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Amethi News: जीवन को सही दिशा दिखाती है भागवत कथा
Sat, 07 Feb 2026 01:17 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 07 Feb 2026 01:17 AM IST
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अमेठी सिटी। तिवारीपुर करनाईपुर गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के चौथे दिन शुक्रवार को प्रवाचक आचार्य संतोष त्रिपाठी ने कहा कि भागवत कथा मानव जीवन को सही दिशा दिखाती है। इसके श्रवण से मन और कर्म शुद्ध होते हैं।
प्रवाचक ने प्रह्लाद चरित्र, वामन अवतार, गजेंद्र मोक्ष और समुद्र मंथन प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य से भूल होना स्वाभाविक है, मगर भूल के पश्चात आत्ममंथन और सुधार आवश्यक होता है। समय पर सुधार न होने पर वही भूल आगे चलकर पाप कर्म का रूप ले लेती है। भक्ति जीवन का ऐसा मार्ग है जो व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और विवेक प्रदान करता है। भक्ति से मानसिक शांति प्राप्त होती है और जीवन में स्थिरता आती है।
प्रवाचक ने द्वापर युग का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि धर्मराज युधिष्ठिर ने सूर्य उपासना से अक्षय पात्र प्राप्त किया था। उस पात्र से पांडवों ने संकटकाल में भी धर्म और मर्यादा का पालन किया। कहा कि भागवत कथा सुनने वाले के मन में श्रद्धा और जिज्ञासा का भाव होना चाहिए। ईश्वर प्रत्यक्ष रूप में दिखाई न दें, फिर भी वे प्रत्येक जीव और सृष्टि के कण-कण में विद्यमान रहते हैं। इस अवसर पर आयोजक ओम प्रकाश तिवारी, कमलेश तिवारी, विश्वनाथ तिवारी, राजेन्द्र प्रसाद तिवारी, जय प्रकाश व प्रेम तिवारी आदि मौजूद रहे।
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प्रवाचक ने प्रह्लाद चरित्र, वामन अवतार, गजेंद्र मोक्ष और समुद्र मंथन प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य से भूल होना स्वाभाविक है, मगर भूल के पश्चात आत्ममंथन और सुधार आवश्यक होता है। समय पर सुधार न होने पर वही भूल आगे चलकर पाप कर्म का रूप ले लेती है। भक्ति जीवन का ऐसा मार्ग है जो व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और विवेक प्रदान करता है। भक्ति से मानसिक शांति प्राप्त होती है और जीवन में स्थिरता आती है।
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प्रवाचक ने द्वापर युग का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि धर्मराज युधिष्ठिर ने सूर्य उपासना से अक्षय पात्र प्राप्त किया था। उस पात्र से पांडवों ने संकटकाल में भी धर्म और मर्यादा का पालन किया। कहा कि भागवत कथा सुनने वाले के मन में श्रद्धा और जिज्ञासा का भाव होना चाहिए। ईश्वर प्रत्यक्ष रूप में दिखाई न दें, फिर भी वे प्रत्येक जीव और सृष्टि के कण-कण में विद्यमान रहते हैं। इस अवसर पर आयोजक ओम प्रकाश तिवारी, कमलेश तिवारी, विश्वनाथ तिवारी, राजेन्द्र प्रसाद तिवारी, जय प्रकाश व प्रेम तिवारी आदि मौजूद रहे।
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