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चुनाव की घोषणा के बाद चढ़ा जिले का सियासी पारा
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गौरीगंज (अमेठी)। निर्वाचन आयोग की ओर से विधानसभा चुनाव 2022 की तिथि घोषित होते ही जिले का सियासी पारा चढ़ गया है। सभी प्रमुख दल चुनाव में अपनी बढ़त बताने व बनाने में जुट गए हैं। गौरतलब है कि जिले की चार विधानसभा सीटों में से तीन पर फिलहाल भाजपा का कब्जा है। एक सीट पर लगातार दो चुनाव से सपा काबिज है। पिछले चुनाव में जिले मेें कांग्रेस व बसपा शून्य पर आउट हुई थीं।
निर्वाचन आयोग की ओर से विधानसभा चुनाव की तिथियां घोषित हो चुकी हैं। घोषित तिथि के अनुसार जिले में पांचवें चरण में 27 फरवरी को वोट डाले जाएंगे। चुनाव की घोषणा व आदर्श आचार संहिता प्रभावी होते ही राजनैतिक रूप से बेहद समृद्ध अमेठी का सियासी पारा चढ़ गया है। अपने विधानसभा क्षेत्र में स्वयं को सबसे मजबूत बताकर टिकट हासिल करने की जुगत में लगे सभी दल के संभावित दावेदार क्षेत्र के बजाए लखनऊ व दिल्ली की दौड़ लगा रहे हैं तो इनके समर्थक क्षेत्र में रह कर नेताजी का माहौल बनाने में जुटे हैं।
फिलहाल की स्थिति पर बात करें तो अभी तक बसपा व राष्ट्रीय जनसत्ता दल ही एक-एक सीट पर अपना प्रत्याशी (बसपा ने अमेठी से रागिनी तिवारी व राष्ट्रीय जनसत्ता दल ने गौरीगंज से जामो के पूर्व ब्लॉक प्रमुख चौधरी नफीस अहमद) घोषित कर सकी हैं। अन्य पार्टियों से दावेदारों के टिकट अभी तक हवा में हैं। हालांकि सभी पार्टियों के ज्यादातर दावेदार अपना टिकट पक्का मानकर चल रहे हैं। मौजूदा विधानसभा चुनाव में भाजपा के समक्ष पिछले चुनाव में जीती गईं तीनों सीटें बचा पाने तो सपा, कांग्रेस व बसपा के सामने अपना वजूद साबित करने की चुनौती है। (संवाद)
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विधानसभा क्षेत्र - अमेठी
प्रत्याशी घोषित होने का इंतजार
2012 में सपा के पास रही यह सीट 2017 के चुनाव में भाजपा ने छीन ली थी। पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय सिंह की पत्नी गरिमा सिंह यहां से विधायक हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी एक बार फिर इस सीट पर कब्जा करने की जोर आजमाइश में जुटी है। बसपा जहां इस सीट पर अपना प्रत्याशी घोषित कर राजनैतिक बढ़त ले चुकी है, वहीं कांग्रेस समेत अन्य दल किसे टिकट देंगे यह तय नहीं हो सका है। यहां की जनता फिलहाल सभी दलों के प्रत्याशी घोषित होने के इंतजार में है।
विधानसभा क्षेत्र - गौरीगंज
सीट छीनना कठिन चुनौती
पिछले दो चुनाव से यह सीट समाजवादी पार्टी के पास है। इसी विधानसभा क्षेत्र के मूल निवासी राकेश प्रताप सिंह यहां से विधायक हैं। 2012 में चली सपा की लहर में वे जहां मामूली अंतर से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे, वहीं 2017 में भाजपा की प्रचंड लहर में 26 हजार से अधिक वोटों से चुनाव जीते थे। मौजूदा चुनाव में भी सभी दलों को राकेश प्रताप के राजनैतिक कौशल से पार पाने की कोशिश करनी होगी। यहां भी जनसत्ता दल को छोड़ किसी दल ने अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।
विधानसभा क्षेत्र जगदीशपुर (सुरक्षित)
सभी दल कर रहे दावा
इस विधानसभा सीट को पिछले चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस से छीना था। प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री का ओहदा संभाल रहे सुरेश पासी मौजूदा समय में यहां से विधायक हैं। कांग्रेस जहां अपने इस गढ़ को पुन: वापस पाने तो भाजपा कब्जा बनाए रखने की कोशिश में जुटी है। सपा व बसपा भी इस सीट पर परचम लहराने का दावा कर रहे हैं। हालांकि इस सीट पर भी अभी तक किसी दल ने अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। इस सीट की स्थिति भी प्रत्याशी घोषित होने के बाद समझ आएगी।
विधानसभा क्षेत्र तिलोई
