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Ambedkar Nagar News: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में तीन माह के मासूम की मौत का कारण स्पष्ट नहीं, बिसरा सुरक्षित
Fri, 03 Jan 2025 11:37 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Fri, 03 Jan 2025 11:37 PM IST
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टांडा के पहराजपुर में जुड़वा बच्चों के मौत के बाद पीड़ित परिवार से मिलते डीएम।
अंबेडकरनगर। टांडा के पहराजपुर में टीकाकरण के छह दिन के भीतर जुड़वां बच्चों की मौत के मामले में सुपरवाइजर को भी स्थानांतरित कर दिया गया। आशा संगिनी को नोटिस दी गई है। सीएचसी अधीक्षक टांडा को मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दूसरे बच्चे की मौत का कारण स्पष्ट न होने के कारण बिसरा सुरक्षित किया गया है। इस मामले में आशा बहू को बर्खास्त और एएनएम को निलंबित किया जा चुका है।
पहराजपुर निवासी अनिल कुमार के तीन माह के जुड़वां बेटों रीति और रियांश को 26 दिसंबर को गांव में ही टीका लगाया गया था। 27 दिसंबर को रियांश की मौत हो गई थी। यह बात आशा और एएनएम ने उच्चाधिकारियों से छिपा ली थी। एक जनवरी को रीति की भी मौत हो गई और मामला थाने पहुंच गया, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को घटना की जानकारी हुई। टीकाकरण के छह दिन के भीतर जुड़वा बच्चों की मौत से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया। बृहस्पतिवार देर शाम रीति का पोस्टमार्टम कराया गया, जिसकी रिपोर्ट शुक्रवार शाम को आई।
सुपरवाइजर और आशा संगिनी पर गिर सकती है गाज
जुड़वा बच्चों की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग के सुपरवाइजर गौरव द्विवेदी का स्थानांतरण कर दिया गया। गांव की आशा संगिनी को भी कारण बताओ नोटिस दिया गया है। आशा बहू, आशा संगिनी और एएनएम की जिम्मेदारी होती है कि टीकाकरण के बाद बच्चों का हाल जानते रहें। 27 दिसंबर को रियांश की मौत होने के बाद भी इन सभी ने गंभीरता नहीं दिखाई। दूसरे बच्चे की भी तबीयत खराब हुई और उसका निजी अस्पताल में इलाज कराया गया। उसकी मौत होने के बाद ये मामला शिकायतकर्ता के कोतवाली जाने पर अफसरों के संज्ञान में आया। इस मामले में सीएचसी अधीक्षक टांडा दिनेश वर्मा को मुख्यालय संबद्ध कर दिया गया। डॉ. चंद्रमणि को सीएचसी अधीक्षक बनाया गया है।
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डीएम और सीएमओ ने ली जानकारी
डीएम अविनाश सिंह और सीएमओ डॉ. राजकुमार शुक्रवार को पहराजपुर पहुंचे ओर अनिल को 50 हजार रुपये आर्थिक मदद दी। डीएम ने गरीब परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभ दिलाने के निर्देश दिए। दोनों अधिकारियों ने गांव के लोगों से इस संबंध में पूछताछ की। डीएम ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम प्रकरण की जांच कर रही है। रिपोर्ट आने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
निजी चिकित्सकों को देंगे नोटिस
रियांश का इलाज शहर के दो निजी अस्पतालों में हुआ था। इन अस्पतालों के निजी चिकित्सकों को नोटिस दी जाएगी। बच्चे के इलाज से संबंधित कागजात देखे जाएंगे। उसी आधार पर कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. राजकुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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पहराजपुर निवासी अनिल कुमार के तीन माह के जुड़वां बेटों रीति और रियांश को 26 दिसंबर को गांव में ही टीका लगाया गया था। 27 दिसंबर को रियांश की मौत हो गई थी। यह बात आशा और एएनएम ने उच्चाधिकारियों से छिपा ली थी। एक जनवरी को रीति की भी मौत हो गई और मामला थाने पहुंच गया, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को घटना की जानकारी हुई। टीकाकरण के छह दिन के भीतर जुड़वा बच्चों की मौत से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया। बृहस्पतिवार देर शाम रीति का पोस्टमार्टम कराया गया, जिसकी रिपोर्ट शुक्रवार शाम को आई।
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सुपरवाइजर और आशा संगिनी पर गिर सकती है गाज
जुड़वा बच्चों की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग के सुपरवाइजर गौरव द्विवेदी का स्थानांतरण कर दिया गया। गांव की आशा संगिनी को भी कारण बताओ नोटिस दिया गया है। आशा बहू, आशा संगिनी और एएनएम की जिम्मेदारी होती है कि टीकाकरण के बाद बच्चों का हाल जानते रहें। 27 दिसंबर को रियांश की मौत होने के बाद भी इन सभी ने गंभीरता नहीं दिखाई। दूसरे बच्चे की भी तबीयत खराब हुई और उसका निजी अस्पताल में इलाज कराया गया। उसकी मौत होने के बाद ये मामला शिकायतकर्ता के कोतवाली जाने पर अफसरों के संज्ञान में आया। इस मामले में सीएचसी अधीक्षक टांडा दिनेश वर्मा को मुख्यालय संबद्ध कर दिया गया। डॉ. चंद्रमणि को सीएचसी अधीक्षक बनाया गया है।
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डीएम और सीएमओ ने ली जानकारी
डीएम अविनाश सिंह और सीएमओ डॉ. राजकुमार शुक्रवार को पहराजपुर पहुंचे ओर अनिल को 50 हजार रुपये आर्थिक मदद दी। डीएम ने गरीब परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभ दिलाने के निर्देश दिए। दोनों अधिकारियों ने गांव के लोगों से इस संबंध में पूछताछ की। डीएम ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम प्रकरण की जांच कर रही है। रिपोर्ट आने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
निजी चिकित्सकों को देंगे नोटिस
रियांश का इलाज शहर के दो निजी अस्पतालों में हुआ था। इन अस्पतालों के निजी चिकित्सकों को नोटिस दी जाएगी। बच्चे के इलाज से संबंधित कागजात देखे जाएंगे। उसी आधार पर कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. राजकुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी