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औद्योगिक पार्क की स्थापना पर संकट के बादल
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01 : सिंहपुर : औद्योगिक पार्क स्थापना का विरोध करते ग्रामीण। -संवाद
- फोटो : AMETHI
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सिंहपुर (अमेठी)। बाराबंकी के हैदरगढ़ व अमेठी जिले के सिंहपुर ब्लॉक के कुछ गांवों में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक पार्क की स्थापना तैयारी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। उपजाऊ भूमि पर चल रही स्थापना तैयारी के विरोध में किसानों का प्रदर्शन गति पकड़ता जा रहा है। किसान किसी भी हाल में अपनी जीविका छोड़ने को तैयार नहीं हैं। क्षेत्रीय किसानों के विरोध का आलम यह है कि रविवार को हैदरगढ़ क्षेत्र के गोसूपुर और सिंहपुर के नगिया मऊ सीमा के निकट भूमि का सर्वे करने आई टीम को बैरंग लौटना पड़ा।
यूपीडा द्वारा सिंहपुर व हैदरगढ़ क्षेत्र में औद्योगिक पार्क बनाने के लिए बंगलुरू की एक कंपनी को टेंडर दिया गया है। इसके तहत कंपनी के अधिकारियों द्वारा किसानों के विरोध के बावजूद जमीनों की पैमाइश कराई जा रही है। जिन जमीनों की पैमाइश का काम पूरा होता जा रहा है वहां जमीन पर पेंट से निशान बनाया जा रहा है।
इस कवायद से नाराज सिंहपुर क्षेत्र के खरांवा के पूरे हिंदू, हथरोहना गांव के धरगही, नागियामऊ, लौली, मेहमानपुर व हैदरगढ़ क्षेत्र के भिखरा, गोसूपुर, खरसतिया कल्यानपुर, अंसारी, भट्टखेरा के किसानों ने शासन-प्रशासन को पत्र भेजकर किसानों की उपजाऊ व सिंचित जमीनों को अधिग्रहीत नहीं करने की गुहार लगाई थी।
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बावजूद इसके एजेंसी द्वारा जमीन पर चिह्नांकन कर दिया गया। इतना ही नहीं रविवार को औद्योगिक पार्क बनाने का टेंडर पाने वाली कंपनी के अधिकारी इंजीनियर्स की टीम के साथ गांव आ गए। इसकी सूचना मिलते ही इन गांव के किसान बड़ी संख्या में खेतों में पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन करने लगे। ग्रामीणों को उग्र होता देख कंपनी के अधिकारी बिना सर्वे किए वापस चले गए।
दो हजार हेक्टेयर जमीन लेने की तैयारी
ग्राम प्रधान भिखरा नीरज सिंह, ग्राम प्रधान खरसातिया अरुण कुमार यादव, प्रदीप सिंह, चंद्रजीत यादव, माताफेर मिश्र, अमित मिश्र, अंजनी मिश्र, अर्जुन सिंह, खालिक, राम किशोर, हरि प्रसाद, शिव दर्शन, अमर बहादुर सिंह, अरविंद सिंह, पुनवासी, योगेंद्र, राम नरेश गौतम, सत्य शरण, नंदकिशोर मौर्य, राजकरन मौर्य आदि ने बताया कि शासन द्वारा हमारे क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों की लगभग दो हजार हेक्टेयर जमीन औद्योगिक पार्क के निर्माण के लिए अधिग्रहण करने का प्रयास कर रहा है। इसके पहले भी हमारी जमीन राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-731 में अधिग्रहीत की जा चुकी है।
जमीन ही है आजीविका का साधन
प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना था कि हम छोटी-छोटी जोतों के किसान हैं। उपजाऊ होने के कारण एवं नहरों से आच्छादित और सिंचित होने की वजह से खेतों में रबी खरीफ व जायद की सभी फसलों की पैदावार भरपूर होती है। इसी के सहारे हजारों परिवारों की आजीविका चलती है। यदि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से लेकर हाईवे संख्या-731 के दोनों तरफ औद्योगिक पार्क बन गया तो लगभग दो हजार किसान परिवारों की आजीविका का मुख्य सहारा छिन जाएगा।
