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नई कंपनी से खाद की पहली रैक प. बंगाल रवाना
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जगदीशपुर : उर्वरक रैक रवाना होने से पहले पूजा-पाठ करते कंपनी के कर्मी व अफसर -संवाद
- फोटो : AMETHI
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जगदीशपुर (अमेठी)। उद्योगपति स्वर्गीय आदित्य बिड़ला की ओर से जगदीशपुर में स्थापित इंडोगल्फ फर्टिलाइजर अब इतिहास बन गई है। अब इस कंपनी का नाम इंडोरामा इंडिया हो गया है। आदित्य बिड़ला के पुत्र कुमार मंगलम बिड़ला से इस कंपनी को खरीदने वाली कंपनी ने इस कंपनी का नाम बदलने के साथ नए पैक में उत्पादन व विपणन भी शुरू कर दिया है। शिवरात्रि को हवन पूजन के साथ नए पैक में उर्वरक की रैक यहां से पश्चिम बंगाल को रवाना हुई। जिले में स्थापित खाद की नई कंपनी इंडोरामा इंडिया से प्रतिदिन 3300 एमटी यूरिया का उत्पादन होगा।
वर्ष 1984 में आदित्य बिड़ला ग्रुप की ओर से औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित उर्वरक (इंडोगल्फ फर्टिलाइजर) कारखाने को पिछले दिनों भारत में जन्मे इंडोनेशिया के उद्योगपति श्रीप्रकाश लोहिया ने खरीदा था। इंडोगल्फ फर्टिलाइजर के स्थान पर यह इकाई अब इंडोरामा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम से नए अवतार में क्षेत्र और देश विदेश में जानी पहचानी जाएगी। सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद यूरिया की पहली रैक शिवरात्रि के दिन उत्तर भारत के पश्चिम बंगाल के लिए रवाना की गई। फैक्टरी से पहली रैक निकलने के अवसर पर फर्टिलाइजर्स के सीओओ राजेंद्र सांखे ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ फैक्टरी के भीतर पूजन-अर्चन भी किया। पेट्रोकेमिकल्स का बिजनेस करने वाली इंडोरामा पॉलीएस्टर, सिथेंटिक रबड़ ग्लब्स और प्लास्टिक बॉटल्स में इस्तेमाल होने वाले रेजिन की दुनिया में अभी तक सबसे बड़ी प्रोड्यूसर कंपनी चलाने वाले उद्योगपति श्रीप्रकाश लोहिया इस डील के बाद फर्टिलाइजर सेगमेंट में भी प्रवेश कर चुके हैं।
सीओओ ने बताया कि नई कंपनी ने यूरिया की गुणवत्ता बढ़ाने का भी प्रयास किया है। उन्होंने बताया कि हमारी यूरिया शत-प्रतिशत नीम कोटेड है। अन्य सभी खाद कारखाना की यूरिया से उत्तम, अधिक कारगर और किसानों की पहली पसंद है। यह भी बताया कि वर्तमान में उर्वरक इकाई से प्रतिदिन 33 सौ मीट्रिक टन यूरिया का उत्पाद हो रहा है। इस कंपनी से निकलने वाली खाद उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, एवं झारखंड आदि प्रदेशों के किसानों तक पहुंचती है।
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शक्तिमान यूरिया के नाम से होगी बिक्री
उत्तर भारत के किसानों को यूरिया की आपूर्ति करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली कंपनी इंडोगल्फ फर्टिलाइजर को खरीदने वाली इंडोरामा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने उर्वरक केे नाम में मामूली परिवर्तन किया है। अब तक बिड़ला शक्तिमान यूरिया के नाम से बिकने वाली खाद अब शक्तिमान यूरिया के नाम से बेची जाएगी। कंपनी के सीओओ राजेंद्र सांखे ने बताया कि शक्तिमान का बैग अब पहले से अधिक आकर्षक होगा।
देश के भीतर आठवीं सबसे बड़ी कंपनी
इंडोगल्फ देश के भीतर आठवीं सबसे बड़ी यूरिया उत्पादक कंपनी थी। कंपनी फर्टिलाइजर, सीड्स, एग्रोकेमिकल्स जैसे प्रॉडक्ट्स मैन्यूफैक्चरर बनाती है। इसके बिड़ला शक्तिमान यूरिया की उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में लीडरशिप पोजीशन थी। देश के यूरिया बिजनेस को सरकारी रेगुलेशंस, कीमतों पर पाबंदी, प्लांट चलाने के लिए गैस की उपलब्धता कम होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सरकार की ओर से सब्सिडी के लिए मिलने वाली पेमेंट में भी अक्सर देरी होती है। इस वजह से कंपनियों को वर्किंग कैपिटल के लिए शॉर्ट-टर्म लोन लेने का सामना भी करना पड़ता हैं।
सिंगापुर से ऑपरेट होगी कंपनी
इंडोरामा कंपनी के चेयरमैन एसपी लोहिया और इंडोरामा कॉरपोरेशन के वाइस चेयरमैन और उनके बेटे अमित लोहिया सिंगापुर में रहते हैं। सीओओ ने बताया कि इस कंपनी को इंडोरामा कॉर्पोरेशन सिंगापुर से ऑपरेट किया जाएगा।
