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Ambedkar Nagar News: शोहदाए कर्बला का जिक्र सुन रो पड़े अजादार
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मजलिस को खिताब करते युवा। स्रोत आयोजक
किछौछा (अंबेडकरनगर)। जलालपुर के नगपुर स्थित मस्जिद-ए-मुर्तुजा जुमा बाजार में शनिवार को आयोजित मजलिस का आयोजन हुआ। इसमें शोहदाए कर्बला का जिक्र सुनकर अजादार रो पड़े।
इस दौरान इमाम हुसैन के वफादार घोड़े जुल्जनाह की याद में एक घोड़े को फूलों से सजाया गया, जिसकी जियारत करने के िलए बड़ी संख्या में लोग उमड़े। कर्बला की ऐतिहासिक घटना और उसमें ज़ुल्जनाह की भूमिका को भी याद कर अजादारों की आंखें नम हो गईं।
इमाम हुसैन की अंतिम सवारी माने जाने वाले जुल्जनाह को इस्लामिक इतिहास में त्याग, वफादारी और बलिदान का प्रतीक माना जाता है। मजलिस में जुल्जनाह के बिना सवार खेमे में लौटने का वर्णन किया गया, जिस पर सभी लोग गमजदा हो गए। मस्जिद-ए-मुर्तुजा में आयोजित मजलिस का शुभारंभ सुबह आठ बजे हुआ और यह शाम पांच बजे तक चला।
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मजलिस के दौरान वक्ताओं ने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके साथियों की कुर्बानियों को याद करते हुए इस्लामी शिक्षाओं पर प्रकाश डाला। मातम और नोहाख्वानी के बीच कार्यक्रम संपन्न हुआ। वहीं बेला परसा क्षेत्र में मुहर्रम की दूसरी तारीख पर शनिवार को परंपरागत जुलूस निकाला गया।
इस जुलूस में अंजुमन मित्तुपुर, अंजुमन सकरावल टांडा और अंजुमन कदीम जलालपुर की टीमें शामिल रहीं। मौलाना नय्यर जुनकर नैन ने बताया कि यह महीना मुसलमानों के लिए गम और सब्र का पैगाम लाता है।
g कर्बला के शहीदों की याद कीं कुर्बानियां : बसखारी स्थित हैदरी इमाम बारगाह में अशरे की दूसरी मजलिस का आयोजन शुक्रवार रात आठ बजे किया गया। मौलाना मोहम्मद हसन ने मजलिस को खिताब करते हुए कर्बला के शहीदों की कुर्बानियों का जिक्र किया और वहां मौजूद अजादारों से इमाम हुसैन के बताए रास्ते पर चलने की अपील की। मजलिस में बड़ी संख्या में अजादारों ने भाग लेकर गम और श्रद्धा का इजहार किया।
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इस दौरान इमाम हुसैन के वफादार घोड़े जुल्जनाह की याद में एक घोड़े को फूलों से सजाया गया, जिसकी जियारत करने के िलए बड़ी संख्या में लोग उमड़े। कर्बला की ऐतिहासिक घटना और उसमें ज़ुल्जनाह की भूमिका को भी याद कर अजादारों की आंखें नम हो गईं।
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इमाम हुसैन की अंतिम सवारी माने जाने वाले जुल्जनाह को इस्लामिक इतिहास में त्याग, वफादारी और बलिदान का प्रतीक माना जाता है। मजलिस में जुल्जनाह के बिना सवार खेमे में लौटने का वर्णन किया गया, जिस पर सभी लोग गमजदा हो गए। मस्जिद-ए-मुर्तुजा में आयोजित मजलिस का शुभारंभ सुबह आठ बजे हुआ और यह शाम पांच बजे तक चला।
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मजलिस के दौरान वक्ताओं ने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके साथियों की कुर्बानियों को याद करते हुए इस्लामी शिक्षाओं पर प्रकाश डाला। मातम और नोहाख्वानी के बीच कार्यक्रम संपन्न हुआ। वहीं बेला परसा क्षेत्र में मुहर्रम की दूसरी तारीख पर शनिवार को परंपरागत जुलूस निकाला गया।
इस जुलूस में अंजुमन मित्तुपुर, अंजुमन सकरावल टांडा और अंजुमन कदीम जलालपुर की टीमें शामिल रहीं। मौलाना नय्यर जुनकर नैन ने बताया कि यह महीना मुसलमानों के लिए गम और सब्र का पैगाम लाता है।
g कर्बला के शहीदों की याद कीं कुर्बानियां : बसखारी स्थित हैदरी इमाम बारगाह में अशरे की दूसरी मजलिस का आयोजन शुक्रवार रात आठ बजे किया गया। मौलाना मोहम्मद हसन ने मजलिस को खिताब करते हुए कर्बला के शहीदों की कुर्बानियों का जिक्र किया और वहां मौजूद अजादारों से इमाम हुसैन के बताए रास्ते पर चलने की अपील की। मजलिस में बड़ी संख्या में अजादारों ने भाग लेकर गम और श्रद्धा का इजहार किया।