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Ambedkar Nagar News: श्रीराम के संयम की सीख से भावविभोर हुए श्रोता
Sat, 06 Sep 2025 12:30 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Sat, 06 Sep 2025 12:30 AM IST
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कथा प्रवाचक श्रीनिवास दास।
आलापुर (अंबेडकरनगर)। रामनगर के मसेना मिर्जापुर स्थित शांत विहार कॉलोनी में चल रही चातुर्मास साधना कार्यक्रम के तहत रामकथा का आयोजन भक्तिभाव के वातावरण में हो रही है। बृहस्पतिवार को प्रवाचक श्रीनिवास दास वेदांती महाराज ने श्रोताओं को श्रीराम के संयम, गुरु वशिष्ठ के उपदेश के प्रसंगों से जुड़ी गूढ़ शिक्षाएं सुनाईं, जिससे पूरा पंडाल श्रद्धा और आत्मचिंतन से भावविभोर हो उठा।
इस दौरान कथा व्यास पीठ का पूजन समाजसेवी शिवनाथ तिवारी ने किया। प्रवाचक ने कहा कि राजा दशरथ जब श्रीराम को युवराज बनाना चाहते थे, तब उन्होंने अपने गुरु वशिष्ठ से मार्गदर्शन प्राप्त किया। रामायण के इस अंश में गुरु वशिष्ठ श्रीराम को संयम, त्याग और राजधर्म की गहराइयों से अवगत कराते हैं। उन्होंने बताया कि भरत भी गुरु की आज्ञा पर चलकर श्रीराम से मिलते हैं। यह प्रसंग गुरु-शिष्य परंपरा की मर्यादा और श्रद्धा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मंथरा का कोई योगदान श्रीराम के संयम में नहीं था, बल्कि वह तो राम के वनवास का कारण बनी। सत्संग में भाग ले रहे स्थानीय नागरिकों ने कथा को जीवन में उतारने का संकल्प लिया। आयोजकों ने बताया कि चातुर्मास साधना का यह क्रम आगामी सप्ताह तक जारी रहेगा।
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इस दौरान कथा व्यास पीठ का पूजन समाजसेवी शिवनाथ तिवारी ने किया। प्रवाचक ने कहा कि राजा दशरथ जब श्रीराम को युवराज बनाना चाहते थे, तब उन्होंने अपने गुरु वशिष्ठ से मार्गदर्शन प्राप्त किया। रामायण के इस अंश में गुरु वशिष्ठ श्रीराम को संयम, त्याग और राजधर्म की गहराइयों से अवगत कराते हैं। उन्होंने बताया कि भरत भी गुरु की आज्ञा पर चलकर श्रीराम से मिलते हैं। यह प्रसंग गुरु-शिष्य परंपरा की मर्यादा और श्रद्धा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मंथरा का कोई योगदान श्रीराम के संयम में नहीं था, बल्कि वह तो राम के वनवास का कारण बनी। सत्संग में भाग ले रहे स्थानीय नागरिकों ने कथा को जीवन में उतारने का संकल्प लिया। आयोजकों ने बताया कि चातुर्मास साधना का यह क्रम आगामी सप्ताह तक जारी रहेगा।
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