{"_id":"6171a9462fc3676847467037","slug":"dedline-closer-still-collectorate-work-incomplete-amethi-news-lko601079278","type":"story","status":"publish","title_hn":"डेडलाइन करीब, अब भी कलेक्ट्रेट का काम अधूरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डेडलाइन करीब, अब भी कलेक्ट्रेट का काम अधूरा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गौरीगंज (अमेठी)। 11 वर्ष पूर्व स्थापित जिले का कलेक्ट्रेट अब भी तहसील के अस्थाई भवन में संचालित हो रहा है। स्वीकृति व कार्य शुरू होने के साढ़े पांच साल बाद भी विशुनदासपुर में निर्माणाधीन कलेक्ट्रेट भवन का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। यह स्थिति तब है जब शासन की ओर से भवन निर्माण के लिए स्वीकृत संपूर्ण 17.77 करोड़ रुपयेे कार्यदायी संस्था के खाते में अंतरित किए जा चुके हैं।
जिले का पुनर्गठन 11 वर्ष पूर्व हुआ था। जिला बनने के बाद आधारभूत ढांचा विकसित करने की कवायद के तहत तत्कालीन जिला प्रशासन ने शहर के जामो रोड पर कलेक्ट्रेट, एसपी ऑफिस व दीवानी न्यायालय के लिए भूमि का अधिग्रहण किया था। इसी भूमि के 4887.89 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में कलेक्ट्रेट निर्माण को स्वीकृति शासन ने वर्ष 2014 में दी थी।
प्रशासनिक स्वीकृति के डेढ़ वर्ष बाद भवन निर्माण के लिए 10 करोड़ 40 लाख 94 हजार का बजट स्वीकृत करते हुए उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड अयोध्या को कार्यदायी संस्था नामित किया गया था। कार्यदायी संस्था नामित करने व स्वीकृत बजट के सापेक्ष पहली किस्त जारी करने के बाद तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंत्री शिवपाल यादव ने लखनऊ से ही कलेक्ट्रेट भवन की आधारशिला रखी थी।
विज्ञापन
स्वीकृत राशि की पहली किस्त मिलने के बाद कार्यदायी संस्था ने 31 मार्च 2016 को भवन निर्माण का काम शुरू किया था। शुरू में इस काम को पूरा करने के लिए निर्धारित डेडलाइन बाद में बढ़ाकर 31 मार्च 2022 कर दी गई। अब जबकि डेडलाइन पूरा होने में मात्र पांच माह शेष हैं अभी भवन निर्माण का काम पूरा नहीं हो सका है।
कार्यदायी संस्था की यह स्थिति तब है जब मौजूदा सरकार पूर्व में स्वीकृत एस्टीमेट के बाद सात करोड़ 36 लाख 48 हजार के रिवाइज इस्टीमेट को स्वीकृति देने के साथ (पांच प्रतिशत राशि 36.82 लाख रुपये रोककर) संपूर्ण राशि का भुगतान भी कर चुकी है।
यह होना है निर्माण
कलेक्ट्रेट भवन के अलावा स्वीकृत धनराशि से 315 मीटर बाउंड्रीवॉल, 290 मीटर सीसी रोड, 300 मीटर इंटरलॉकिंग, पानी की टंकी, पंप रूम व 226.18 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में कैंटीन का निर्माण होना है।
पूर्व में भेजा गया था 30 करोड़ का इस्टीमेट
कलेक्ट्रेट के शुरुआती बजट में निर्माण कार्य पूरा होने के बाद कार्यदायी संस्था ने पूर्व में डीएम रहे प्रशांत शर्मा के हस्ताक्षर से करीब 30 करोड़ रुपये का रिवाइज इस्टीमेट शासन को भेजा था। शासन ने यह एस्टीमेट जिला प्रशासन को कड़ी टिप्पणी के साथ यह कहते हुए वापस कर दिया था कि दोबारा कम बजट का इस्टीमेट भेजा जाए।
दोबारा गया 17.77 करोड़ रुपयेे का इस्टीमेट
इस्टीमेट को स्वीकृति नहीं मिलने के बाद मौजूदा डीएम अरुण कुमार ने पूर्व में स्वीकृत 10 करोड़ 40 लाख 94 हजार के बजट को रिवाइज करते हुए 17 करोड़ 77 लाख 42 हजार (सात करोड़ 36 लाख 48 हजार) किए जाने का अनुरोध किया था। मौजूदा डीएम के पत्र पर न सिर्फ शासन ने रिवाइज इस्टीमेट पर मुहर लगाई बल्कि पांच फीसदी राशि रोक कर छह करोड़ 99 लाख रुपये अवमुक्त भी कर दिया।
30 प्रतिशत काम अधूरा
कलेक्ट्रेक निर्माण को लेकर डीएम अरुण कुमार खासे गंभीर हैं। डीएम आए दिन निर्माणाधीन भवन का निरीक्षण करते हैं और कार्यदायी संस्था को डेडलाइन में निर्माण पूरा करने का निर्देश में देते हैं। बावजूद इसके कार्यदायी संस्था के मुताबिक अब तक महज 70 प्रतिशत निर्माण पूरा हो सका है। अब भी तीस प्रतिशत काम बचा है।
डेडलाइन में पूरा होगा निर्माण
कार्यदायी संस्था के सहायक अभियंता अजय कुमार ने कहा कि कलेक्ट्रेट निर्माण का कार्य तीव्र गति से चल रहा है। निर्माण की डेडलाइन 31 मार्च 2022 है। डेडलाइन से पूर्व कलेक्ट्रेट भवन का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा।
