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शानो शौकत के साथ निकला जुलूसे शोहदाए कर्बला
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अंबेडकरनगर। या सकीना या अब्बास की सदाओं के बीच रविवार को कटघर कमाल में जूलूस ए शोहदाए कर्बला निकला। इमामबारगाह जैनबिया से निकले जुलूस में स्थानीय व बाहरी अंजुमन के सदस्यों ने न सिर्फ नौहाख्वानी की, बल्कि सीनाजनी भी की। जुलूस के दौरान उलेमा ने कर्बला के शहीदों पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस बीच जुलूस में शामिल अमारी, दुलदुल, अलम व ताबूत की दूरदराज के क्षेत्रों से आए बड़ी संख्या में लोगों ने जियारत की। उधर जुलूस को सकुशल व शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने के लिए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे।
जुलूस की शुरुआत मौलाना शाहिद कमाल की मजलिस से हुई। उन्होंने कर्बला पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि इमाम हुसैन का शहादत देने का मकसद इंसानियत को कयामत तक के लिए बचाना था। इमाम हुसैन किसी एक कौम के नहीं हैं। दुनिया के कोने कोने में सभी मजहब के लोग इमाम हुसैन का गम मनाते हैं। ऐसे में हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम जहां भी रहें, वहां इंसानियत का पैगाम दें।
कोई ऐसा कार्य न करें, जिससे किसी को ठेस पहुंचे। बाद में मौलाना ने कर्बला के शहीदों पर प्रकाश डालकर माहौल को भावुक बना दिया। इसके बाद अलम, ताबूत, अमारी, दुलदुल का जुलूस निकला।
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इसमें अंजुमन सिपाहे हुसैनी भनौली सादात सुल्तानपुर, अंजुमन हैदरी रजिस्टर्ड हल्लौर, अंजुमन हुसैनिया जाफराबाद जलालपुर, अंजुमन असगरिया कदीम अमहट सुल्तानपुर, अंजुमन मोईनुल अजा सादात दाउदपुर, अंजुमन असगरिया मछलीगांव, अंजुमन सफीर ए नसेरुल अजा कटघर कमाल के सदस्यों ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की।
जुलूस के दौरान मौलाना सै. कल्बे रुशैद, मौलाना सै. नजर मोहम्मद जैनबी दिल्ली, मौलाना डॉ. रजा अब्बास, मौलाना सै. मोहम्मद मशरकैन, मौलाना सै. बकी जाफरी, मौलाना सै. परवेज कमाल ने तकरीर की। इस बीच जुलूस मेें शामिल अलम, ताबूत, अमारी, दुलदुल की जियारत के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
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जुलूस की शुरुआत मौलाना शाहिद कमाल की मजलिस से हुई। उन्होंने कर्बला पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि इमाम हुसैन का शहादत देने का मकसद इंसानियत को कयामत तक के लिए बचाना था। इमाम हुसैन किसी एक कौम के नहीं हैं। दुनिया के कोने कोने में सभी मजहब के लोग इमाम हुसैन का गम मनाते हैं। ऐसे में हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम जहां भी रहें, वहां इंसानियत का पैगाम दें।
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कोई ऐसा कार्य न करें, जिससे किसी को ठेस पहुंचे। बाद में मौलाना ने कर्बला के शहीदों पर प्रकाश डालकर माहौल को भावुक बना दिया। इसके बाद अलम, ताबूत, अमारी, दुलदुल का जुलूस निकला।
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इसमें अंजुमन सिपाहे हुसैनी भनौली सादात सुल्तानपुर, अंजुमन हैदरी रजिस्टर्ड हल्लौर, अंजुमन हुसैनिया जाफराबाद जलालपुर, अंजुमन असगरिया कदीम अमहट सुल्तानपुर, अंजुमन मोईनुल अजा सादात दाउदपुर, अंजुमन असगरिया मछलीगांव, अंजुमन सफीर ए नसेरुल अजा कटघर कमाल के सदस्यों ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की।
जुलूस के दौरान मौलाना सै. कल्बे रुशैद, मौलाना सै. नजर मोहम्मद जैनबी दिल्ली, मौलाना डॉ. रजा अब्बास, मौलाना सै. मोहम्मद मशरकैन, मौलाना सै. बकी जाफरी, मौलाना सै. परवेज कमाल ने तकरीर की। इस बीच जुलूस मेें शामिल अलम, ताबूत, अमारी, दुलदुल की जियारत के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।