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जोर पकड़ रही दीवानी न्यायालय संचालन की मांग
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गौरीगंज (अमेठी)। जिले में दीवानी न्यायालय संचालन की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। मंगलवार को जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने प्रदेश के न्याय मंत्री को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को दिया। ज्ञापन में अविलंब अधिग्रहीत भवन में न्यायालय संचालन शुरू कराने की मांग की गई है।
वर्ष 2010 में जिला सृजित होने के बाद से ही जिले में दीवानी न्यायालय संचालन की मांग चली आ रही है। अधिवक्ताओं की ओर से लगातार की जा रही मांग के बीच शहर में अस्थाई रूप से संचालित बीएसए दफ्तर को डीआईओएस कार्यालय भवन में शिफ्ट करा दिया गया। यही नहीं जिले में जनपद न्यायाधीश की तैनाती भी कई वर्ष की जा चुकी है।
न्याय मंत्री को दिए गए ज्ञापन में जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष केवल प्रसाद शुक्ल ने कहा है कि सरकार चाहे तो संचालन के लिए चिन्हित भवन में न्यायालय का संचालन शुरू हो सकता है। अध्यक्ष ने न्यायालय संचालन के लिए जिला प्रशासन पर अपेक्षित सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया है।
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यह भी कहा गया है कि जिला जज व जिला प्रशासन के बीच समुचित तालमेल नहीं होने के चलते कई वर्षों से लचर पत्राचार किया जा रहा है। आठ कमरों का भवन होने के बावजूद जिला प्रशासन की ओर से बरती जा रही लापरवाही के चलते इस संबंध में कोई पहल नहीं हो पा रही है। मंत्री से न्यायालय का संचालन अक्टूबर माह के अंत तक कराने की मांग की गई है। इस मौके पर बार सचिव कृपाशंकर त्रिपाठी व कई अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे।
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वर्ष 2010 में जिला सृजित होने के बाद से ही जिले में दीवानी न्यायालय संचालन की मांग चली आ रही है। अधिवक्ताओं की ओर से लगातार की जा रही मांग के बीच शहर में अस्थाई रूप से संचालित बीएसए दफ्तर को डीआईओएस कार्यालय भवन में शिफ्ट करा दिया गया। यही नहीं जिले में जनपद न्यायाधीश की तैनाती भी कई वर्ष की जा चुकी है।
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न्याय मंत्री को दिए गए ज्ञापन में जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष केवल प्रसाद शुक्ल ने कहा है कि सरकार चाहे तो संचालन के लिए चिन्हित भवन में न्यायालय का संचालन शुरू हो सकता है। अध्यक्ष ने न्यायालय संचालन के लिए जिला प्रशासन पर अपेक्षित सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया है।
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यह भी कहा गया है कि जिला जज व जिला प्रशासन के बीच समुचित तालमेल नहीं होने के चलते कई वर्षों से लचर पत्राचार किया जा रहा है। आठ कमरों का भवन होने के बावजूद जिला प्रशासन की ओर से बरती जा रही लापरवाही के चलते इस संबंध में कोई पहल नहीं हो पा रही है। मंत्री से न्यायालय का संचालन अक्टूबर माह के अंत तक कराने की मांग की गई है। इस मौके पर बार सचिव कृपाशंकर त्रिपाठी व कई अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे।