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Ambedkar Nagar News: 10 साल से गणित व गृह विज्ञान विषय के शिक्षक का इंतजार
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अंबेडकरनगर। राजकीय बालिका हाईस्कूल अहिरौली रानीमऊ में कई महत्वपूर्ण विषयों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों की तैनाती ही नहीं है। गणित व गृह विज्ञान के शिक्षकों का पद जहां एक दशक से रिक्त चल रहा है, वहीं विज्ञान व अंग्रेजी विषय का पद भी दो वर्ष से खाली हैं। ऐसे में संबंधित विषयों की समुचित शिक्षा बच्चों को नहीं मिल पा रही। वैकल्पिक प्रबंधों से किसी तरह काम चलाया जा रहा है।
राजकीय बालिका हाईस्कूल रानीमऊ की स्थापना वर्ष 2012 में हुई थी। यहां एक प्रधानाचार्य के अलावा सात पद शिक्षक, एक पद लिपिक, एक पद चतुर्थ श्रेणी व एक पद चौकीदार के लिए सृजित हुुआ था।
इन पदों के सापेक्ष इन दिनों प्रधानाचार्य विद्यावती के अलावा हिन्दी में चेतना यादव, संस्कृत में सीमा यादव व सामाजिक विज्ञान में बतौर शिक्षक वंदना की तैनाती है। शेष चार पद रिक्त हैं। इसमें गणित व गृह विज्ञान के शिक्षकों का पद वर्ष 2012 से खाली चल रहा है। जबकि अंग्रेजी व विज्ञान विषय के लिए दो वर्ष से तैनाती नहीं है।
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ऐसे में गणित, विज्ञान, अंग्रेजी व गृह विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर शिक्षकों की तैनाती न होने से छात्राओं को इन विषयों की शिक्षा सुचारू रूप से नहीं मिल पा रही है। हालांकि वैकल्पिक प्रबंध तो हैं, लेकिन वह नाकाफी साबित हो रहे।
नतीजा यह है कि विद्यालय से बच्चों व अभिभावकों का मोह भंग हो रहा है। पिछले वर्ष जहां छात्राओं की संख्या 190 थी वहीं इस वर्ष कक्षा नौ व दस के छात्राओं की संख्या घटकर 149 पहुंच गई है। इसके बावजूद विद्यालय में रिक्त चल रहे पदों पर तैनाती की सुध नहीं ली जा रही है।
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राजकीय बालिका हाईस्कूल रानीमऊ की स्थापना वर्ष 2012 में हुई थी। यहां एक प्रधानाचार्य के अलावा सात पद शिक्षक, एक पद लिपिक, एक पद चतुर्थ श्रेणी व एक पद चौकीदार के लिए सृजित हुुआ था।
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इन पदों के सापेक्ष इन दिनों प्रधानाचार्य विद्यावती के अलावा हिन्दी में चेतना यादव, संस्कृत में सीमा यादव व सामाजिक विज्ञान में बतौर शिक्षक वंदना की तैनाती है। शेष चार पद रिक्त हैं। इसमें गणित व गृह विज्ञान के शिक्षकों का पद वर्ष 2012 से खाली चल रहा है। जबकि अंग्रेजी व विज्ञान विषय के लिए दो वर्ष से तैनाती नहीं है।
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ऐसे में गणित, विज्ञान, अंग्रेजी व गृह विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर शिक्षकों की तैनाती न होने से छात्राओं को इन विषयों की शिक्षा सुचारू रूप से नहीं मिल पा रही है। हालांकि वैकल्पिक प्रबंध तो हैं, लेकिन वह नाकाफी साबित हो रहे।
नतीजा यह है कि विद्यालय से बच्चों व अभिभावकों का मोह भंग हो रहा है। पिछले वर्ष जहां छात्राओं की संख्या 190 थी वहीं इस वर्ष कक्षा नौ व दस के छात्राओं की संख्या घटकर 149 पहुंच गई है। इसके बावजूद विद्यालय में रिक्त चल रहे पदों पर तैनाती की सुध नहीं ली जा रही है।