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Ambedkar Nagar News: भाजपा और सपा ने भुगता टिकट वितरण में मनमानी का खामियाजा
Sun, 14 May 2023 11:53 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Sun, 14 May 2023 11:53 PM IST
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अंबेडकरनगर। टिकट वितरण में मनमानी ने भाजपा व सपा दोनों दलों को जिले में बड़ी सफलता हासिल करने से पहले ही ब्रेक लगा दिया। अध्यक्ष पद पर सपा ने दो जबकि भाजपा ने सिर्फ एक सीट जीती है। लोगों का कहना है कि यदि दोनों ही दलों ने सूझबूझ से टिकट वितरण किया होता और स्थानीय नेताओं की अनावश्यक दखलअंदाजी न हुई होती तो दोनों ही दलों के लिए सफलता के काफी अच्छे मौके थे।
निकाय चुनाव में इस बार भाजपा व सपा दोनों ही दलों के सामने अच्छी बढ़त हासिल करने का मौका था। कई निकायों में बेहतर माहौल दिखा लेकिन टिकट वितरण को लेकर हुई खींचतान व मनमानी ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अकबरपुर में अध्यक्ष की सीट पर पिछले चुनाव में भाजपा प्रत्याशी सरिता गुप्त की जीत हुई थी। इस बार उनका टिकट बदलकर पार्टी के दूसरे सक्रिय नेताओं को दिए जाने की पुरजोर मांग हो रही थी। पार्टी के ही कई पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने यह फीडबैक दिया था कि टिकट न बदला गया तो जीती हुई सीट पार्टी बड़े अंतर से हार जाएगी। और हुआ भी यही। भाजपा ने अकबरपुर सीट पर पूरी ताकत लगा रखी थी। इसके बाद भी यहां उसे तीसरा स्थान हासिल हुआ।
जलालपुर में वरिष्ठ नेता रामप्रकाश यादव की पत्नी शोभावती के रूप में कार्यकर्ताओं की इच्छा के अनुरूप तो टिकट दिया गया लेकिन कई मोर्चे पर मदद करने की जो जरूरत थी वह नहीं हो पाई। इसी तरह आलापुर से विधायक रहीं अनीता कमल को लेकर नाराजगी के चलते ही उनका पिछले विधानसभा चुनाव में टिकट काटा गया था। इसके बाद भी अनीता को उसी आलापुर विधानसभा क्षेत्र के जहांगीरगंज नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए टिकट थमा दिया गया। वे तीसरे स्थान पर रहीं।
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कुछ इसी तरह का हाल सपा में भी रहा। अकबरपुर में पिछली बार निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर रनर रहीं नाजरीन बेगम को इस बार भी टिकट नहीं दिया गया। वे लगातार दूसरी बार रनर रहीं जबकि अकबरपुर विधायक की ओर से पूरी ताकत लगाने के बाद भी सपा प्रत्याशी यहां मुख्य मुकाबले में ही नहीं आ सकीं। टांडा नगर परिषद अध्यक्ष पद के लिए शबाना नाज को पिछली बार भी सपा ने मना कर दिया था। वे तब निर्दलीय दूसरे स्थान पर थीं।
इस बार भी सपा ने टिकट नहीं दिया तो निर्दल लड़कर चुनाव जीत गईं। राजेसुल्तानपुर में सपा ने पहले विनोद प्रजापति को टिकट दिया था लेकिन बाद में इंकार कर दिया। वे निर्दल चुनाव लड़े और जीत गए।
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निकाय चुनाव में इस बार भाजपा व सपा दोनों ही दलों के सामने अच्छी बढ़त हासिल करने का मौका था। कई निकायों में बेहतर माहौल दिखा लेकिन टिकट वितरण को लेकर हुई खींचतान व मनमानी ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अकबरपुर में अध्यक्ष की सीट पर पिछले चुनाव में भाजपा प्रत्याशी सरिता गुप्त की जीत हुई थी। इस बार उनका टिकट बदलकर पार्टी के दूसरे सक्रिय नेताओं को दिए जाने की पुरजोर मांग हो रही थी। पार्टी के ही कई पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने यह फीडबैक दिया था कि टिकट न बदला गया तो जीती हुई सीट पार्टी बड़े अंतर से हार जाएगी। और हुआ भी यही। भाजपा ने अकबरपुर सीट पर पूरी ताकत लगा रखी थी। इसके बाद भी यहां उसे तीसरा स्थान हासिल हुआ।
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जलालपुर में वरिष्ठ नेता रामप्रकाश यादव की पत्नी शोभावती के रूप में कार्यकर्ताओं की इच्छा के अनुरूप तो टिकट दिया गया लेकिन कई मोर्चे पर मदद करने की जो जरूरत थी वह नहीं हो पाई। इसी तरह आलापुर से विधायक रहीं अनीता कमल को लेकर नाराजगी के चलते ही उनका पिछले विधानसभा चुनाव में टिकट काटा गया था। इसके बाद भी अनीता को उसी आलापुर विधानसभा क्षेत्र के जहांगीरगंज नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए टिकट थमा दिया गया। वे तीसरे स्थान पर रहीं।
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कुछ इसी तरह का हाल सपा में भी रहा। अकबरपुर में पिछली बार निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर रनर रहीं नाजरीन बेगम को इस बार भी टिकट नहीं दिया गया। वे लगातार दूसरी बार रनर रहीं जबकि अकबरपुर विधायक की ओर से पूरी ताकत लगाने के बाद भी सपा प्रत्याशी यहां मुख्य मुकाबले में ही नहीं आ सकीं। टांडा नगर परिषद अध्यक्ष पद के लिए शबाना नाज को पिछली बार भी सपा ने मना कर दिया था। वे तब निर्दलीय दूसरे स्थान पर थीं।
इस बार भी सपा ने टिकट नहीं दिया तो निर्दल लड़कर चुनाव जीत गईं। राजेसुल्तानपुर में सपा ने पहले विनोद प्रजापति को टिकट दिया था लेकिन बाद में इंकार कर दिया। वे निर्दल चुनाव लड़े और जीत गए।