{"_id":"6213dc1001281830a35bccd3","slug":"teams-engaged-in-wooing-women-ambedkar-nagar-news-lko618858923","type":"story","status":"publish","title_hn":"महिलाओं को रिझाने में जुटीं टीमें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महिलाओं को रिझाने में जुटीं टीमें
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अंबेडकरनगर। विधानसभा चुनाव में आधी आबादी के सहारे वैतरणी पार करने की तैयारी है। विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों ने इसके लिए महिलाओं के बीच विशेष मुहिम छेड़ रखी है। कई प्रत्याशियों ने तेज तर्रार महिलाओं की विशेष टोलियां बना रखी हैं, जो सीधे घरों में पहुंचकर सिर्फ महिला मतदाताओं का समर्थन हासिल करने का प्रयास करती हैं। सभी पांच विधानसभा क्षेत्रों में सवा आठ लाख महिला मतदाताओं में से अधिकांश का समर्थन अपने पाले में लाने के लिए उनके बीच तरह-तरह के प्रयास प्रत्याशियों की तरफ से किए जा रहे हैं। किस प्रत्याशी को इस मुहिम का कितना लाभ मिलेगा, यह तय नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि महिलाओं का समर्थन किसी की भी चुनावी नैया आसानी से पार कर सकता है।
विधानसभा चुनाव में पिछली बार 5 में से 2 सीटों पर महिला विधायक चुनी गई थीं। टांडा व आलापुर में बीजेपी के टिकट पर संजू देवी व अनीता कमल के विजयी होने के बाद इस बार इन दोनों का टिकट काट दिया गया। पुरुष प्रत्याशियों को बीजेपी ने टिकट दिया। बसपा ने टांडा व आलापुर सीट पर महिला को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने कटेहरी, अकबरपुर, आलापुर व जलालपुर में महिला प्रत्याशी उतारे हैं। जीत के लिए सभी सीटों पर प्रत्याशियों द्वारा अलग-अलग दांव आजमाए जा रहे हैं। इनमें एक बड़ा प्रयास महिला मतदाताओं का अधिकाधिक समर्थन हासिल करना है।
इसके लिए प्रमुख दलों के कई प्रत्याशियों की ओर से विशेष मुहिम चलाई गई है। इसमें तेज तर्रार महिलाओं की टीमें बना दी गई हैं। कुछ प्रत्याशियों की तरफ से दो तरह की टीम बनाई गई हैं। एक में पढ़ी-लिखी महिलाओं को शामिल किया गया है, जबकि दूसरी टीम में घरेलू, लेकिन तेज तर्रार महिलाएं आगे की गई हैं। ऐसा इसलिए, जिससे सभी तरह की महिलाओं के बीच प्रभावी ढंग से अपनी बात पहुंचाई जा सके।
विज्ञापन
खबर यह है कि महिलाओं की तमाम टीमें ऐसी हैं, जो सामान्य प्रचार प्रसार के बजाय सीधे घरों में प्रवेश करती हैं। वहां वे अपनत्व दिखाते हुए महिलाओं के बीच सहजता से बात करती हैं। इसके साथ ही उन्हें अपने प्रत्याशी व उसके दल की खूबियां गिनाती हैं। कई महिला टीमें तो घरों में पहुंचकर नजदीकी जताने के लिए कभी भोजन, तो कभी नाश्ता या चाय-पानी करने लगती हैं। कोशिश यह होती है कि घरों में जाने के बाद महिलाओं को अपने व्यवहार से प्रभावित कर अपने प्रत्याशी के पक्ष में मतदान के लिए तैयार किया जा सके। सूत्रों का कहना है कि महिलाओं के इन प्रयासों का तमाम जगहों पर असर भी देखने को मिला है। तमाम परिवारों में महिलाओं ने अपने परिवार के पुरुषों को ही यह समझाने की कोशिश की है कि अब फलां प्रत्याशी का समर्थन किया जाए।
