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Ambedkar Nagar News: धान में उकठा-भकसा, गन्ने की 14201 किस्म में वायरल अटैक
Fri, 12 Sep 2025 01:01 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Fri, 12 Sep 2025 01:01 AM IST
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कटेहरी क्षेत्र में गन्ने की फसल में लगा वायरल लीफ फ्लेक रोग।
अंबेडकरनगर। जिले में बीते कई दिनों से बारिश न होने और तापमान में लगातार बढ़ोतरी का खामियाजा अब फसलों को भुगतना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा सर धान और गन्ने की फसल पर पड़ा है। जहां धान की खेती में उकठा और भकसा जैसे घातक रोग फैलने लगे हैं, वहीं गन्ने की 14201 वैरायटी लीफ फ्लेक वायरल की चपेट में आ गई है। बीमारी फैलने से खेतों में खड़ी फसलें सूखने लगी हैं और किसानों की चिंता बढ़ गई है।
धान को बचाने के लिए किसान रात-रात भर खेतों में पानी चला रहे हैं, लेकिन नमी की कमी और उमस भरे मौसम के कारण रोग तेजी से फैल रहे हैं। पानी की पर्याप्त आपूर्ति न होने पर धान की बालियां कीड़ों द्वारा चट की जा रही हैं, जबकि पत्तियों और जड़ों का सूखना शुरू हो गया है। गन्ने की फसल की बात करें तो तीन साल में पहली बार 14201 वैरायटी में लीफ फ्लेक वायरल का प्रकोप देखने को मिला है। यह बीमारी पत्तियों को प्रभावित कर रही है और यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो फसल पर व्यापक असर पड़ सकता है।
फौरन करें उपचार
बलरामपुर चीनी मिल (मिझौड़ा) के गन्ना विकास अधिकारी आर.पी. सिंह ने बताया कि लीफ फ्लेक से बचाव के लिए 500 ग्राम जिंक सल्फेट, 300 ग्राम कॉर्बेंडाजिम या मैंक्रोजेब फंगीसाइड, 24 ग्राम स्टेप्टोमाइसिन और 200 एमएल एनिडाक्लोरोपिड को 250 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। यह छिड़काव ट्रैक्टर माउंटेड स्प्रे मशीन या ड्रोन से किया जा सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र पाती के अध्यक्ष डॉ. रामजीत ने कहा कि रोग नियंत्रण के लिए प्रोपिकोनाजोल 25 ईसी या हेक्साकोनाजोल 5 ईसी का छिड़काव 500 लीटर पानी में प्रति हेक्टेयर मिलाकर करें। साथ ही खेतों में नमी बनाए रखना बेहद जरूरी है।
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एक एकड़ में 1700 रुपये का खर्च
गन्ने की पत्तियां सूखने लगी हैं। मिल से जानकारी मिली कि एक एकड़ में दवा और ड्रोन से छिड़काव के लिए लगभग 1600-1700 खर्च होगा। समय रहते इलाज नहीं हुआ तो भारी नुकसान होगा।
— जियाराम यादव, घाघूपुर
दवा असर नहीं कर रही
धान में बार-बार पानी देना पड़ रहा है, लेकिन नमी की कमी के चलते जिंक और अन्य दवाओं का असर नहीं दिख रहा। कल्ले और जड़ें सूख रही हैं।
— राजकुमार त्रिपाठी, तुरकानीबाग
फसलों की सेहत पर संकट, उत्पादन पर मंडरा रहा खतरा
जिले में करीब 1.25 लाख हेक्टेयर में धान और बड़ी तादाद में गन्ने की खेती हो रही है। ऐसे में अगर स्थिति नहीं सुधरी तो फसलों का उत्पादन घट सकता है और किसानों की आय पर प्रतिकूल असर पड़ना तय है। कृषि विभाग और मिल इकाइयों ने बचाव कार्य शुरू कर दिया है, लेकिन मौसम की बेरुखी ने हालात को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
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धान को बचाने के लिए किसान रात-रात भर खेतों में पानी चला रहे हैं, लेकिन नमी की कमी और उमस भरे मौसम के कारण रोग तेजी से फैल रहे हैं। पानी की पर्याप्त आपूर्ति न होने पर धान की बालियां कीड़ों द्वारा चट की जा रही हैं, जबकि पत्तियों और जड़ों का सूखना शुरू हो गया है। गन्ने की फसल की बात करें तो तीन साल में पहली बार 14201 वैरायटी में लीफ फ्लेक वायरल का प्रकोप देखने को मिला है। यह बीमारी पत्तियों को प्रभावित कर रही है और यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो फसल पर व्यापक असर पड़ सकता है।
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फौरन करें उपचार
बलरामपुर चीनी मिल (मिझौड़ा) के गन्ना विकास अधिकारी आर.पी. सिंह ने बताया कि लीफ फ्लेक से बचाव के लिए 500 ग्राम जिंक सल्फेट, 300 ग्राम कॉर्बेंडाजिम या मैंक्रोजेब फंगीसाइड, 24 ग्राम स्टेप्टोमाइसिन और 200 एमएल एनिडाक्लोरोपिड को 250 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। यह छिड़काव ट्रैक्टर माउंटेड स्प्रे मशीन या ड्रोन से किया जा सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र पाती के अध्यक्ष डॉ. रामजीत ने कहा कि रोग नियंत्रण के लिए प्रोपिकोनाजोल 25 ईसी या हेक्साकोनाजोल 5 ईसी का छिड़काव 500 लीटर पानी में प्रति हेक्टेयर मिलाकर करें। साथ ही खेतों में नमी बनाए रखना बेहद जरूरी है।
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एक एकड़ में 1700 रुपये का खर्च
गन्ने की पत्तियां सूखने लगी हैं। मिल से जानकारी मिली कि एक एकड़ में दवा और ड्रोन से छिड़काव के लिए लगभग 1600-1700 खर्च होगा। समय रहते इलाज नहीं हुआ तो भारी नुकसान होगा।
— जियाराम यादव, घाघूपुर
दवा असर नहीं कर रही
धान में बार-बार पानी देना पड़ रहा है, लेकिन नमी की कमी के चलते जिंक और अन्य दवाओं का असर नहीं दिख रहा। कल्ले और जड़ें सूख रही हैं।
— राजकुमार त्रिपाठी, तुरकानीबाग
फसलों की सेहत पर संकट, उत्पादन पर मंडरा रहा खतरा
जिले में करीब 1.25 लाख हेक्टेयर में धान और बड़ी तादाद में गन्ने की खेती हो रही है। ऐसे में अगर स्थिति नहीं सुधरी तो फसलों का उत्पादन घट सकता है और किसानों की आय पर प्रतिकूल असर पड़ना तय है। कृषि विभाग और मिल इकाइयों ने बचाव कार्य शुरू कर दिया है, लेकिन मौसम की बेरुखी ने हालात को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।