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पुलिस कर्मियों के गले की फांस बनी मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट

Thu, 15 Sep 2022 11:27 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 15 Sep 2022 11:27 PM IST
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The report of the medical college became stuck in the neck of the police personnel
अंबेडकरनगर। पुलिस की कथित हिरासत में आजमगढ़ निवासी युवक जियाउद्दीन की डेढ़ साल पहले हुई मौत के मामले में फंसे पुलिस कर्मियों को क्लीन चिट मिल पाना बड़ी चुनौती होगा। लैब से जारी मृतक की रिपोर्ट हत्या के मामले में नामजद पुलिस कर्मियों के गले की फांस साबित होगी।
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इस मामले में निलंबित हुए तात्कालिक स्वाट टीम प्रभारी समेत सात आरोपी सिपाहियों पर हत्या का केस दर्ज है। लैब रिपोर्ट में साफ आया है कि मृतक जियाउद्दीन को कोई गंभीर बीमारी नहीं थी। जबकि मृतक के शरीर पर कई चोट का उल्लेख इसमें शामिल है। इसके चलते ही बीते डेढ़ वर्ष पहले घटित हुई इस घटना में तमाम कोशिशों के बाद भी पुलिसकर्मियों के पक्ष में फाइनल रिपोर्ट लग पाना संभव नहीं हो पा रहा है।
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गोंडा जनपद में पुलिस हिरासत में हुई संविदा बिजली कर्मी की मौत ने डेढ़ साल पहले जिले में पुलिस हिरासत में हुई एक युवक की मौत के मामले की याद ताजा कर दी है। डेढ़ वर्ष पहले पूछताछ के लिए पकड़े गए आजमगढ़ जनपद के पवई थाना क्षेत्र के हाजीपुर निवासी जियाउद्दीन की मौत को लेकर खूब हंगामा मचा था।
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मुख्य विपक्षी दल सपा ने प्रकरण को पूरे जोरशोर से उठाया था। इस मामले में स्वाट टीम प्रभारी समेत आठ पुलिस कर्मियों को लाइन हाजिर करने के बाद निलंबित होना पड़ा था। इस मामले में आरोपी पुलिस कर्मियों पर दर्ज हत्या का केस वर्तमान में चल रहा है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार मृतक जियाउद्दीन के शरीर के विभिन्न अंगों व खून आदि की हुई लैब जांच रिपोर्ट ने आरोपी पुलिस कर्मियों की परेशानी बढ़ा दी है। राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर से जारी रिपोर्ट में साफ किया गया है कि जियाउद्दीन की मौत स्वाभाविक नहीं थी। इससे पहले उसकी मौत के बाद जो फोटो सामने आई थी उसमें शरीर के तमाम हिस्सों पर निर्मम तरीके से पहुंचाई गई चोट के निशान मौजूद थे। लैब रिपोर्ट सामने आने के बाद ही पुलिस कर्मियों के पक्ष में फाइनल रिपोर्ट नहीं लग पा रही है।
विसरा रिपोर्ट में जहर की पुष्टि नहीं
लैब रिपोर्ट के अनुसार जियाउद्दीन को हृदय व लिवर की कोई बीमारी नहीं थी। इस कारण उसकी मौत का कारण बीमारी नहीं थी। जहर से मौत के बारे में पता लगाने के लिए जो विसरा भेजा गया था, उसकी रिपोर्ट में जहर भी नहीं पाया गया। मृतक के फेफड़े की जांच रिपोर्ट में खून पाया गया है। यह ज्यादातर मामलों में पिटाई व चोट लगने के दौरान ही फेफड़े में रक्त का थक्का जम जाता है। परिजनों ने जियाउद्दीन की मौत के लिए पुलिस हिरासत में हुई पिटाई को जिम्मेदार बताया था।

प्रकरण की विवेचना अभी लंबित है। विवेचक इसमें सारे तथ्य देख रहे हैं। सभी तथ्यों को ध्यान में रखकर ही उनके द्वारा विवेचना पूरी की जाएगी। विवेचना पारदर्शी ढंग से पूरी होगी।
अजीत कुमार सिन्हा, एसपी
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