आठ लाख से अधिक हैं महिला मतदाता
जिले के सभी पांच विधानसभा क्षेत्र में प्रमुख दलों के प्रत्याशियों की नजर 8 लाख से अधिक महिला मतदाताओं पर है। कटेहरी में लगभग पौने 2 लाख, टांडा में डेढ़ लाख, जलालपुर में पौने दो लाख, आलापुर में डेढ़ लाख तो अकबरपुर में डेढ़ लाख से अधिक महिला मतदाता हैं। प्रमुख दलों के प्रत्याशियों की कोशिश है कि इन महिला मतदाताओं का समर्थन हासिल कर अपनी जीत सुनिश्चित की जा सके।
विज्ञापन
विधानसभा चुनाव में पिछली बार 5 में से 2 सीटों पर महिला विधायक चुनी गई थीं। टांडा व आलापुर में बीजेपी के टिकट पर संजू देवी व अनीता कमल के विजयी होने के बाद इस बार इन दोनों का टिकट काट दिया गया। पुरुष प्रत्याशियों को बीजेपी ने टिकट दिया। बसपा ने टांडा व आलापुर सीट पर महिला को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने कटेहरी, अकबरपुर, आलापुर व जलालपुर में महिला प्रत्याशी उतारे हैं। जीत के लिए सभी सीटों पर प्रत्याशियों द्वारा अलग-अलग दांव आजमाए जा रहे हैं। इनमें एक बड़ा प्रयास महिला मतदाताओं का अधिकाधिक समर्थन हासिल करना है।
विज्ञापन
इसके लिए प्रमुख दलों के कई प्रत्याशियों की ओर से विशेष मुहिम चलाई गई है। इसमें तेज तर्रार महिलाओं की टीमें बना दी गई हैं। कुछ प्रत्याशियों की तरफ से दो तरह की टीम बनाई गई हैं। एक में पढ़ी-लिखी महिलाओं को शामिल किया गया है, जबकि दूसरी टीम में घरेलू, लेकिन तेज तर्रार महिलाएं आगे की गई हैं। ऐसा इसलिए, जिससे सभी तरह की महिलाओं के बीच प्रभावी ढंग से अपनी बात पहुंचाई जा सके।
विज्ञापन
खबर यह है कि महिलाओं की तमाम टीमें ऐसी हैं, जो सामान्य प्रचार प्रसार के बजाय सीधे घरों में प्रवेश करती हैं। वहां वे अपनत्व दिखाते हुए महिलाओं के बीच सहजता से बात करती हैं। इसके साथ ही उन्हें अपने प्रत्याशी व उसके दल की खूबियां गिनाती हैं। कई महिला टीमें तो घरों में पहुंचकर नजदीकी जताने के लिए कभी भोजन, तो कभी नाश्ता या चाय-पानी करने लगती हैं। कोशिश यह होती है कि घरों में जाने के बाद महिलाओं को अपने व्यवहार से प्रभावित कर अपने प्रत्याशी के पक्ष में मतदान के लिए तैयार किया जा सके। सूत्रों का कहना है कि महिलाओं के इन प्रयासों का तमाम जगहों पर असर भी देखने को मिला है। तमाम परिवारों में महिलाओं ने अपने परिवार के पुरुषों को ही यह समझाने की कोशिश की है कि अब फलां प्रत्याशी का समर्थन किया जाए।
आठ लाख से अधिक हैं महिला मतदाता
जिले के सभी पांच विधानसभा क्षेत्र में प्रमुख दलों के प्रत्याशियों की नजर 8 लाख से अधिक महिला मतदाताओं पर है। कटेहरी में लगभग पौने 2 लाख, टांडा में डेढ़ लाख, जलालपुर में पौने दो लाख, आलापुर में डेढ़ लाख तो अकबरपुर में डेढ़ लाख से अधिक महिला मतदाता हैं। प्रमुख दलों के प्रत्याशियों की कोशिश है कि इन महिला मतदाताओं का समर्थन हासिल कर अपनी जीत सुनिश्चित की जा सके।