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Amethi News: कठिन हालात में भी न छोड़ें मर्यादा का साथ
Tue, 06 Oct 2026 12:40 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Tue, 06 Oct 2026 12:40 AM IST
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तिलोई स्थित राजा विश्वनाथ शरण सिंह इंटर कॉलेज के प्रांगण श्रीराम कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत: आ
तिलोई। आरबीएस इंटर कॉलेज परिसर में चल रही श्रीराम कथा के पांचवें दिन प्रवाचक आचार्य शांतनु महाराज ने कथा के प्रसंगों के माध्यम से जीवन में आत्मावलोकन, अच्छी संगति और पारिवारिक संस्कारों का महत्व बताया। कहा कि भगवान राम का जीवन कठिन परिस्थितियों में भी मर्यादा, धैर्य और परिवार के प्रति जिम्मेदारी निभाने की सीख देता है। उनका आचरण बताता है कि कठिन परिस्थितियों में भी परिवार, संस्कार और मर्यादा का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।
प्रवाचक ने राजा दशरथ के शीशा देखने के प्रसंग की व्याख्या करते हुए कहा कि व्यक्ति को समय-समय पर स्वयं के भीतर झांकना चाहिए। शीशा केवल चेहरा दिखाने का माध्यम नहीं, आत्मावलोकन का भी प्रतीक है। आत्मचिंतन, आत्मदर्शन और आत्मसंवाद से व्यक्ति अपनी कमियों को पहचान कर जीवन में सुधार कर सकता है।
उन्होंने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ व्यक्ति को जिम्मेदारियों का आकलन करते हुए धीरे-धीरे भजन और आध्यात्मिक चिंतन की ओर बढ़ना चाहिए। मंथरा के प्रसंग से उन्होंने कुसंग से बचने की सीख दी। कहा कि गलत संगति धीरे-धीरे व्यक्ति की सोच और निर्णय को प्रभावित कर सकती है। इसे कभी छोटा नहीं समझना चाहिए।
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कैकेयी के वरदान और भगवान राम के वनवास के प्रसंग में उन्होंने धैर्य और मर्यादा का संदेश बताया। कहा कि वनवास की सूचना मिलने के बाद भगवान राम ने मां कौशल्या से आशीर्वाद लिया। लक्ष्मण का उनके साथ वन जाना भाई के प्रति प्रेम और समर्पण का उदाहरण है। कथा में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, विधान परिषद सदस्य रविशंकर सिंह समेत अतिथियों ने आरती-पूजन किया। राज्यमंत्री ने अतिथियों को प्रतीक चिह्न भेंट किए। इस मौके पर विधायक राजेंद्र मौर्य, अशोक कोरी, उपासना सिंह, मृगांकेश्वर शरण सिंह, अर्चना सिंह आदि मौजूद रहे।
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प्रवाचक ने राजा दशरथ के शीशा देखने के प्रसंग की व्याख्या करते हुए कहा कि व्यक्ति को समय-समय पर स्वयं के भीतर झांकना चाहिए। शीशा केवल चेहरा दिखाने का माध्यम नहीं, आत्मावलोकन का भी प्रतीक है। आत्मचिंतन, आत्मदर्शन और आत्मसंवाद से व्यक्ति अपनी कमियों को पहचान कर जीवन में सुधार कर सकता है।
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उन्होंने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ व्यक्ति को जिम्मेदारियों का आकलन करते हुए धीरे-धीरे भजन और आध्यात्मिक चिंतन की ओर बढ़ना चाहिए। मंथरा के प्रसंग से उन्होंने कुसंग से बचने की सीख दी। कहा कि गलत संगति धीरे-धीरे व्यक्ति की सोच और निर्णय को प्रभावित कर सकती है। इसे कभी छोटा नहीं समझना चाहिए।
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कैकेयी के वरदान और भगवान राम के वनवास के प्रसंग में उन्होंने धैर्य और मर्यादा का संदेश बताया। कहा कि वनवास की सूचना मिलने के बाद भगवान राम ने मां कौशल्या से आशीर्वाद लिया। लक्ष्मण का उनके साथ वन जाना भाई के प्रति प्रेम और समर्पण का उदाहरण है। कथा में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, विधान परिषद सदस्य रविशंकर सिंह समेत अतिथियों ने आरती-पूजन किया। राज्यमंत्री ने अतिथियों को प्रतीक चिह्न भेंट किए। इस मौके पर विधायक राजेंद्र मौर्य, अशोक कोरी, उपासना सिंह, मृगांकेश्वर शरण सिंह, अर्चना सिंह आदि मौजूद रहे।