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Amethi News: आपात स्थिति में घबराएं नहीं, डटकर करें मुकाबला
Wed, 24 Sep 2025 12:06 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Wed, 24 Sep 2025 12:06 AM IST
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कस्तूरबा गांधी विद्यालय संग्रामपुर में अमर उजाला की ओर से आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में मौजूद छ
संग्रामपुर। बेटियों को आत्मनिर्भर और निडर बनाने की दिशा में मंगलवार को कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल, नारी गरिमा का साझा संकल्प अभियान के तहत कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस दौरान आत्मरक्षा का प्रशिक्षण पाकर छात्राओं ने न केवल खुद को सशक्त महसूस किया, बल्कि जीवन की चुनौतियों का डटकर सामना करने का हौसला भी पाया।
प्रशिक्षण की शुरुआत सेल्फ डिफेंस ट्रेनर रीना सिंह और साधना सिंह ने प्रेरणादायक बातों और डेमो से की। साधना सिंह ने छात्राओं को समझाया कि सार्वजनिक स्थानों पर छेड़छाड़ जैसी स्थिति आने पर डरने या चुप रहने के बजाय साहस और सूझबूझ से स्थिति संभालनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आत्मरक्षा का उद्देश्य केवल हमलावर से खुद को बचाना नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर दूसरों की मदद करना भी है।
प्रशिक्षण सत्र में छात्राओं को बताया गया कि दैनिक जीवन की सामान्य वस्तुओं का उपयोग करते हुए भी आत्मरक्षा संभव है। साधना सिंह ने यह भी समझाया कि घरेलू कार्य करते हुए शरीर को मजबूत बनाया जा सकता है। राह चलते परेशान करने वालों से निपटने के व्यावहारिक तरीके मंच पर अभ्यास कराए गए। छात्राओं को यह गुर दिया गया कि किसी भी आपात स्थिति में घबराने के बजाय शांत रहकर साहसिक ढंग से मुकाबला करना चाहिए। इस मौके पर छात्राओं ने जूडो-कराटे के गुर सीखे।
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प्रशिक्षकों ने बताया कि आत्मरक्षा के प्रशिक्षण से बेटियां इतनी सक्षम बन सकती हैं कि विपरीत हालात में खुद को सुरक्षित रखते हुए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकती हैं। छात्रा अर्चना वर्मा, नंदिनी, श्रुति, साक्षी, सुष्मिता, कोमल और निवेदिता ने बताया कि यह अनुभव बेहद उपयोगी रहा। नियमित प्रशिक्षण मिले तो वे निडर होकर हर चुनौती का सामना कर सकेंगी।
बीईओ शशांक मिश्रा ने कहा कि अपराजिता केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में बेटियों की गरिमा और सम्मान को सुरक्षित रखने का संकल्प है। उन्होंने अमर उजाला की इस पहल की सराहना की। वार्डन सीमा मिश्रा ने कहा कि आत्मरक्षा का प्रशिक्षण बेटियों को निडर बनाता है और समाज में स्वतंत्र होकर आगे बढ़ने की ताकत देता है। इस अवसर पर शिक्षिकाएं रश्मि सिंह, मनिता यादव, मालती गुप्ता, कविता देवी और लेखाकार ज्योति मौर्या उपस्थित रहीं। उत्साह से भरी छात्राओं ने खुद को सशक्त बनाने का संकल्प लिया।
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प्रशिक्षण की शुरुआत सेल्फ डिफेंस ट्रेनर रीना सिंह और साधना सिंह ने प्रेरणादायक बातों और डेमो से की। साधना सिंह ने छात्राओं को समझाया कि सार्वजनिक स्थानों पर छेड़छाड़ जैसी स्थिति आने पर डरने या चुप रहने के बजाय साहस और सूझबूझ से स्थिति संभालनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आत्मरक्षा का उद्देश्य केवल हमलावर से खुद को बचाना नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर दूसरों की मदद करना भी है।
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प्रशिक्षण सत्र में छात्राओं को बताया गया कि दैनिक जीवन की सामान्य वस्तुओं का उपयोग करते हुए भी आत्मरक्षा संभव है। साधना सिंह ने यह भी समझाया कि घरेलू कार्य करते हुए शरीर को मजबूत बनाया जा सकता है। राह चलते परेशान करने वालों से निपटने के व्यावहारिक तरीके मंच पर अभ्यास कराए गए। छात्राओं को यह गुर दिया गया कि किसी भी आपात स्थिति में घबराने के बजाय शांत रहकर साहसिक ढंग से मुकाबला करना चाहिए। इस मौके पर छात्राओं ने जूडो-कराटे के गुर सीखे।
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प्रशिक्षकों ने बताया कि आत्मरक्षा के प्रशिक्षण से बेटियां इतनी सक्षम बन सकती हैं कि विपरीत हालात में खुद को सुरक्षित रखते हुए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकती हैं। छात्रा अर्चना वर्मा, नंदिनी, श्रुति, साक्षी, सुष्मिता, कोमल और निवेदिता ने बताया कि यह अनुभव बेहद उपयोगी रहा। नियमित प्रशिक्षण मिले तो वे निडर होकर हर चुनौती का सामना कर सकेंगी।
बीईओ शशांक मिश्रा ने कहा कि अपराजिता केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में बेटियों की गरिमा और सम्मान को सुरक्षित रखने का संकल्प है। उन्होंने अमर उजाला की इस पहल की सराहना की। वार्डन सीमा मिश्रा ने कहा कि आत्मरक्षा का प्रशिक्षण बेटियों को निडर बनाता है और समाज में स्वतंत्र होकर आगे बढ़ने की ताकत देता है। इस अवसर पर शिक्षिकाएं रश्मि सिंह, मनिता यादव, मालती गुप्ता, कविता देवी और लेखाकार ज्योति मौर्या उपस्थित रहीं। उत्साह से भरी छात्राओं ने खुद को सशक्त बनाने का संकल्प लिया।