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Amethi News: 120 महिलाओं को प्रेरित कर गठित कराए 10 समूह
Tue, 13 May 2025 01:01 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Tue, 13 May 2025 01:01 AM IST
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अमेठी के लोधनीपट्टी में कार्य करतीं स्वयं सहायता समूह की महिलाएं। -स्रोत : स्थानीय ग्रामीण
अमेठी सिटी। जिले के अमेठी ब्लॉक के लोधनीपट्टी गांव स्थित महालक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष ने अपनी मेहनत की बदौलत क्षेत्र में अलग पहचान बनाई है। वह समूह सखी बनकर जहां आर्थिक रूप से समृद्ध हुई हैं, वहीं 120 महिलाओं को प्रेरित का 10 समूहों का गठन कराते हुुए दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत बनीं हुई हैं।
ब्लॉक अमेठी के गांव लोधनीपट्टी स्थित महालक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह का वर्ष 2009 में गठन हुआ। समूह में अध्यक्ष प्रेमा शुक्ला, सचिव शकुंतला, कोषाध्यक्ष सुनीता, सदस्य सरला, शिवपती, उर्मिला, प्रीति, संगीता, प्रगति व अंजू शामिल हैं।
2016 में समूह एनआरएलएम से जुड़ा और प्रेमा शुक्ला समूह सखी बनीं। प्रेमा शुक्ला ने बताया कि समूह सखी बनने के बाद उन्होंने 10 समूहों का गठन कराते हुए करीब 120 महिलाओं को जोड़ा है। आज महिलाएं समूह से जुड़कर काम कर रहीं हैं।
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अपनी बचत समूह में जमा कर जरूरत पड़ने पर महिलाएं कम ब्याज पर रुपये पा जाती हैं। अब उन्हें किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ता है। बताया कि समूह की महिलाएं दीपावली पर गोबर और मिट्टी के 10 हजार से अधिक दीये तैयार करती हैं। करीब आठ हजार रुपये की आमदनी होती है। इसको बढ़ाने के साथ स्वयं गांव में किराना की दुकान संचालित करने की योजना है।
इसके अलावा उन्हें बीसी सखी के रुपये मिलते हैं। अब वह समूह से जुड़कर जहां आर्थिक रूप से सशक्त हो रहीं हैं, वहीं अब उन्हें किसी के आगे रुपये मांगने की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
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ब्लॉक अमेठी के गांव लोधनीपट्टी स्थित महालक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह का वर्ष 2009 में गठन हुआ। समूह में अध्यक्ष प्रेमा शुक्ला, सचिव शकुंतला, कोषाध्यक्ष सुनीता, सदस्य सरला, शिवपती, उर्मिला, प्रीति, संगीता, प्रगति व अंजू शामिल हैं।
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2016 में समूह एनआरएलएम से जुड़ा और प्रेमा शुक्ला समूह सखी बनीं। प्रेमा शुक्ला ने बताया कि समूह सखी बनने के बाद उन्होंने 10 समूहों का गठन कराते हुए करीब 120 महिलाओं को जोड़ा है। आज महिलाएं समूह से जुड़कर काम कर रहीं हैं।
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अपनी बचत समूह में जमा कर जरूरत पड़ने पर महिलाएं कम ब्याज पर रुपये पा जाती हैं। अब उन्हें किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ता है। बताया कि समूह की महिलाएं दीपावली पर गोबर और मिट्टी के 10 हजार से अधिक दीये तैयार करती हैं। करीब आठ हजार रुपये की आमदनी होती है। इसको बढ़ाने के साथ स्वयं गांव में किराना की दुकान संचालित करने की योजना है।
इसके अलावा उन्हें बीसी सखी के रुपये मिलते हैं। अब वह समूह से जुड़कर जहां आर्थिक रूप से सशक्त हो रहीं हैं, वहीं अब उन्हें किसी के आगे रुपये मांगने की आवश्यकता नहीं पड़ती है।