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आखिरकार टूट गया पूर्व विधायक रामसेवक का तिलिस्म

Sat, 15 Jan 2022 11:03 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 15 Jan 2022 11:03 PM IST
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Congress didn't give ticket to the grandson of ramsevak dhobi
51 : जगदीशपुर : सोनिया गांधी के साथ आयोजित एक जनसभा में मौजूद पूर्व विधायक स्व. रामसेवक धोबी। (फाइल फ? - फोटो : AMETHI
जगदीशपुर (अमेठी)। सात साल पहले दुनिया को अलविदा कहने वाले पूर्व विधायक रामसेवक धोबी और उनके परिवार से जुड़ी कांग्रेस के भरोसे की डोर 47 साल बाद आखिरकार टूट गई। कांग्रेस ने रामसेवक के नाती व पूर्व विधायक राधेश्याम धोबी को टिकट न देकर साबित कर दिया कि कांग्रेस के लिए अब यह परिवार बहुत मायने नहीं रखता।
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मुसाफिरखाना नगर पंचायत के वार्ड संख्या-2 के रहने वाले स्व. रामसेवक धोबी कभी अमेठी की राजनीति का अहम किरदार हुआ करते थे। रामसेवक वर्ष 1967 के विधानसभा चुनाव में पहली बार जनसंघ के टिकट पर जगदीशपुर से विधायक चुने गए। वर्ष 1969 में हुए विधानसभा चुनाव में वे दोबारा जनसंघ के टिकट पर विधायक बने।
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हालांकि इंदिरा गांधी से प्रभावित रामसेवक ने 1974 में कांग्रेस ज्वाइन की और तीसरी बार जीतकर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद तो रामसेवक और कांग्रेस एक दूसरे के पर्याय बन गए। कांग्रेस ने उन पर लगातार भरोसा जताया और रामसेवक उस पर खरे उतरते रहे। कांग्रेस के टिकट पर रामसेवक वर्ष 1974, 1980, 1985, 1989, 1991, 2002 व 2007 में जगदीशपुर से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। इस बीच वर्ष 1993 में वे सपा के नंदलाल पासी और 1996 में भाजपा के रामलखन पासी से चुनाव हारे लेकिन पार्टी का भरोसा उनसे नहीं डिगा।
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और तो और अपने जीवित रहते होने वाले 2012 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस से अपने नाती राधेश्याम धोबी के लिए टिकट मांगा तो पार्टी सहर्ष तैयार हो गई। राधेश्याम भी चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे गए। छह अक्तूबर 2014 को रामसेवक का निधन हो गया। रामसेवक के निधन के बाद हुए 2017 मेें हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने राधेश्याम को टिकट दिया लेकिन वे भाजपा के सुरेश पासी से चुनाव हार गए। इस विधानसभा के चुनाव में भी लोगों को भरोसा था कि कांग्रेस राधेश्याम को ही टिकट देगी लेकिन पार्टी ने विजय पासी को टिकट देकर जता दिया कि अब उसे रामसेवक के परिवार पर भरोसा नहीं रहा।
रामसेवक का सम्मान करते थे राजीव
रामसेवक धोबी की कांग्रेस में खासी पकड़ थी। अमेठी के सांसद व बाद में प्रधानमंत्री रहे राजीव गांधी भी रामसेवक का बहुत सम्मान करते थे। रामसेवक को भीड़ में देखते ही राजीव उनके पास पहुंच जाते थे और अलग ले जाकर बात करते थे। राजीव के लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन के दौरान रामसेवक उनके प्रस्तावक हुआ करते थे।

चर्चा का विषय बना कांग्रेस का निर्णय
47 साल बाद रामसेवक के परिवार से हटकर किसी और को पार्टी का टिकट देने का कांग्रेस नेतृत्व का निर्णय क्षेत्र में चर्चा का विषय बना है। पार्टी की ओर से घोषित पहली सूची में स्व. रामसेवक के नाती का टिकट कटने के बाद लोग यह कयास लगा रहे हैं कि पार्टी का यह दांव उसकेे लिए कितना फायदेमंद होगा।

52 : जगदीशपुर : जनसभा कार्यक्रम में राहुल गांधी से हाथ मिलाते पूर्व विधायक स्व. रामसेवक धोबी। (फाइल फ

52 : जगदीशपुर : जनसभा कार्यक्रम में राहुल गांधी से हाथ मिलाते पूर्व विधायक स्व. रामसेवक धोबी। (फाइल फ- फोटो : AMETHI

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