आक्रोशित किसानों ने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वे अधिग्रहण के विरोध में तहसील मुख्यालय से जिला मुख्यालय तक प्रदर्शन को बाध्य होंगे। किसानों ने शासन-प्रशासन से अपनी उपजाऊ व सिंचित जमीन को नहीं छीनने की गुहार लगाई है। कहा कि औद्योगिक पार्क कहीं अलग असिंचित बंजर व ऊसर जमीन में लगाएं जिससे हमारी आजीविका का साधन न छिने।
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यूपीडा द्वारा सिंहपुर व हैदरगढ़ क्षेत्र में औद्योगिक पार्क बनाने के लिए बंगलुरू की एक कंपनी को टेंडर दिया गया है। इसके तहत कंपनी के अधिकारियों द्वारा किसानों के विरोध के बावजूद जमीनों की पैमाइश कराई जा रही है। जिन जमीनों की पैमाइश का काम पूरा होता जा रहा है वहां जमीन पर पेंट से निशान बनाया जा रहा है।
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इस कवायद से नाराज सिंहपुर क्षेत्र के खरांवा के पूरे हिंदू, हथरोहना गांव के धरगही, नागियामऊ, लौली, मेहमानपुर व हैदरगढ़ क्षेत्र के भिखरा, गोसूपुर, खरसतिया कल्यानपुर, अंसारी, भट्टखेरा के किसानों ने शासन-प्रशासन को पत्र भेजकर किसानों की उपजाऊ व सिंचित जमीनों को अधिग्रहीत नहीं करने की गुहार लगाई थी।
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बावजूद इसके एजेंसी द्वारा जमीन पर चिह्नांकन कर दिया गया। इतना ही नहीं रविवार को औद्योगिक पार्क बनाने का टेंडर पाने वाली कंपनी के अधिकारी इंजीनियर्स की टीम के साथ गांव आ गए। इसकी सूचना मिलते ही इन गांव के किसान बड़ी संख्या में खेतों में पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन करने लगे। ग्रामीणों को उग्र होता देख कंपनी के अधिकारी बिना सर्वे किए वापस चले गए।
दो हजार हेक्टेयर जमीन लेने की तैयारी
ग्राम प्रधान भिखरा नीरज सिंह, ग्राम प्रधान खरसातिया अरुण कुमार यादव, प्रदीप सिंह, चंद्रजीत यादव, माताफेर मिश्र, अमित मिश्र, अंजनी मिश्र, अर्जुन सिंह, खालिक, राम किशोर, हरि प्रसाद, शिव दर्शन, अमर बहादुर सिंह, अरविंद सिंह, पुनवासी, योगेंद्र, राम नरेश गौतम, सत्य शरण, नंदकिशोर मौर्य, राजकरन मौर्य आदि ने बताया कि शासन द्वारा हमारे क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों की लगभग दो हजार हेक्टेयर जमीन औद्योगिक पार्क के निर्माण के लिए अधिग्रहण करने का प्रयास कर रहा है। इसके पहले भी हमारी जमीन राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-731 में अधिग्रहीत की जा चुकी है।
जमीन ही है आजीविका का साधन
प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना था कि हम छोटी-छोटी जोतों के किसान हैं। उपजाऊ होने के कारण एवं नहरों से आच्छादित और सिंचित होने की वजह से खेतों में रबी खरीफ व जायद की सभी फसलों की पैदावार भरपूर होती है। इसी के सहारे हजारों परिवारों की आजीविका चलती है। यदि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से लेकर हाईवे संख्या-731 के दोनों तरफ औद्योगिक पार्क बन गया तो लगभग दो हजार किसान परिवारों की आजीविका का मुख्य सहारा छिन जाएगा।
आक्रोशित किसानों ने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वे अधिग्रहण के विरोध में तहसील मुख्यालय से जिला मुख्यालय तक प्रदर्शन को बाध्य होंगे। किसानों ने शासन-प्रशासन से अपनी उपजाऊ व सिंचित जमीन को नहीं छीनने की गुहार लगाई है। कहा कि औद्योगिक पार्क कहीं अलग असिंचित बंजर व ऊसर जमीन में लगाएं जिससे हमारी आजीविका का साधन न छिने।