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टैन विहीन 340 पंचायतें, नहीं हो रही टीडीएस कटौती
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गौरीगंज (अमेठी)। शासन द्वारा पंचायतों में कराए जाने वाले विकास कार्यों में 30 हजार रुपये से अधिक का भुगतान करने पर दो फीसदी टीडीएस कटौती का प्राविधान जिले में फ्लाप साबित हो रहा है। जिले की 682 ग्राम पंचायतों के सापेक्ष 340 के पास टैन नंबर नहीं होने से टीडीएस की कटौती पर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है।
फर्म के माध्यम से टीडीएस कटौती का दावा कर पंचायतीराज विभाग लगातार भुगतान करने में जुटा है। भुगतान की गई राशि में कितने टीडीएस राशि की कटौती हुई, कटौती राशि आयकर विभाग में जमा हुई या नहीं उसका कोई आंकड़ा जिम्मेदारों के पास मौजूद नहीं है। पंचायतों को टैन नंबर एलाट कराने तथा टीडीएस कटौती का निर्देश देकर जिम्मेदार मौन धारण किए हैं।
जिले की 682 ग्राम पंचायतों में कराए जा रहे विकास कार्यों के नाम पर खर्च हो रहे लाखों रुपये में सरकार को आयकर कटौती राशि का नुकसान उठाना पड़ रहा है। विकास कार्यों में 30 हजार रुपये से अधिक भुगतान करने पर दो प्रतिशत टीडीएस की कटौती का प्राविधान है।
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कटौती की गई धनराशि टैन नंबर के माध्यम से आयकर खाते में जमा होती है। शासन के निर्देशों के बावजूद जिले में महज 342 ग्राम पंचायतों के पास टैन नंबर मौजूद है। जबकि 340 ग्राम पंचायतों के पास अब तक टैन नहीं है। ऐसे में बिना टीडीएस कटौती के लगातार ग्राम पंचायतों में कराए जा रहे कार्यों का भुगतान होना अपने आप में बड़ा सवाल है।
बिना टैन ग्राम पंचायतें विकास कार्य संपादित करने के बाद कैसे टीडीएस राशि की कटौती कर रही हैं। फर्म को कैसे भुगतान हो रहा है। इस पर डीपीआरओ कोई भी सही जानकारी नहीं दे सके। बिना टीडीएस कटौती एक तरफ जहां आयकर विभाग को बड़े स्तर पर नुकसान हो रहा है तो विकास पर खर्च धनराशि में गड़बड़ी की भी संभावना बनी हुई है। बिना टीडीएस कटौती लगातार भुगतान होने से पंचायतें लापरवाह बनी हैं। अफसर भी पंचायतों को टैन नंबर एलाट कराते हुए टीडीएस कटौती कर भुगतान करने का निर्देश देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लिए हैं।
ऐसे में पंचायतों की ओर से किए गए भुगतान में टीडीएस कटौती हुई की नहीं, कितनी राशि की कटौती हुई, फर्म ने आयकर विभाग में टीडीएस जमा किया या नहीं इसका कोई आंकड़ा ग्राम पंचायत के साथ ही पंचायत विभाग के पास मौजूद नहीं है। पंचायतों के भुगतान पर रोक नहीं होने से जिन ग्राम पंचायतों के पास टैन है वहां भी टीडीएस कटौती हो रही है या नहीं इसकी भी जानकारी डीपीआरओ के पास नहीं है। टैन नंबर पंजीकरण की समयावधि निर्धारित नहीं करने से ग्राम पंचायतों पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।
पिछले वित्तीय वर्ष में खर्च हुए 77 करोड़
वित्तीय वर्ष 2020-21 में केंद्रीय वित्त आयोग से 81 करोड़ रुपये तो राज्य वित्त आयोग से 38 करोड़ रुपये जिले की ग्राम पंचायतों को आवंटित हुए थे। इनमें से वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक पंचायतों द्वारा 77 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए थे जबकि 23 करोड़ रुपये बच गए थे। वहीं चालू वित्तीय वर्ष 2021-22 में अब तक केंद्रीय वित्त आयोग से 30 करोड़ रुपये तो राज्य वित्त आयोग से 12 करोड़ रुपये मिल चुके हैं।
आवंटित धनराशि ग्राम पंचायतों के माध्यम से विकास कार्यों में खर्च की जा रही हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में पंचायतों के पास बची 23 करोड़ तथा चालू वित्तीय वर्ष में मिले 42 करोड़ रुपये में से ज्यादातर राशि खर्च की जा चुकी है। पहले वित्तीय वर्ष में खर्च की गई 77 करोड़ रुपये की दो फीसदी 15 लाख 40 हजार रुपये होते हैं।
पूर्व में ही दिया गया निर्देश
