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Amethi News: पास हुए 17 हजार बच्चे, सीटें 10 हजार
Sun, 21 Apr 2024 02:37 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sun, 21 Apr 2024 02:37 AM IST
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अमेठी। यूपी बोर्ड के परीक्षा परिणाम आने के बाद इंटरमीडिएट में इस बार 17 हजार छात्राें ने परीक्षा पास की है। जबकि, जिले में 55 डिग्री कॉलेजों में करीब 10 हजार सीटें हैं।
ऐसे में सात हजार छात्राें पर दाखिले का संकट मंडरा रहा है। ऐसे में छात्रों को पढ़ाई के लिए अन्य शहरों के कॉलेजों की ओर रूख करना पड़ेगा।
जिले में इस साल इंटरमीडिएट की परीक्षा में 21 हजार 502 छात्र पंजीकृत थे। इसमें से 20679 ने परीक्षा दी। इसमें से 17 हजार 671 ने परीक्षा पास की है।
इंटर पास करने वाले छात्रों को अब महाविद्यालय में दाखिला करवाने की चुनौती है। वजह जिले में कुल 55 महाविद्यालय है। औसतन दस हजार सीटें होने की बात विभागीय अधिकारी कह रहे हैं। ऐसे में सात हजार बच्चों के सामने अब दाखिले को लेकर चुनौती है। वैसे समीप होने के कारण कई छात्र उच्च शिक्षा के लिए प्रयागराज जाने की तैयारी कर रहे हैं।
बच्चे पर न बनाएं दबाव
- सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह का कहना है कि जो बच्चे स्कूली परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए, इसके लिए उन्हें दोष न दें। कहीं ऐसा तो नहीं कि बच्चा आटर्स के विषय पढ़ना चाहता था और उसे जबरन साइंस स्ट्रीम दिलवा दिया गया।
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काउंसलिंग के दौरान मेरे सामने ऐसे अनगिनत स्टूडेंट्स के मामले सामने आए हैं। फेल होने पर बच्चे को डांटे-फटकारें नहीं, बल्कि उसे सांत्वना देते हुए आगे के लिए उसका मनोबल बढ़ाने का प्रयास करें। आज के समय में हर तरह की रुचि से संबंधित विषयों की पढ़ाई और करियर विकल्प उपलब्ध हैं, इसलिए किसी विशेष विषय को पढ़ने का दबाव बनाना उचित नहीं है।
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ऐसे में सात हजार छात्राें पर दाखिले का संकट मंडरा रहा है। ऐसे में छात्रों को पढ़ाई के लिए अन्य शहरों के कॉलेजों की ओर रूख करना पड़ेगा।
जिले में इस साल इंटरमीडिएट की परीक्षा में 21 हजार 502 छात्र पंजीकृत थे। इसमें से 20679 ने परीक्षा दी। इसमें से 17 हजार 671 ने परीक्षा पास की है।
इंटर पास करने वाले छात्रों को अब महाविद्यालय में दाखिला करवाने की चुनौती है। वजह जिले में कुल 55 महाविद्यालय है। औसतन दस हजार सीटें होने की बात विभागीय अधिकारी कह रहे हैं। ऐसे में सात हजार बच्चों के सामने अब दाखिले को लेकर चुनौती है। वैसे समीप होने के कारण कई छात्र उच्च शिक्षा के लिए प्रयागराज जाने की तैयारी कर रहे हैं।
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बच्चे पर न बनाएं दबाव
- सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह का कहना है कि जो बच्चे स्कूली परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए, इसके लिए उन्हें दोष न दें। कहीं ऐसा तो नहीं कि बच्चा आटर्स के विषय पढ़ना चाहता था और उसे जबरन साइंस स्ट्रीम दिलवा दिया गया।
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काउंसलिंग के दौरान मेरे सामने ऐसे अनगिनत स्टूडेंट्स के मामले सामने आए हैं। फेल होने पर बच्चे को डांटे-फटकारें नहीं, बल्कि उसे सांत्वना देते हुए आगे के लिए उसका मनोबल बढ़ाने का प्रयास करें। आज के समय में हर तरह की रुचि से संबंधित विषयों की पढ़ाई और करियर विकल्प उपलब्ध हैं, इसलिए किसी विशेष विषय को पढ़ने का दबाव बनाना उचित नहीं है।