{"_id":"692de61db5553cd07b0999d9","slug":"with-determination-and-devotion-even-the-impossible-becomes-possible-ambedkar-nagar-news-c-91-1-brp1007-146266-2025-12-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambedkar Nagar News: दृढ़ निश्चय और भक्ति से असंभव भी हो जाता है संभव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambedkar Nagar News: दृढ़ निश्चय और भक्ति से असंभव भी हो जाता है संभव
Tue, 02 Dec 2025 12:31 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Tue, 02 Dec 2025 12:31 AM IST
विज्ञापन
आलापुर (अंबेडकरनगर)। क्षेत्र के बड़की पाड़ौली में जारी श्रीमद्भागवत संगीतमय कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव में सोमवार को दिव्य अवतारों, सांख्य दर्शन, तप-त्याग और भक्तिभाव के अमृत से सराबोर रही।
प्रवाचक आचार्य आशुतोष शुक्ला महाराज ने कथा की शुरुआत भगवान के वराह अवतार से की। उन्होंने बताया कि जब हिरण्याक्ष्य के आतंक से पृथ्वी रसातल में जा धंस गई, तब भगवान ने वराह रूप धारण कर पृथ्वी को अपनी दिव्य दाढ़ों पर धारण किया। इसके बाद महाराज मनु की तीन पुत्रियों आकूति, देवहूति और प्रसूति के दिव्य वंश की कथा सुनाई गई। देवहूति-कर्दम प्रसंग पर आचार्य ने बताया कि उनके यहां कपिलदेव भगवान का प्राकट्य हुआ। आकूति के माध्यम से यज्ञ-नारायण के प्राकट्य और धर्म-यज्ञ की मर्यादा का वर्णन भी भक्तों को रोमांचित कर गया।
सती प्रसंग के दौरान पांडाल भावुक हो उठा। कथा का केंद्र बालक ध्रुव का अनुपम चरित्र रहा। ध्रुव का चरित्र सिखाता है कि दृढ़ निश्चय और अखंड भक्ति से असंभव भी संभव हो जाता है। कथा में प्रशांत पांडेय, बृजेश पांडेय, राकेश पांडेय, अविनाश पांडेय, आशुतोष पांडेय, आदित्य पांडेय, अतुल अंश, कृष्णा पांडेय मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रवाचक आचार्य आशुतोष शुक्ला महाराज ने कथा की शुरुआत भगवान के वराह अवतार से की। उन्होंने बताया कि जब हिरण्याक्ष्य के आतंक से पृथ्वी रसातल में जा धंस गई, तब भगवान ने वराह रूप धारण कर पृथ्वी को अपनी दिव्य दाढ़ों पर धारण किया। इसके बाद महाराज मनु की तीन पुत्रियों आकूति, देवहूति और प्रसूति के दिव्य वंश की कथा सुनाई गई। देवहूति-कर्दम प्रसंग पर आचार्य ने बताया कि उनके यहां कपिलदेव भगवान का प्राकट्य हुआ। आकूति के माध्यम से यज्ञ-नारायण के प्राकट्य और धर्म-यज्ञ की मर्यादा का वर्णन भी भक्तों को रोमांचित कर गया।
विज्ञापन
सती प्रसंग के दौरान पांडाल भावुक हो उठा। कथा का केंद्र बालक ध्रुव का अनुपम चरित्र रहा। ध्रुव का चरित्र सिखाता है कि दृढ़ निश्चय और अखंड भक्ति से असंभव भी संभव हो जाता है। कथा में प्रशांत पांडेय, बृजेश पांडेय, राकेश पांडेय, अविनाश पांडेय, आशुतोष पांडेय, आदित्य पांडेय, अतुल अंश, कृष्णा पांडेय मौजूद रहे।
विज्ञापन