डीपीआरओ श्रीकांत यादव ने कहा कि सभी ग्राम पंचायतों को टैन नंबर एलाट कराते हुए टीडीएस कटौती कराने का निर्देश पूर्व में ही दिया गया है। बताया कि जब तक टैन नंबर एलाट नहीं हो रहा है तब तक फर्म के माध्यम से टीडीएस कटौती की राशि आयकर विभाग में जमा कराने को कहा गया है।
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फर्म के माध्यम से टीडीएस कटौती का दावा कर पंचायतीराज विभाग लगातार भुगतान करने में जुटा है। भुगतान की गई राशि में कितने टीडीएस राशि की कटौती हुई, कटौती राशि आयकर विभाग में जमा हुई या नहीं उसका कोई आंकड़ा जिम्मेदारों के पास मौजूद नहीं है। पंचायतों को टैन नंबर एलाट कराने तथा टीडीएस कटौती का निर्देश देकर जिम्मेदार मौन धारण किए हैं।
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जिले की 682 ग्राम पंचायतों में कराए जा रहे विकास कार्यों के नाम पर खर्च हो रहे लाखों रुपये में सरकार को आयकर कटौती राशि का नुकसान उठाना पड़ रहा है। विकास कार्यों में 30 हजार रुपये से अधिक भुगतान करने पर दो प्रतिशत टीडीएस की कटौती का प्राविधान है।
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कटौती की गई धनराशि टैन नंबर के माध्यम से आयकर खाते में जमा होती है। शासन के निर्देशों के बावजूद जिले में महज 342 ग्राम पंचायतों के पास टैन नंबर मौजूद है। जबकि 340 ग्राम पंचायतों के पास अब तक टैन नहीं है। ऐसे में बिना टीडीएस कटौती के लगातार ग्राम पंचायतों में कराए जा रहे कार्यों का भुगतान होना अपने आप में बड़ा सवाल है।
बिना टैन ग्राम पंचायतें विकास कार्य संपादित करने के बाद कैसे टीडीएस राशि की कटौती कर रही हैं। फर्म को कैसे भुगतान हो रहा है। इस पर डीपीआरओ कोई भी सही जानकारी नहीं दे सके। बिना टीडीएस कटौती एक तरफ जहां आयकर विभाग को बड़े स्तर पर नुकसान हो रहा है तो विकास पर खर्च धनराशि में गड़बड़ी की भी संभावना बनी हुई है। बिना टीडीएस कटौती लगातार भुगतान होने से पंचायतें लापरवाह बनी हैं। अफसर भी पंचायतों को टैन नंबर एलाट कराते हुए टीडीएस कटौती कर भुगतान करने का निर्देश देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लिए हैं।
ऐसे में पंचायतों की ओर से किए गए भुगतान में टीडीएस कटौती हुई की नहीं, कितनी राशि की कटौती हुई, फर्म ने आयकर विभाग में टीडीएस जमा किया या नहीं इसका कोई आंकड़ा ग्राम पंचायत के साथ ही पंचायत विभाग के पास मौजूद नहीं है। पंचायतों के भुगतान पर रोक नहीं होने से जिन ग्राम पंचायतों के पास टैन है वहां भी टीडीएस कटौती हो रही है या नहीं इसकी भी जानकारी डीपीआरओ के पास नहीं है। टैन नंबर पंजीकरण की समयावधि निर्धारित नहीं करने से ग्राम पंचायतों पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।
पिछले वित्तीय वर्ष में खर्च हुए 77 करोड़
वित्तीय वर्ष 2020-21 में केंद्रीय वित्त आयोग से 81 करोड़ रुपये तो राज्य वित्त आयोग से 38 करोड़ रुपये जिले की ग्राम पंचायतों को आवंटित हुए थे। इनमें से वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक पंचायतों द्वारा 77 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए थे जबकि 23 करोड़ रुपये बच गए थे। वहीं चालू वित्तीय वर्ष 2021-22 में अब तक केंद्रीय वित्त आयोग से 30 करोड़ रुपये तो राज्य वित्त आयोग से 12 करोड़ रुपये मिल चुके हैं।
आवंटित धनराशि ग्राम पंचायतों के माध्यम से विकास कार्यों में खर्च की जा रही हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में पंचायतों के पास बची 23 करोड़ तथा चालू वित्तीय वर्ष में मिले 42 करोड़ रुपये में से ज्यादातर राशि खर्च की जा चुकी है। पहले वित्तीय वर्ष में खर्च की गई 77 करोड़ रुपये की दो फीसदी 15 लाख 40 हजार रुपये होते हैं।
पूर्व में ही दिया गया निर्देश
डीपीआरओ श्रीकांत यादव ने कहा कि सभी ग्राम पंचायतों को टैन नंबर एलाट कराते हुए टीडीएस कटौती कराने का निर्देश पूर्व में ही दिया गया है। बताया कि जब तक टैन नंबर एलाट नहीं हो रहा है तब तक फर्म के माध्यम से टीडीएस कटौती की राशि आयकर विभाग में जमा कराने को कहा गया है।