{"_id":"6ac7cb7d554624d87406ca68","slug":"seller-ordered-to-provide-a-new-printer-after-selling-a-defective-one-ambedkar-nagar-news-c-91-1-ame1023-166628-2026-10-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambedkar Nagar News: खराब प्रिंटर बेचने पर विक्रेता को नया देने का आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambedkar Nagar News: खराब प्रिंटर बेचने पर विक्रेता को नया देने का आदेश
विज्ञापन
अंबेडकरनगर। खराब प्रिंटर बेचने और वारंटी अवधि में उसे ठीक न करने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने विक्रेता के खिलाफ फैसला सुनाया है। आयोग ने विक्रेता को 45 दिन के भीतर उसी कंपनी का नया प्रिंटर देने का आदेश दिया है। नया प्रिंटर न देने पर 13,200 रुपये छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ लौटाने होंगे। इसके अलावा मानसिक एवं आर्थिक क्षति के पांच हजार और वाद व्यय के एक हजार रुपये भी देने होंगे। वहीं, कंपनी को मामले में जिम्मेदार न मानते हुए उसके खिलाफ परिवाद खारिज कर दिया गया।
आजनपारा निवासी नागेंद्र यादव ने 16 जनवरी 2023 को आयोग में परिवाद दाखिल किया था। उन्होंने बताया कि 17 जून 2022 को अकबरपुर स्थित सिटी कंप्यूटर से 13,200 रुपये में एप्सन वाई-फाई प्रिंटर खरीदा था। प्रिंटर में शुरू से ही लाइनिंग, धब्बे और कटिंग की समस्या थी। विक्रेता ने इसे ठीक कराने या बदलने का भरोसा दिया, लेकिन करीब एक माह इस्तेमाल के बाद भी समस्या दूर नहीं हुई। शिकायत के बावजूद न तो प्रिंटर बदला गया और न रकम लौटाई गई।
नागेंद्र ने कंपनी के नंबर पर शिकायत की तो प्रिंटर के सीरियल नंबर में अंतर सामने आया। एप्सन ने आयोग को बताया कि संबंधित सीरियल नंबर उसके दूसरे प्रिंटर का है, जिसे अलीगढ़ के एक डीलर के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति को बेचा गया था। कंपनी ने सर्विस संबंधी अभिलेख भी पेश किए।
विज्ञापन
आयोग ने माना कि नागेंद्र को दिया गया प्रिंटर कंपनी का नहीं था। इसलिए एप्सन की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती है। अध्यक्ष दयाराम और सदस्य किरन ने विक्रेता की अनुपस्थिति में परिवादी के साक्ष्यों के आधार पर उसके खिलाफ परिवाद स्वीकार करते हुए फैसला सुनाया।
विज्ञापन
आजनपारा निवासी नागेंद्र यादव ने 16 जनवरी 2023 को आयोग में परिवाद दाखिल किया था। उन्होंने बताया कि 17 जून 2022 को अकबरपुर स्थित सिटी कंप्यूटर से 13,200 रुपये में एप्सन वाई-फाई प्रिंटर खरीदा था। प्रिंटर में शुरू से ही लाइनिंग, धब्बे और कटिंग की समस्या थी। विक्रेता ने इसे ठीक कराने या बदलने का भरोसा दिया, लेकिन करीब एक माह इस्तेमाल के बाद भी समस्या दूर नहीं हुई। शिकायत के बावजूद न तो प्रिंटर बदला गया और न रकम लौटाई गई।
विज्ञापन
नागेंद्र ने कंपनी के नंबर पर शिकायत की तो प्रिंटर के सीरियल नंबर में अंतर सामने आया। एप्सन ने आयोग को बताया कि संबंधित सीरियल नंबर उसके दूसरे प्रिंटर का है, जिसे अलीगढ़ के एक डीलर के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति को बेचा गया था। कंपनी ने सर्विस संबंधी अभिलेख भी पेश किए।
विज्ञापन
आयोग ने माना कि नागेंद्र को दिया गया प्रिंटर कंपनी का नहीं था। इसलिए एप्सन की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती है। अध्यक्ष दयाराम और सदस्य किरन ने विक्रेता की अनुपस्थिति में परिवादी के साक्ष्यों के आधार पर उसके खिलाफ परिवाद स्वीकार करते हुए फैसला सुनाया।