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जिला अस्पताल मेें इलाज की व्यवस्था बदहाल
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अंबेडकरनगर। बेड नहीं मिला तो स्ट्रेचर पर ही इलाज के लिए मरीज को लिटा दिया। वहीं, स्ट्रेचर नहीं मिलने पर जमीन पर ही मरीज इलाज करा रहे हैं। तीमारदारों का बस यही कहना है कि किसी भी तरह उनके मरीज का इलाज सुनिश्चित हो जाए। यह दृश्य जिला अस्पताल में मंगलवार को दिखा। इमरजेंसी में बेड न होने के चलते गलियारे में स्ट्रेचर व भूमि पर मरीज का इलाज किया जा रहा है। इससे मरीजों व उनके तीमारदारों को विभिन्न प्रकार की मुश्किलें हो रही हैं। स्ट्रेचर व भूमि पर इलाज करा रहे मरीजों के लिए उनके तीमारदारों को खुद ही ऑक्सीजन की व्यवस्था करनी पड़ रही है।
कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच जिला अस्पताल की स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। न तो समुचित बेड हैं और न ही ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए रेगुलेटर। नतीजा यह है कि इलाज के लिए आने वाले मरीजों व उनके तीमारदारों को विभिन्न प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में बेपटरी हुई इलाज की व्यवस्था का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मरीजों को एक अदद बेड तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
मंगलवार को अमर उजाला टीम जब जिला अस्पताल पहुंची, तो वहां का दृश्य देखकर सन्न रह गई। इमरजेंसी के सभी बेड पर मरीज भर्ती थे। गलियारे में लाइन से स्ट्रेचर लगे थे, जिस पर मरीज भर्ती थे और उनका इलाज हो रहा था। इतना ही नहीं वहां जमीन पर भी कुछ तीमारदार मरीज को लिए बैठे हुए थे। सभी के माथे पर चिंता की लकीरें थीं। वे चाह रहे थे कि किसी भी प्रकार से उनके मरीज का इलाज हो जाए।
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और तो और ऑक्सीजन व रेगुलेटर तीमारदार खुद ही बाहर से खरीदकर ला रहे थे। तीमारदार सुरेंद्र कुमार ने कहा कि न तो बेड मिल रहा है और न ही ऑक्सीजन। ऑक्सीजन व रेगुलेटर तो बाहर से खरीदकर ले आए, अब बेड कहां से लाएं। अस्पताल के चिकित्सक व कर्मचारी भी इस दौरान लाचार दिखे। उनकी भी समझ में नहीं आ रहा था कि किस प्रकार से मरीजों को इलाज करें। दरअसल जिला अस्पताल को अभी तक कोविड अस्पताल नहीं घोषित किया जा सका है।
ऐसे में यहां आने वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर या फिर मातृ शिशु विंग टांडा रेफर कर दिया जाता है। चूंकि मेडिकल कॉलेज व मातृ शिशु विंग में बेड ही नहीं हैं, तो ऐसे में जिला अस्पताल में ही मरीजों का इलाज किया जा रहा है। हालांकि जिला अस्पताल में 100 बेड के कोविड अस्पताल की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उम्मीद है कि एक दो दिन में इसका संचालन भी शुरू कर दिया जाएगा।
उधर, सीएमएस डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि मरीजों के रेफर न कर सकने के चलते कुछ समस्या हो रही है। मरीजों को सुचारु इलाज उपलब्ध हो सके, इसके लिए सभी संभव कदम उठाए जा रहे हैं। बताया कि जिला अस्पताल में 28 रेगुलेटर हैं, जो कि मौजूदा समय में प्रयोग में हैं। ऐसे में मरीजों को बाहर से रेगुलेटर लाना पड़ रहा है। हालांकि ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है।
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कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच जिला अस्पताल की स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। न तो समुचित बेड हैं और न ही ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए रेगुलेटर। नतीजा यह है कि इलाज के लिए आने वाले मरीजों व उनके तीमारदारों को विभिन्न प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में बेपटरी हुई इलाज की व्यवस्था का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मरीजों को एक अदद बेड तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
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मंगलवार को अमर उजाला टीम जब जिला अस्पताल पहुंची, तो वहां का दृश्य देखकर सन्न रह गई। इमरजेंसी के सभी बेड पर मरीज भर्ती थे। गलियारे में लाइन से स्ट्रेचर लगे थे, जिस पर मरीज भर्ती थे और उनका इलाज हो रहा था। इतना ही नहीं वहां जमीन पर भी कुछ तीमारदार मरीज को लिए बैठे हुए थे। सभी के माथे पर चिंता की लकीरें थीं। वे चाह रहे थे कि किसी भी प्रकार से उनके मरीज का इलाज हो जाए।
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और तो और ऑक्सीजन व रेगुलेटर तीमारदार खुद ही बाहर से खरीदकर ला रहे थे। तीमारदार सुरेंद्र कुमार ने कहा कि न तो बेड मिल रहा है और न ही ऑक्सीजन। ऑक्सीजन व रेगुलेटर तो बाहर से खरीदकर ले आए, अब बेड कहां से लाएं। अस्पताल के चिकित्सक व कर्मचारी भी इस दौरान लाचार दिखे। उनकी भी समझ में नहीं आ रहा था कि किस प्रकार से मरीजों को इलाज करें। दरअसल जिला अस्पताल को अभी तक कोविड अस्पताल नहीं घोषित किया जा सका है।
ऐसे में यहां आने वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर या फिर मातृ शिशु विंग टांडा रेफर कर दिया जाता है। चूंकि मेडिकल कॉलेज व मातृ शिशु विंग में बेड ही नहीं हैं, तो ऐसे में जिला अस्पताल में ही मरीजों का इलाज किया जा रहा है। हालांकि जिला अस्पताल में 100 बेड के कोविड अस्पताल की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उम्मीद है कि एक दो दिन में इसका संचालन भी शुरू कर दिया जाएगा।
उधर, सीएमएस डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि मरीजों के रेफर न कर सकने के चलते कुछ समस्या हो रही है। मरीजों को सुचारु इलाज उपलब्ध हो सके, इसके लिए सभी संभव कदम उठाए जा रहे हैं। बताया कि जिला अस्पताल में 28 रेगुलेटर हैं, जो कि मौजूदा समय में प्रयोग में हैं। ऐसे में मरीजों को बाहर से रेगुलेटर लाना पड़ रहा है। हालांकि ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है।