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Ambedkar Nagar News: धर्म की रक्षा करना ही मनुष्य का सर्वोच्च कर्तव्य
Thu, 04 Dec 2025 10:56 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Thu, 04 Dec 2025 10:56 PM IST
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आलापुर (अंबेडकरनगर)। क्षेत्र के बड़की पंडौली बनकटा बुजुर्ग में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। प्रवाचक आशुतोष शुक्ला ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब प्रेम में अपना और पराया मिट जाए, जब भक्त और भगवान के बीच कोई दूरी न बचे, वही महारास है। यह शरीर का नहीं, आत्मा और परमात्मा का प्रेम–मिलन है। मनुष्य का असली सौंदर्य उसके वस्त्रों में नहीं, उसकी निष्ठा और पवित्र भावनाओं में है। दुनिया भले अनेक आकर्षणों से बुलाए, पर भक्त का हृदय केवल भगवान का हो, यही सर्वोच्च भक्ति है।
स्वार्थ आ जाने पर भगवान ठहरते नहीं है। कृष्ण की हर लीला हमें भीतर के दुष्ट गुणों पर विजय सिखाती है। दुनिया का सबसे बड़ा शत्रु बाहर नहीं, मनुष्य के भीतर छिपा अहंकार, क्रोध और लालच है।जिसने अपने मन पर जीत हासिल कर ली, वही सच्चा विजेता है। प्रवाचक ने कहा कि अत्याचार चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, सत्य और धर्म के आगे उसका अंत निश्चित है।अधर्म के साथ समझौता करना भी पाप है। ज्ञान महान है, पर प्रेम और भक्ति उससे कहीं अधिक विराट है। ईश्वर तर्क से नहीं, सिर्फ हृदय से मिलते हैं। क्षमा वीरों का आभूषण होता है। माता–पिता और गुरु की सेवा ही सबसे सच्ची पूजा है।
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स्वार्थ आ जाने पर भगवान ठहरते नहीं है। कृष्ण की हर लीला हमें भीतर के दुष्ट गुणों पर विजय सिखाती है। दुनिया का सबसे बड़ा शत्रु बाहर नहीं, मनुष्य के भीतर छिपा अहंकार, क्रोध और लालच है।जिसने अपने मन पर जीत हासिल कर ली, वही सच्चा विजेता है। प्रवाचक ने कहा कि अत्याचार चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, सत्य और धर्म के आगे उसका अंत निश्चित है।अधर्म के साथ समझौता करना भी पाप है। ज्ञान महान है, पर प्रेम और भक्ति उससे कहीं अधिक विराट है। ईश्वर तर्क से नहीं, सिर्फ हृदय से मिलते हैं। क्षमा वीरों का आभूषण होता है। माता–पिता और गुरु की सेवा ही सबसे सच्ची पूजा है।
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