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Amethi News: महागौरी की पूजा कर कराया कन्या भोज
Sun, 06 Apr 2025 12:45 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sun, 06 Apr 2025 12:45 AM IST
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इन्हौना के अहोरवा भवानी मंदिर में दर्शन के लीए खड़े भक्तो की भीड़।-स्रोत : मंदिर पजारी
अमेठी सिटी। नवरात्र पर शनिवार को मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की भक्तों ने पूजा की। देवी मंदिरों में भोर से शुरू हुआ दर्शन-पूजन का सिलसिला शाम तक जारी रहा। व्रत रखने वालों ने हवन-पूजन करने के बाद कन्या भोज कर मां से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। अष्टमी के दिन मंदिर परिसरों में मेला लगा। इसमें बड़ी संख्या में झूले व दुकानें लगी रहीं, जहां खाद्य सामग्री, बच्चों के झूले, खिलौने व गृहस्थी से संबंधित सामान लोगों ने खरीदा।
देवी पुराण के अनुसार भगवान शिव ने मां काली पर गंगाजल छिड़का तो वह महागौरी के रूप में प्रकट हुईं। महागौरी की पूजा से श्रद्धालुओं को धन-संपदा की प्राप्ति होती है। मार्कंडेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, पराक्रम्य, ईशित्व और वशित्व आठ सिद्धियां हैं, जिन्हें सिद्धिदात्री का पूजन कर श्रद्धालु प्राप्त करते हैं। शनिवार को अष्टमी होने के चलते क्षेत्र के प्रमुख शक्ति पीठों के साथ ही दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में स्थित देवी मंदिरों में भोर से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
राघीपुर के दुर्गन भवानी धाम, अमेठी के देवीपाटन, संग्रामपुर के सिद्धपीठ मां कालिकन धाम, सिंहपुर के अहोरवा भावनी व मुसाफिरखाना के हिंगलाज मंदिर सहित सभी प्रमुख मंदिरों में भक्तों की भीड़ जुटी रही। परिसर में भंडारे के साथ ही कन्या भोज का आयोजन किया गया।
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पंडित राघवेंद्र शास्त्री ने बताया कि नवरात्र के आठवें दिन महागौरी का रूप होता है। मान्यता है कि 18 गुणों की प्रतीक महागौरी अष्टांग योग की अधिष्ठात्री हैं और धन-धान्य, गृहस्थी, सुख और शांति की दात्री हैं। कहा कि देवी की इस रूप में पूजा से अखंड सौभाग्य का फल मिलता है।
मां के दरबार में कढ़ाई चढ़ा बांटा प्रसाद
गौरीगंज के राघीपुर में मां के जयकारे और घंटे-घड़ियाल की गूंज से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया है। मान्यता है कि मां के दरबार में मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। मुराद पूरी होने पर मां के दरबार में श्रद्धालु कढ़ाई चढ़ाते हैं। श्रद्धालुओं ने कढ़ाई चढ़ा कर प्रसाद बांटा। मां के दरबार में सुबह व शाम भजन-कीर्तन हो रहा है। अष्टमी का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं ने घर व मंदिरों में हवन-पूजन करते हुए कन्या भोज कर मां से सुख-समृद्धि की कामना की।
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देवी पुराण के अनुसार भगवान शिव ने मां काली पर गंगाजल छिड़का तो वह महागौरी के रूप में प्रकट हुईं। महागौरी की पूजा से श्रद्धालुओं को धन-संपदा की प्राप्ति होती है। मार्कंडेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, पराक्रम्य, ईशित्व और वशित्व आठ सिद्धियां हैं, जिन्हें सिद्धिदात्री का पूजन कर श्रद्धालु प्राप्त करते हैं। शनिवार को अष्टमी होने के चलते क्षेत्र के प्रमुख शक्ति पीठों के साथ ही दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में स्थित देवी मंदिरों में भोर से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
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राघीपुर के दुर्गन भवानी धाम, अमेठी के देवीपाटन, संग्रामपुर के सिद्धपीठ मां कालिकन धाम, सिंहपुर के अहोरवा भावनी व मुसाफिरखाना के हिंगलाज मंदिर सहित सभी प्रमुख मंदिरों में भक्तों की भीड़ जुटी रही। परिसर में भंडारे के साथ ही कन्या भोज का आयोजन किया गया।
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पंडित राघवेंद्र शास्त्री ने बताया कि नवरात्र के आठवें दिन महागौरी का रूप होता है। मान्यता है कि 18 गुणों की प्रतीक महागौरी अष्टांग योग की अधिष्ठात्री हैं और धन-धान्य, गृहस्थी, सुख और शांति की दात्री हैं। कहा कि देवी की इस रूप में पूजा से अखंड सौभाग्य का फल मिलता है।
मां के दरबार में कढ़ाई चढ़ा बांटा प्रसाद
गौरीगंज के राघीपुर में मां के जयकारे और घंटे-घड़ियाल की गूंज से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया है। मान्यता है कि मां के दरबार में मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। मुराद पूरी होने पर मां के दरबार में श्रद्धालु कढ़ाई चढ़ाते हैं। श्रद्धालुओं ने कढ़ाई चढ़ा कर प्रसाद बांटा। मां के दरबार में सुबह व शाम भजन-कीर्तन हो रहा है। अष्टमी का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं ने घर व मंदिरों में हवन-पूजन करते हुए कन्या भोज कर मां से सुख-समृद्धि की कामना की।