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जिला बार एसोसिएशन व प्रशासन आमने-सामने
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गौरीगंज (अमेठी)। जिला मुख्यालय पर अस्थाई दीवानी न्यायालय संचालित करने को लेकर शुरू हुई रार थमने का नाम नहीं ले रही है। इसी मुद्दे को लेकर अधिवक्ताओं द्वारा किए गए प्रदर्शन के बाद उन पर दर्ज कराई गई प्राथमिकी ने आग में घी का काम किया है। केस दर्ज कराए जाने से नाराज अधिवक्ताओं ने सोमवार से कलेक्ट्रेट में बेमियादी अनशन शुरू कर दिया है। जिला प्रशासन भी पीछे हटने को तैयार नहीं है।
10 वर्ष पूर्व गठित जिले में अब तक दीवानी न्यायालय का संचालन नहीं हो सका है। यह स्थिति तब है जब शहर के जामो रोड पर न सिर्फ स्थाई न्यायालय के लिए भूमि आवंटित है बल्कि अस्थाई न्यायालय संचालित करने के लिए कटरा लालगंज के एक बंद पड़े स्कूल भवन को अधिग्रहीत भी किया जा चुका है।
इस विद्यालय भवन में अस्थाई दीवानी न्यायालय संचालन के लिए बेसिक शिक्षा विभाग की एनओसी भी मिल गई है। और तो और जिले में जिला जज समेत 21 स्टाफ (काम नहीं होने पर 16 हाईकोर्ट से संबद्ध) भी तैनात है। जिला मुख्यालय पर दीवानी न्यायालय संचालित करने की मांग को लेकर जिला बार एसोसिएशन पिछले 29 जनवरी तो अन्य तीनों तहसीलों के अधिवक्ता पिछले पांच फरवरी से कार्य बहिष्कार पर हैं।
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दीवानी को लेकर आंदोलित अधिवक्ता इस मुद्दे पर सांसद स्मृति ईरानी से भी मिल चुके हैं। मामला शनिवार को तब बिगड़ गया जब आंदोलित अधिवक्ताओं ने जिला मजिस्ट्रेट की कोर्ट के सामने प्रदर्शन व नारेबाजी की। आरोप है कि इस दौरान अधिवक्ताओं ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल भी किया।
अधिवक्ताओं के प्रदर्शन व नारेबाजी से नाराज प्रशासन ने शनिवार की रात जिला बार एसोसिएशन अध्यक्ष केवल प्रसाद शुक्ल समेत चार नामजद व 30-40 अज्ञात अधिवक्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवा दिया।
प्रशासन के इस रवैए ने आग में घी का काम किया। केस दर्ज कराने से नाराज अधिवक्ताओं ने सोमवार को कलेक्ट्रेट में बेमियादी धरना शुरू कर दिया। अधिवक्ता जहां अपने ऊपर दर्ज कराई गई प्राथमिकी वापस लेने व अस्थाई न्यायालय संचालित करने के बाद ही धरना समाप्त करने पर अड़े हैं वहीं जिला प्रशासन भी इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है।
छावनी में तब्दील रही कलेक्ट्रेट
जिला बार एसोसिएशन की ओर से शुरू किए धरने को देखते हुए कलेक्ट्रेट को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। जिला प्रशासन की ओर से बड़ी संख्या में पुरुष व महिला सिपाही-दरोगा के साथ एलआईयू के लोग भी लगाए गए थे।
अधिवक्ताओं ने भी दी तहरीर
प्रशासन की तहरीर पर केस दर्ज होने से नाराज अधिवक्ताओं ने भी डीएम, एडीएम व डीएम के पेशकार के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए थाने में तहरीर दी है। तहरीर अधिवक्ता राकेश कुमार कनौजिया की ओर से दी गई है।
राकेश की मानें तो 22 फरवरी की सुबह डीएम के पेशकार ने उन्हें व बार के दो-तीन वरिष्ठ अधिवक्ताओं को बुलाया। वहां पहले से बैठे वरिष्ठ अफसरों ने सभी को अपमानित करने के साथ देख लेने की धमकी भी दी। हालांकि अधिवक्ताओं की मानें तो पुलिस ने उनकी तहरीर लेने से ही इंकार कर दिया।
बार अध्यक्ष ने लगाए गंभीर आरोप
धरने से पहले मीडिया से मुखातिब बार एसोसिएशन अध्यक्ष केवल प्रसाद शुक्ल ने डीएम और एडीएम पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि जिला प्रशासन दीवानी न्यायालय संचालित करने में रोड़ा अटका रहा है।
बार अध्यक्ष ने अफसरों पर तानाशाही करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अधिवक्ता केस से नहीं डरता। अब धरना तब समाप्त होगा जब उन पर दर्ज केस वापस होने के साथ ही अस्थाई न्यायालय संचालित करने के लिए शासन से बजट आवंटित हो जाएगा।
अधिवक्ता डाल रहे कोर्ट संचालन में बाधा
