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शनि निकला था चप्पल बनवाने, नसीब हुई मौत
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हजपुरा (अंबेडकरनगर)। फेरी के लिए निकलने की तैयारी में युवक शनिवार को अपनी चप्पल बनवाने के लिए घर से निकला था तो उसे या परिवारीजनों को यह अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि पट्टी चौराहे पर मौत उसका इंतजार कर रही है।
मुरवाह निवासी शनि (22) फेरी दुकानदार था। अलग-अलग समय में वह अलग-अलग सामानों की गांव-गांव घूमकर बिक्री करता था। बताया जाता है कि शुक्रवार को शनि की चप्पल टूट गई। फेरी पर निकलने से पहले वह उसे बनवाने की जानकारी देकर निकला। किसी हादसे की संभावना से बेफिक्र शनि पटरी दुकानदार के सामने बैठकर चप्पल बनवा रहा था। इसी बीच अनियंत्रित ट्रक ने उसे रौंद दिया, जिससे उसकी जान चली गई।
यह खबर गांव तक पहुंची तो रोते-बिखलते परिवारीजन मौके पर पहुंचे। वहां का दृश्य देख उनकी चीख निकल गई। सनी ट्रक से दबकर बेसुध हो चुका था। क्रेन से उसे निकाला गया, लेकिन बचाया नहीं जा सका। शनि का अभी विवाह नहीं हुआ था। पांच भाई-बहनों में वह सबसे छोटा था। तीनों बहन का विवाह हो चुका है, जबकि बड़े भाई मैथिलीशरण खेती के साथ-साथ चाट की दुकान लगाते हैं।
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रुंधे गले से उन्होंने बताया कि काश मैंने उसे सुबह ही चौराहे पर जाने से रोक लिया होता। अपने भाई से अगाध स्नेह रखने वाले मैथिलीशरण ने कहा कि इस मामले में सभी जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उधर, शनि की मौत से मां दुर्गावती का रो-रोकर हाल बेहाल है। अपने कलेजे के टुकड़े को खो देने का सदमा बर्दाश्त कर पाना उनके लिए कठिन हो रहा है। परिवार ने सनी के विवाह का सपना देखा था। शादी धूमधाम से करने की योजना थी। इसके लिए उपयुक्त प्रस्ताव पर विचार चल रहा था। इस बीच हुए इस हादसे ने सब उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
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मुरवाह निवासी शनि (22) फेरी दुकानदार था। अलग-अलग समय में वह अलग-अलग सामानों की गांव-गांव घूमकर बिक्री करता था। बताया जाता है कि शुक्रवार को शनि की चप्पल टूट गई। फेरी पर निकलने से पहले वह उसे बनवाने की जानकारी देकर निकला। किसी हादसे की संभावना से बेफिक्र शनि पटरी दुकानदार के सामने बैठकर चप्पल बनवा रहा था। इसी बीच अनियंत्रित ट्रक ने उसे रौंद दिया, जिससे उसकी जान चली गई।
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यह खबर गांव तक पहुंची तो रोते-बिखलते परिवारीजन मौके पर पहुंचे। वहां का दृश्य देख उनकी चीख निकल गई। सनी ट्रक से दबकर बेसुध हो चुका था। क्रेन से उसे निकाला गया, लेकिन बचाया नहीं जा सका। शनि का अभी विवाह नहीं हुआ था। पांच भाई-बहनों में वह सबसे छोटा था। तीनों बहन का विवाह हो चुका है, जबकि बड़े भाई मैथिलीशरण खेती के साथ-साथ चाट की दुकान लगाते हैं।
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रुंधे गले से उन्होंने बताया कि काश मैंने उसे सुबह ही चौराहे पर जाने से रोक लिया होता। अपने भाई से अगाध स्नेह रखने वाले मैथिलीशरण ने कहा कि इस मामले में सभी जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उधर, शनि की मौत से मां दुर्गावती का रो-रोकर हाल बेहाल है। अपने कलेजे के टुकड़े को खो देने का सदमा बर्दाश्त कर पाना उनके लिए कठिन हो रहा है। परिवार ने सनी के विवाह का सपना देखा था। शादी धूमधाम से करने की योजना थी। इसके लिए उपयुक्त प्रस्ताव पर विचार चल रहा था। इस बीच हुए इस हादसे ने सब उम्मीदों पर पानी फेर दिया।