रणनीति का हिस्सा
स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट सीडा के चेयरमैन हेमंत विक्रम सिंह का कहना है कि इंडोगल्फ को बेचने की योजना नई नहीं है। यह सरकार के नियंत्रण वाले सेक्टर्स में कम मार्जिन वाले कारोबारों से बाहर निकलने की रणनीति का एक हिस्सा है।
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वर्ष 1984 में आदित्य बिड़ला ग्रुप की ओर से औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित उर्वरक (इंडोगल्फ फर्टिलाइजर) कारखाने को पिछले दिनों भारत में जन्मे इंडोनेशिया के उद्योगपति श्रीप्रकाश लोहिया ने खरीदा था। इंडोगल्फ फर्टिलाइजर के स्थान पर यह इकाई अब इंडोरामा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम से नए अवतार में क्षेत्र और देश विदेश में जानी पहचानी जाएगी। सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद यूरिया की पहली रैक शिवरात्रि के दिन उत्तर भारत के पश्चिम बंगाल के लिए रवाना की गई। फैक्टरी से पहली रैक निकलने के अवसर पर फर्टिलाइजर्स के सीओओ राजेंद्र सांखे ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ फैक्टरी के भीतर पूजन-अर्चन भी किया। पेट्रोकेमिकल्स का बिजनेस करने वाली इंडोरामा पॉलीएस्टर, सिथेंटिक रबड़ ग्लब्स और प्लास्टिक बॉटल्स में इस्तेमाल होने वाले रेजिन की दुनिया में अभी तक सबसे बड़ी प्रोड्यूसर कंपनी चलाने वाले उद्योगपति श्रीप्रकाश लोहिया इस डील के बाद फर्टिलाइजर सेगमेंट में भी प्रवेश कर चुके हैं।
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सीओओ ने बताया कि नई कंपनी ने यूरिया की गुणवत्ता बढ़ाने का भी प्रयास किया है। उन्होंने बताया कि हमारी यूरिया शत-प्रतिशत नीम कोटेड है। अन्य सभी खाद कारखाना की यूरिया से उत्तम, अधिक कारगर और किसानों की पहली पसंद है। यह भी बताया कि वर्तमान में उर्वरक इकाई से प्रतिदिन 33 सौ मीट्रिक टन यूरिया का उत्पाद हो रहा है। इस कंपनी से निकलने वाली खाद उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, एवं झारखंड आदि प्रदेशों के किसानों तक पहुंचती है।
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शक्तिमान यूरिया के नाम से होगी बिक्री
उत्तर भारत के किसानों को यूरिया की आपूर्ति करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली कंपनी इंडोगल्फ फर्टिलाइजर को खरीदने वाली इंडोरामा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने उर्वरक केे नाम में मामूली परिवर्तन किया है। अब तक बिड़ला शक्तिमान यूरिया के नाम से बिकने वाली खाद अब शक्तिमान यूरिया के नाम से बेची जाएगी। कंपनी के सीओओ राजेंद्र सांखे ने बताया कि शक्तिमान का बैग अब पहले से अधिक आकर्षक होगा।
देश के भीतर आठवीं सबसे बड़ी कंपनी
इंडोगल्फ देश के भीतर आठवीं सबसे बड़ी यूरिया उत्पादक कंपनी थी। कंपनी फर्टिलाइजर, सीड्स, एग्रोकेमिकल्स जैसे प्रॉडक्ट्स मैन्यूफैक्चरर बनाती है। इसके बिड़ला शक्तिमान यूरिया की उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में लीडरशिप पोजीशन थी। देश के यूरिया बिजनेस को सरकारी रेगुलेशंस, कीमतों पर पाबंदी, प्लांट चलाने के लिए गैस की उपलब्धता कम होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सरकार की ओर से सब्सिडी के लिए मिलने वाली पेमेंट में भी अक्सर देरी होती है। इस वजह से कंपनियों को वर्किंग कैपिटल के लिए शॉर्ट-टर्म लोन लेने का सामना भी करना पड़ता हैं।
सिंगापुर से ऑपरेट होगी कंपनी
इंडोरामा कंपनी के चेयरमैन एसपी लोहिया और इंडोरामा कॉरपोरेशन के वाइस चेयरमैन और उनके बेटे अमित लोहिया सिंगापुर में रहते हैं। सीओओ ने बताया कि इस कंपनी को इंडोरामा कॉर्पोरेशन सिंगापुर से ऑपरेट किया जाएगा।
रणनीति का हिस्सा
स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट सीडा के चेयरमैन हेमंत विक्रम सिंह का कहना है कि इंडोगल्फ को बेचने की योजना नई नहीं है। यह सरकार के नियंत्रण वाले सेक्टर्स में कम मार्जिन वाले कारोबारों से बाहर निकलने की रणनीति का एक हिस्सा है।