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Amethi News: भक्तों ने की मां त्रिपुर भैरवी की पूजा
Wed, 02 Jul 2025 12:51 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Wed, 02 Jul 2025 12:51 AM IST
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जगदीशपुर (अमेठी)। श्रद्धालुओं ने गुप्त नवरात्र के छठे दिन मंगलवार को मंदिरों में दर्शन-पूजन कर मां त्रिपुर भैरवी की आराधना की। देवी त्रिपुर भैरवी को बंदीछोड़ माता भी कहा गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्र में मां त्रिपुर भैरवी की पूजा करने से सभी प्रकार के कानूनी मामलों और कारावास आदि से मुक्ति मिलती है।
स्थानीय औद्योगिक क्षेत्र स्थित सेल कैंपस के आनंदेश्वर शिव मंदिर प्रांगण में विराजमान मां दुर्गा, सरस्वती, लक्ष्मी, राधा, माता सीता सहित स्थापित अन्य प्रतिमाओं की भी आराधना श्रद्धालुओं ने की। भोर से शुरू हुआ दर्शन-पूजन का दौर दोपहर तक चला। पंडित आशुतोष पांडेय ने बताया कि छठवें दिन मां त्रिपुर भैरवी की आराधना विधानपूर्वक श्रद्धाभाव से की गई। मां त्रिपुर भैरवी अहंकार का नाश करने वाली मानी जाती हैं।
दुर्गा सप्तशती के अनुसार त्रिपुर भैरवी के उग्र स्वरूप की कांति हजारों उगते सूर्य के समान है। धार्मिक कथाओं में इस बात का वर्णन है कि माता त्रिपुर भैरवी की उत्पत्ति महाकाली के छाया विग्रह से हुई है। देवी भागवत के अनुसार छठी महाविद्या त्रिपुर भैरवी हैं। बताया कि मां त्रिपुर भैरवी के विभिन्न प्रकार के भेद माने गए हैं, जिसमें सिद्ध भैरवी, चैतन्य भैरवी, भुवनेश्वर भैरवी, संपदाप्रद भैरवी, कमलेश्वरी भैरवी, कौलेश्वर भैरवी, नित्या भैरवी, रूद्र भैरवी, भ्रद भैरवी आदि रूप माने जाते हैं।
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पंडित अनिल शास्त्री बताते हैं कि मान्यताओं के अनुसार मां त्रिपुर भैरवी की पूजा करने वालों को विभिन्न प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है। कॅरिअर और कारोबार में वृद्धि होती है। ऐसा भी माना जाता है कि अगर कोई व्यक्ति सच्चे मन से मां त्रिपुर भैरवी की आराधना करता है तो उसकी मनचाहे विवाह की इच्छा पूरी होती है। उधर, आदिशक्ति पीठ कालिकन धाम और मां अहोरवा भवानी धाम में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। सुबह से ही भक्त पूजन-अर्चन और दर्शन के लिए मंदिर पहुंचने लगे। दोनों धामों पर दिनभर मां के जयकारे लगते रहे।
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स्थानीय औद्योगिक क्षेत्र स्थित सेल कैंपस के आनंदेश्वर शिव मंदिर प्रांगण में विराजमान मां दुर्गा, सरस्वती, लक्ष्मी, राधा, माता सीता सहित स्थापित अन्य प्रतिमाओं की भी आराधना श्रद्धालुओं ने की। भोर से शुरू हुआ दर्शन-पूजन का दौर दोपहर तक चला। पंडित आशुतोष पांडेय ने बताया कि छठवें दिन मां त्रिपुर भैरवी की आराधना विधानपूर्वक श्रद्धाभाव से की गई। मां त्रिपुर भैरवी अहंकार का नाश करने वाली मानी जाती हैं।
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दुर्गा सप्तशती के अनुसार त्रिपुर भैरवी के उग्र स्वरूप की कांति हजारों उगते सूर्य के समान है। धार्मिक कथाओं में इस बात का वर्णन है कि माता त्रिपुर भैरवी की उत्पत्ति महाकाली के छाया विग्रह से हुई है। देवी भागवत के अनुसार छठी महाविद्या त्रिपुर भैरवी हैं। बताया कि मां त्रिपुर भैरवी के विभिन्न प्रकार के भेद माने गए हैं, जिसमें सिद्ध भैरवी, चैतन्य भैरवी, भुवनेश्वर भैरवी, संपदाप्रद भैरवी, कमलेश्वरी भैरवी, कौलेश्वर भैरवी, नित्या भैरवी, रूद्र भैरवी, भ्रद भैरवी आदि रूप माने जाते हैं।
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पंडित अनिल शास्त्री बताते हैं कि मान्यताओं के अनुसार मां त्रिपुर भैरवी की पूजा करने वालों को विभिन्न प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है। कॅरिअर और कारोबार में वृद्धि होती है। ऐसा भी माना जाता है कि अगर कोई व्यक्ति सच्चे मन से मां त्रिपुर भैरवी की आराधना करता है तो उसकी मनचाहे विवाह की इच्छा पूरी होती है। उधर, आदिशक्ति पीठ कालिकन धाम और मां अहोरवा भवानी धाम में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। सुबह से ही भक्त पूजन-अर्चन और दर्शन के लिए मंदिर पहुंचने लगे। दोनों धामों पर दिनभर मां के जयकारे लगते रहे।