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Amethi News: भुगतान की कड़ियां जोड़ने में जुटी सीबीआई
Sat, 20 Jun 2026 12:14 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 20 Jun 2026 12:14 AM IST
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अमेठी सिटी। बेसिक शिक्षा विभाग के लेखा कार्यालय में छह करोड़ रुपये से अधिक के चर्चित गबन मामले में सीबीआई की जांच अब भुगतान प्रक्रिया की विभिन्न कड़ियों और उससे जुड़े तकनीकी पहलुओं पर केंद्रित हो गई है। हाल में ही छापा मारने के बाद एजेंसी यह समझने का प्रयास कर रही है कि बहुस्तरीय सत्यापन और निगरानी व्यवस्था होने के बावजूद करोड़ों रुपये संदिग्ध खातों तक कैसे पहुंच गए और किस स्तर पर नियंत्रण तंत्र की कड़ी कमजोर रही।
सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसी भुगतान आदेश तैयार होने से लेकर धनराशि संबंधित खातों में पहुंचने तक की पूरी प्रक्रिया का परीक्षण कर रही है। इस दौरान भुगतान से जुड़े अभिलेख, स्वीकृति और तकनीकी रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। जांच का फोकस इस बात पर भी है कि गबन की रकम आउटसोर्सिंग कर्मियों, शिक्षकों, उनके परिजनों तथा कुछ अन्य खातों और फर्मों तक किन परिस्थितियों में पहुंची।
एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि भुगतान प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किस प्रकार किया तथा नियंत्रण व्यवस्था संदिग्ध भुगतान को रोकने में क्यों प्रभावी साबित नहीं हुई। वित्त एवं लेखा कार्यालय में भुगतान की प्रक्रिया कई चरणों से गुजरती है। अभिलेखों के परीक्षण, सत्यापन, अनुमोदन और भुगतान की स्वीकृति के लिए अलग-अलग स्तर निर्धारित हैं।
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सीबीआई इन सभी चरणों की पड़ताल कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संदिग्ध भुगतान किन परिस्थितियों में संभव हुए और प्रक्रिया में कहां चूक हुई। जांच के दौरान डिजिटल सिग्नेचर के इस्तेमाल का पहलू भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार एजेंसी डिजिटल रिकॉर्ड, लॉगिन विवरण, भुगतान आदेशों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का परीक्षण कर रही है। भुगतान प्रक्रिया में अधिकारों और जिम्मेदारियों का वितरण किस प्रकार था तथा उसका निगरानी तंत्र पर क्या प्रभाव पड़ा, यह भी जांच का हिस्सा है।
तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर भुगतान संबंधी गतिविधियों की क्रमवार जांच की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल सिग्नेचर से जुड़े तकनीकी विवरण, लॉगिन हिस्ट्री और भुगतान आदेशों का मिलान जांच की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसी भुगतान आदेश तैयार होने से लेकर धनराशि संबंधित खातों में पहुंचने तक की पूरी प्रक्रिया का परीक्षण कर रही है। इस दौरान भुगतान से जुड़े अभिलेख, स्वीकृति और तकनीकी रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। जांच का फोकस इस बात पर भी है कि गबन की रकम आउटसोर्सिंग कर्मियों, शिक्षकों, उनके परिजनों तथा कुछ अन्य खातों और फर्मों तक किन परिस्थितियों में पहुंची।
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एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि भुगतान प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किस प्रकार किया तथा नियंत्रण व्यवस्था संदिग्ध भुगतान को रोकने में क्यों प्रभावी साबित नहीं हुई। वित्त एवं लेखा कार्यालय में भुगतान की प्रक्रिया कई चरणों से गुजरती है। अभिलेखों के परीक्षण, सत्यापन, अनुमोदन और भुगतान की स्वीकृति के लिए अलग-अलग स्तर निर्धारित हैं।
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सीबीआई इन सभी चरणों की पड़ताल कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संदिग्ध भुगतान किन परिस्थितियों में संभव हुए और प्रक्रिया में कहां चूक हुई। जांच के दौरान डिजिटल सिग्नेचर के इस्तेमाल का पहलू भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार एजेंसी डिजिटल रिकॉर्ड, लॉगिन विवरण, भुगतान आदेशों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का परीक्षण कर रही है। भुगतान प्रक्रिया में अधिकारों और जिम्मेदारियों का वितरण किस प्रकार था तथा उसका निगरानी तंत्र पर क्या प्रभाव पड़ा, यह भी जांच का हिस्सा है।
तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर भुगतान संबंधी गतिविधियों की क्रमवार जांच की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल सिग्नेचर से जुड़े तकनीकी विवरण, लॉगिन हिस्ट्री और भुगतान आदेशों का मिलान जांच की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।