11 साल पहले बना था जिला
सुल्तानपुर जिले की तीन (अमेठी, गौरीगंज व मुसाफिरखाना) तथा रायबरेली जिले की दो (सलोन व तिलोई) तहसीलों को काटकर अमेठी जिले का पुनर्गठन एक जुलाई 2010 को हुआ था। पुनर्गठन के दो वर्ष बाद सत्ता में आई अखिलेश सरकार ने सलोन तहसील को पुन: रायबरेली में शामिल कर दिया था। सलोन के रायबरेली में शामिल हो जाने के बाद जिले में मौजूदा समय में चार तहसीलें हैं।
विज्ञापन
जिले का पुनर्गठन 11 वर्ष पूर्व हुआ था। जिला बनने के बाद आधारभूत ढांचा विकसित करने की कवायद के तहत तत्कालीन जिला प्रशासन ने शहर के जामो रोड पर कलेक्ट्रेट, एसपी ऑफिस व दीवानी न्यायालय के लिए भूमि का अधिग्रहण किया था। इसी भूमि के 4887.89 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में कलेक्ट्रेट निर्माण को स्वीकृति शासन ने वर्ष 2014 में दी थी।
विज्ञापन
प्रशासनिक स्वीकृति के डेढ़ वर्ष बाद भवन निर्माण के लिए 10 करोड़ 40 लाख 94 हजार का बजट स्वीकृत करते हुए उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड अयोध्या को कार्यदायी संस्था नामित किया गया था। कार्यदायी संस्था नामित करने व स्वीकृत बजट के सापेक्ष पहली किस्त जारी करने के बाद तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंत्री शिवपाल यादव ने लखनऊ से ही कलेक्ट्रेट भवन की आधारशिला रखी थी।
विज्ञापन
स्वीकृत राशि की पहली किस्त मिलने के बाद कार्यदायी संस्था ने 31 मार्च 2016 को भवन निर्माण का काम शुरू किया था। शुरू में इस काम को पूरा करने के लिए निर्धारित डेडलाइन बाद में बढ़ाकर 31 मार्च 2022 कर दी गई। अब जबकि डेडलाइन पूरा होने में मात्र पांच माह शेष हैं अभी भवन निर्माण का काम पूरा नहीं हो सका है।
कार्यदायी संस्था की यह स्थिति तब है जब मौजूदा सरकार पूर्व में स्वीकृत एस्टीमेट के बाद सात करोड़ 36 लाख 48 हजार के रिवाइज इस्टीमेट को स्वीकृति देने के साथ (पांच प्रतिशत राशि 36.82 लाख रुपये रोककर) संपूर्ण राशि का भुगतान भी कर चुकी है।
यह होना है निर्माण
कलेक्ट्रेट भवन के अलावा स्वीकृत धनराशि से 315 मीटर बाउंड्रीवॉल, 290 मीटर सीसी रोड, 300 मीटर इंटरलॉकिंग, पानी की टंकी, पंप रूम व 226.18 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में कैंटीन का निर्माण होना है।
पूर्व में भेजा गया था 30 करोड़ का इस्टीमेट
कलेक्ट्रेट के शुरुआती बजट में निर्माण कार्य पूरा होने के बाद कार्यदायी संस्था ने पूर्व में डीएम रहे प्रशांत शर्मा के हस्ताक्षर से करीब 30 करोड़ रुपये का रिवाइज इस्टीमेट शासन को भेजा था। शासन ने यह एस्टीमेट जिला प्रशासन को कड़ी टिप्पणी के साथ यह कहते हुए वापस कर दिया था कि दोबारा कम बजट का इस्टीमेट भेजा जाए।
दोबारा गया 17.77 करोड़ रुपयेे का इस्टीमेट
इस्टीमेट को स्वीकृति नहीं मिलने के बाद मौजूदा डीएम अरुण कुमार ने पूर्व में स्वीकृत 10 करोड़ 40 लाख 94 हजार के बजट को रिवाइज करते हुए 17 करोड़ 77 लाख 42 हजार (सात करोड़ 36 लाख 48 हजार) किए जाने का अनुरोध किया था। मौजूदा डीएम के पत्र पर न सिर्फ शासन ने रिवाइज इस्टीमेट पर मुहर लगाई बल्कि पांच फीसदी राशि रोक कर छह करोड़ 99 लाख रुपये अवमुक्त भी कर दिया।
30 प्रतिशत काम अधूरा
कलेक्ट्रेक निर्माण को लेकर डीएम अरुण कुमार खासे गंभीर हैं। डीएम आए दिन निर्माणाधीन भवन का निरीक्षण करते हैं और कार्यदायी संस्था को डेडलाइन में निर्माण पूरा करने का निर्देश में देते हैं। बावजूद इसके कार्यदायी संस्था के मुताबिक अब तक महज 70 प्रतिशत निर्माण पूरा हो सका है। अब भी तीस प्रतिशत काम बचा है।
डेडलाइन में पूरा होगा निर्माण
कार्यदायी संस्था के सहायक अभियंता अजय कुमार ने कहा कि कलेक्ट्रेट निर्माण का कार्य तीव्र गति से चल रहा है। निर्माण की डेडलाइन 31 मार्च 2022 है। डेडलाइन से पूर्व कलेक्ट्रेट भवन का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा।
11 साल पहले बना था जिला
सुल्तानपुर जिले की तीन (अमेठी, गौरीगंज व मुसाफिरखाना) तथा रायबरेली जिले की दो (सलोन व तिलोई) तहसीलों को काटकर अमेठी जिले का पुनर्गठन एक जुलाई 2010 को हुआ था। पुनर्गठन के दो वर्ष बाद सत्ता में आई अखिलेश सरकार ने सलोन तहसील को पुन: रायबरेली में शामिल कर दिया था। सलोन के रायबरेली में शामिल हो जाने के बाद जिले में मौजूदा समय में चार तहसीलें हैं।