डीएम अरुण कुमार ने अधिवक्ताओं को अपमानित करने व उन्हें धमकी देने की बात को सिरे से खारिज किया। कहा कि उनकी प्राथमिकता वादकारियों को न्याय दिलाने की है, जबकि अधिवक्ता इसमें लगातार बाधा उत्पन्न कर रहे हैं।
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10 वर्ष पूर्व गठित जिले में अब तक दीवानी न्यायालय का संचालन नहीं हो सका है। यह स्थिति तब है जब शहर के जामो रोड पर न सिर्फ स्थाई न्यायालय के लिए भूमि आवंटित है बल्कि अस्थाई न्यायालय संचालित करने के लिए कटरा लालगंज के एक बंद पड़े स्कूल भवन को अधिग्रहीत भी किया जा चुका है।
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इस विद्यालय भवन में अस्थाई दीवानी न्यायालय संचालन के लिए बेसिक शिक्षा विभाग की एनओसी भी मिल गई है। और तो और जिले में जिला जज समेत 21 स्टाफ (काम नहीं होने पर 16 हाईकोर्ट से संबद्ध) भी तैनात है। जिला मुख्यालय पर दीवानी न्यायालय संचालित करने की मांग को लेकर जिला बार एसोसिएशन पिछले 29 जनवरी तो अन्य तीनों तहसीलों के अधिवक्ता पिछले पांच फरवरी से कार्य बहिष्कार पर हैं।
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दीवानी को लेकर आंदोलित अधिवक्ता इस मुद्दे पर सांसद स्मृति ईरानी से भी मिल चुके हैं। मामला शनिवार को तब बिगड़ गया जब आंदोलित अधिवक्ताओं ने जिला मजिस्ट्रेट की कोर्ट के सामने प्रदर्शन व नारेबाजी की। आरोप है कि इस दौरान अधिवक्ताओं ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल भी किया।
अधिवक्ताओं के प्रदर्शन व नारेबाजी से नाराज प्रशासन ने शनिवार की रात जिला बार एसोसिएशन अध्यक्ष केवल प्रसाद शुक्ल समेत चार नामजद व 30-40 अज्ञात अधिवक्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवा दिया।
प्रशासन के इस रवैए ने आग में घी का काम किया। केस दर्ज कराने से नाराज अधिवक्ताओं ने सोमवार को कलेक्ट्रेट में बेमियादी धरना शुरू कर दिया। अधिवक्ता जहां अपने ऊपर दर्ज कराई गई प्राथमिकी वापस लेने व अस्थाई न्यायालय संचालित करने के बाद ही धरना समाप्त करने पर अड़े हैं वहीं जिला प्रशासन भी इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है।
छावनी में तब्दील रही कलेक्ट्रेट
जिला बार एसोसिएशन की ओर से शुरू किए धरने को देखते हुए कलेक्ट्रेट को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। जिला प्रशासन की ओर से बड़ी संख्या में पुरुष व महिला सिपाही-दरोगा के साथ एलआईयू के लोग भी लगाए गए थे।
अधिवक्ताओं ने भी दी तहरीर
प्रशासन की तहरीर पर केस दर्ज होने से नाराज अधिवक्ताओं ने भी डीएम, एडीएम व डीएम के पेशकार के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए थाने में तहरीर दी है। तहरीर अधिवक्ता राकेश कुमार कनौजिया की ओर से दी गई है।
राकेश की मानें तो 22 फरवरी की सुबह डीएम के पेशकार ने उन्हें व बार के दो-तीन वरिष्ठ अधिवक्ताओं को बुलाया। वहां पहले से बैठे वरिष्ठ अफसरों ने सभी को अपमानित करने के साथ देख लेने की धमकी भी दी। हालांकि अधिवक्ताओं की मानें तो पुलिस ने उनकी तहरीर लेने से ही इंकार कर दिया।
बार अध्यक्ष ने लगाए गंभीर आरोप
धरने से पहले मीडिया से मुखातिब बार एसोसिएशन अध्यक्ष केवल प्रसाद शुक्ल ने डीएम और एडीएम पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि जिला प्रशासन दीवानी न्यायालय संचालित करने में रोड़ा अटका रहा है।
बार अध्यक्ष ने अफसरों पर तानाशाही करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अधिवक्ता केस से नहीं डरता। अब धरना तब समाप्त होगा जब उन पर दर्ज केस वापस होने के साथ ही अस्थाई न्यायालय संचालित करने के लिए शासन से बजट आवंटित हो जाएगा।
अधिवक्ता डाल रहे कोर्ट संचालन में बाधा
डीएम अरुण कुमार ने अधिवक्ताओं को अपमानित करने व उन्हें धमकी देने की बात को सिरे से खारिज किया। कहा कि उनकी प्राथमिकता वादकारियों को न्याय दिलाने की है, जबकि अधिवक्ता इसमें लगातार बाधा उत्पन्न कर रहे हैं।