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सुप्रीम कोर्ट के स्टे ने फिर जगाई नौकरी की आस
अंबेडकरनगर/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 08 Dec 2015 10:44 PM IST
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शिक्षामित्रों के पक्ष में आए इस फैसले से संबंधित शिक्षामित्रों के अलावा उनके परिजनों में भी उत्साह का माहौल साफ दिखाई पड़ा है। हालांकि इस फैसले से विद्यालयों में शैक्षिक स्तर पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि समायोजित हुए शिक्षामित्र अभी भी संबंधित विद्यालय में बच्चों को शिक्षा देने का कार्य यथावत करते आ रहे हैं।
गौरतलब है कि प्राथमिक विद्यालयों में संविदा के तहत कार्य कर रहे शिक्षामित्रों को प्रदेश सरकार ने लगभग तीन वर्ष पूर्व सहायक अध्यापक पद पर तीन चरण में समायोजित करने का निर्णय लिया था। जिले के 1352 प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत कुल 2263 शिक्षामित्रों को प्रदेश सरकार के इस निर्णय का लाभ दिया जाना तय हुआ।
प्रथम चरण में 1600 शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के तौर पर नियुक्ति दी गई थी। इस बीच हाईकोर्ट में दाखिल की गई एक याचिका में कहा गया कि चूंकि शिक्षामित्र टीईटी उत्तीर्ण नहीं हैं, ऐसे में बेसिक शिक्षा सेवा नियमावली में आवश्यक संशोधन किए गए उनका समायोजन वैध नहीं है।
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हाईकोर्ट ने कहा कि नियुक्ति में अर्हता में छूट देने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार को है। इस आधार पर हाईकोर्ट ने समायोजन को अवैध करार देते हुए निरस्त कर दिया था। इससे शिक्षामित्रों को तगड़ा झटका लगा था। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है।
इससे शिक्षामित्रों में एक बार फिर से खुशी की लहर दौड़ गई है। सहायक अध्यापक पद पर समायोजित हो चुके 1600 शिक्षामित्रों को इसका सीधा लाभ मिलना तय माना जा रहा है। ऐसे शिक्षामित्रों को उम्मीद है कि अब जल्द ही उनकी नियुक्ति का रास्ता वैधानिक ढंग से साफ हो सकेगा।
वेतन की जगी उम्मीद
भीटी के प्राथमिक विद्यालय खरिकाभारी में तैनात संजय शर्मा ने कहा कि उनका समायोजन सहायक अध्यापक के पद पर हुआ है। वे कार्य इसी विद्यालय में कर रहे हैं। वेतन भुगतान नहीं हो रहा था। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नौकरी की उम्मीद जगी है। रामनगर के प्राथमिक विद्यालय कौड़ाही में तैनात शिक्षक अरुण प्रताप सिंह ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। कहा कि अब पूर्णकालिक नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा। एक अन्य शिक्षक दिनेश ने कहा कि सुप्रीमकोर्ट से ही न्याय की उम्मीद थी। इस फैसले ने शिक्षामित्रों के संघर्ष को जायज करार दिया है।
यह बोले अधिकारी
परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की कोई कमी नहीं है। छात्र संख्या के हिसाब से सभी विद्यालयों में शिक्षक मौजूद हैं। समायोजन पर अंतिम फैसला आने के बाद आगामी दिनों में निश्चित तौर पर शिक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी।
-डॉ. राजबहादुर मौर्य, बीएसए
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गौरतलब है कि प्राथमिक विद्यालयों में संविदा के तहत कार्य कर रहे शिक्षामित्रों को प्रदेश सरकार ने लगभग तीन वर्ष पूर्व सहायक अध्यापक पद पर तीन चरण में समायोजित करने का निर्णय लिया था। जिले के 1352 प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत कुल 2263 शिक्षामित्रों को प्रदेश सरकार के इस निर्णय का लाभ दिया जाना तय हुआ।
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प्रथम चरण में 1600 शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के तौर पर नियुक्ति दी गई थी। इस बीच हाईकोर्ट में दाखिल की गई एक याचिका में कहा गया कि चूंकि शिक्षामित्र टीईटी उत्तीर्ण नहीं हैं, ऐसे में बेसिक शिक्षा सेवा नियमावली में आवश्यक संशोधन किए गए उनका समायोजन वैध नहीं है।
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हाईकोर्ट ने कहा कि नियुक्ति में अर्हता में छूट देने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार को है। इस आधार पर हाईकोर्ट ने समायोजन को अवैध करार देते हुए निरस्त कर दिया था। इससे शिक्षामित्रों को तगड़ा झटका लगा था। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है।
इससे शिक्षामित्रों में एक बार फिर से खुशी की लहर दौड़ गई है। सहायक अध्यापक पद पर समायोजित हो चुके 1600 शिक्षामित्रों को इसका सीधा लाभ मिलना तय माना जा रहा है। ऐसे शिक्षामित्रों को उम्मीद है कि अब जल्द ही उनकी नियुक्ति का रास्ता वैधानिक ढंग से साफ हो सकेगा।
वेतन की जगी उम्मीद
भीटी के प्राथमिक विद्यालय खरिकाभारी में तैनात संजय शर्मा ने कहा कि उनका समायोजन सहायक अध्यापक के पद पर हुआ है। वे कार्य इसी विद्यालय में कर रहे हैं। वेतन भुगतान नहीं हो रहा था। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नौकरी की उम्मीद जगी है। रामनगर के प्राथमिक विद्यालय कौड़ाही में तैनात शिक्षक अरुण प्रताप सिंह ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। कहा कि अब पूर्णकालिक नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा। एक अन्य शिक्षक दिनेश ने कहा कि सुप्रीमकोर्ट से ही न्याय की उम्मीद थी। इस फैसले ने शिक्षामित्रों के संघर्ष को जायज करार दिया है।
यह बोले अधिकारी
परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की कोई कमी नहीं है। छात्र संख्या के हिसाब से सभी विद्यालयों में शिक्षक मौजूद हैं। समायोजन पर अंतिम फैसला आने के बाद आगामी दिनों में निश्चित तौर पर शिक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी।
-डॉ. राजबहादुर मौर्य, बीएसए