IST
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गौरीगंज के मऊ गांव में श्रीराम कथा सुनते श्रद्धालु।
अमेठी सिटी। राम कथा सुनने से मन का शुद्धिकरण होता है। इससे संशय दूर होता है और शांति व मुक्ति मिलती है। आज भगवान श्रीराम के आदर्शों व व्यक्तित्व को उतारने की जरूरत है। ये बातें गौरीगंज के मऊ गांव में विधायक राकेश प्रताप सिंह के आवास पर सोमवार से शुरू हुई तीन दिवसीय श्रीराम कथा के पहले दिन प्रवाचक दिनेश त्रिपाठी महाराज ने कहीं।
प्रवाचक ने कहा कि श्रीरामकथा सिर्फ एक कथा नहीं, बल्कि कर्म, त्याग और भक्ति की त्रिवेणी है। अगर प्रत्येक व्यक्ति भगवान श्रीराम के जीवन मूल्यों को आत्मसात कर ले तो समाज का कल्याण हो जाएगा। राम कथा अहंकार त्यागकर एक आदर्श और सत्यवादी जीवन जीने की प्रेरणा देती है। कहा कि जहां भगवान श्रीराम की कृपा होती है, उसी जगह रामकथा संभव हो पाती है। राम की कृपा वहीं होती है, जहां उनके भक्त रहते हैं।
उन्हाेंने कहा कि प्रभु ने ही मानव शरीर बनाया है। लेकिन पुरुषार्थ मानव का धर्म है। बिना परिश्रम के कुछ भी मिलना असंभव है। रामकथा से हर जीव की व्यथा दूर हो जाती है। संसार के सभी जीवों का मंगल रामकथा के श्रवणपान से ही हो जाएगा। कहा कि भगवान भक्ति के अधीन होते हैं। श्रद्धापूर्वक की गई भक्ति के आगे वह विवश रहते हैं। भगवान का सच्चा भक्त उन्हें जिस रूप में याद करता है, वह उसी रूप में दर्शन देते है। प्रवाचक ने भारतीय मर्यादा और मां की ममता का उल्लेख करते हुए बताया कि जब भरतजी माता कौशल्या के पास जाकर पश्चाताप करते हैं तो माता कौशल्या भरत को हृदय से लगा लेती हैं। इस मौके पर बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि सहित क्षेत्र के श्रद्धालु मौजूद रहे।
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प्रवाचक ने कहा कि श्रीरामकथा सिर्फ एक कथा नहीं, बल्कि कर्म, त्याग और भक्ति की त्रिवेणी है। अगर प्रत्येक व्यक्ति भगवान श्रीराम के जीवन मूल्यों को आत्मसात कर ले तो समाज का कल्याण हो जाएगा। राम कथा अहंकार त्यागकर एक आदर्श और सत्यवादी जीवन जीने की प्रेरणा देती है। कहा कि जहां भगवान श्रीराम की कृपा होती है, उसी जगह रामकथा संभव हो पाती है। राम की कृपा वहीं होती है, जहां उनके भक्त रहते हैं।
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उन्हाेंने कहा कि प्रभु ने ही मानव शरीर बनाया है। लेकिन पुरुषार्थ मानव का धर्म है। बिना परिश्रम के कुछ भी मिलना असंभव है। रामकथा से हर जीव की व्यथा दूर हो जाती है। संसार के सभी जीवों का मंगल रामकथा के श्रवणपान से ही हो जाएगा। कहा कि भगवान भक्ति के अधीन होते हैं। श्रद्धापूर्वक की गई भक्ति के आगे वह विवश रहते हैं। भगवान का सच्चा भक्त उन्हें जिस रूप में याद करता है, वह उसी रूप में दर्शन देते है। प्रवाचक ने भारतीय मर्यादा और मां की ममता का उल्लेख करते हुए बताया कि जब भरतजी माता कौशल्या के पास जाकर पश्चाताप करते हैं तो माता कौशल्या भरत को हृदय से लगा लेती हैं। इस मौके पर बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि सहित क्षेत्र के श्रद्धालु मौजूद रहे।
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