2012 में यह विधानसभा सीट कांग्रेस के पास थी। 2017 के चुनाव में पूर्व में विधायक रहे मयंकेश्वर शरण सिंह ने कांग्रेस विधायक को बड़े अंतर से परास्त किया था। इस बार भी यहां की लड़ाई अन्य बनाम मयंकेश्वर होने के आसार दिख रहे हैं। सपा मुखिया अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक की पत्नी अपर्णा भी इस सीट पर दावेदारी कर रही हैं। अन्य दलों की ओर से अभी प्रत्याशी घोषित नहीं किए गए हैं।
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निर्वाचन आयोग की ओर से विधानसभा चुनाव की तिथियां घोषित हो चुकी हैं। घोषित तिथि के अनुसार जिले में पांचवें चरण में 27 फरवरी को वोट डाले जाएंगे। चुनाव की घोषणा व आदर्श आचार संहिता प्रभावी होते ही राजनैतिक रूप से बेहद समृद्ध अमेठी का सियासी पारा चढ़ गया है। अपने विधानसभा क्षेत्र में स्वयं को सबसे मजबूत बताकर टिकट हासिल करने की जुगत में लगे सभी दल के संभावित दावेदार क्षेत्र के बजाए लखनऊ व दिल्ली की दौड़ लगा रहे हैं तो इनके समर्थक क्षेत्र में रह कर नेताजी का माहौल बनाने में जुटे हैं।
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फिलहाल की स्थिति पर बात करें तो अभी तक बसपा व राष्ट्रीय जनसत्ता दल ही एक-एक सीट पर अपना प्रत्याशी (बसपा ने अमेठी से रागिनी तिवारी व राष्ट्रीय जनसत्ता दल ने गौरीगंज से जामो के पूर्व ब्लॉक प्रमुख चौधरी नफीस अहमद) घोषित कर सकी हैं। अन्य पार्टियों से दावेदारों के टिकट अभी तक हवा में हैं। हालांकि सभी पार्टियों के ज्यादातर दावेदार अपना टिकट पक्का मानकर चल रहे हैं। मौजूदा विधानसभा चुनाव में भाजपा के समक्ष पिछले चुनाव में जीती गईं तीनों सीटें बचा पाने तो सपा, कांग्रेस व बसपा के सामने अपना वजूद साबित करने की चुनौती है। (संवाद)
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विधानसभा क्षेत्र - अमेठी
प्रत्याशी घोषित होने का इंतजार
2012 में सपा के पास रही यह सीट 2017 के चुनाव में भाजपा ने छीन ली थी। पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय सिंह की पत्नी गरिमा सिंह यहां से विधायक हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी एक बार फिर इस सीट पर कब्जा करने की जोर आजमाइश में जुटी है। बसपा जहां इस सीट पर अपना प्रत्याशी घोषित कर राजनैतिक बढ़त ले चुकी है, वहीं कांग्रेस समेत अन्य दल किसे टिकट देंगे यह तय नहीं हो सका है। यहां की जनता फिलहाल सभी दलों के प्रत्याशी घोषित होने के इंतजार में है।
विधानसभा क्षेत्र - गौरीगंज
सीट छीनना कठिन चुनौती
पिछले दो चुनाव से यह सीट समाजवादी पार्टी के पास है। इसी विधानसभा क्षेत्र के मूल निवासी राकेश प्रताप सिंह यहां से विधायक हैं। 2012 में चली सपा की लहर में वे जहां मामूली अंतर से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे, वहीं 2017 में भाजपा की प्रचंड लहर में 26 हजार से अधिक वोटों से चुनाव जीते थे। मौजूदा चुनाव में भी सभी दलों को राकेश प्रताप के राजनैतिक कौशल से पार पाने की कोशिश करनी होगी। यहां भी जनसत्ता दल को छोड़ किसी दल ने अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।
विधानसभा क्षेत्र जगदीशपुर (सुरक्षित)
सभी दल कर रहे दावा
इस विधानसभा सीट को पिछले चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस से छीना था। प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री का ओहदा संभाल रहे सुरेश पासी मौजूदा समय में यहां से विधायक हैं। कांग्रेस जहां अपने इस गढ़ को पुन: वापस पाने तो भाजपा कब्जा बनाए रखने की कोशिश में जुटी है। सपा व बसपा भी इस सीट पर परचम लहराने का दावा कर रहे हैं। हालांकि इस सीट पर भी अभी तक किसी दल ने अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। इस सीट की स्थिति भी प्रत्याशी घोषित होने के बाद समझ आएगी।
विधानसभा क्षेत्र तिलोई
2012 में यह विधानसभा सीट कांग्रेस के पास थी। 2017 के चुनाव में पूर्व में विधायक रहे मयंकेश्वर शरण सिंह ने कांग्रेस विधायक को बड़े अंतर से परास्त किया था। इस बार भी यहां की लड़ाई अन्य बनाम मयंकेश्वर होने के आसार दिख रहे हैं। सपा मुखिया अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक की पत्नी अपर्णा भी इस सीट पर दावेदारी कर रही हैं। अन्य दलों की ओर से अभी प्रत्याशी घोषित नहीं किए गए हैं।