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Ambedkar Nagar News: निस्वार्थ कर्म से ही मिल सकती है सच्ची भक्ति
Sun, 17 May 2026 12:05 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Sun, 17 May 2026 12:05 AM IST
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मालीपुर। क्षेत्र के भदोई में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन शनिवार को कपिल चरित्र, भगवान के 24 अवतार, भक्त प्रह्लाद चरित्र और नरसिंह अवतार प्रसंग का वर्णन किया गया।
प्रवाचक आचार्य रोहित त्रिपाठी ने कहा कि निस्वार्थ कर्म ही सच्ची भक्ति है। कठिन समय में धैर्य और विश्वास बनाए रखना चाहिए। धन और शरीर स्थायी नहीं हैं।
सेवा, संयम और सदाचार जीवन को बेहतर बनाते हैं। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को समाप्त करने के कई प्रयास किए, लेकिन हर बार भगवान ने अपने भक्त की रक्षा की। विपरीत परिस्थितियों में भी उनका विश्वास अडिग रहा। बाद में भगवान ने नरसिंह अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का अंत किया और भक्त प्रह्लाद की रक्षा की।
माता-पिता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बच्चों को अच्छे संस्कार देना है। यदि बचपन में सही शिक्षा और संस्कार दिए जाएं तो बच्चे भविष्य में परिवार और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हैं।
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भागवत कथा मनुष्य को उसके कर्तव्यों का बोध कराती है। मृत्यु जीवन का अटल सत्य है, जो व्यक्ति निस्वार्थ भाव से ईश्वर का स्मरण करता है, वह अपने जीवन को बेहतर दिशा दे सकता है। इस माैके पर बड़ी संख्या में लोग माैजूद रहे।
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प्रवाचक आचार्य रोहित त्रिपाठी ने कहा कि निस्वार्थ कर्म ही सच्ची भक्ति है। कठिन समय में धैर्य और विश्वास बनाए रखना चाहिए। धन और शरीर स्थायी नहीं हैं।
सेवा, संयम और सदाचार जीवन को बेहतर बनाते हैं। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को समाप्त करने के कई प्रयास किए, लेकिन हर बार भगवान ने अपने भक्त की रक्षा की। विपरीत परिस्थितियों में भी उनका विश्वास अडिग रहा। बाद में भगवान ने नरसिंह अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का अंत किया और भक्त प्रह्लाद की रक्षा की।
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माता-पिता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बच्चों को अच्छे संस्कार देना है। यदि बचपन में सही शिक्षा और संस्कार दिए जाएं तो बच्चे भविष्य में परिवार और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हैं।
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भागवत कथा मनुष्य को उसके कर्तव्यों का बोध कराती है। मृत्यु जीवन का अटल सत्य है, जो व्यक्ति निस्वार्थ भाव से ईश्वर का स्मरण करता है, वह अपने जीवन को बेहतर दिशा दे सकता है। इस माैके पर बड़ी संख्या में लोग माैजूद रहे।