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Ambedkar Nagar News: प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे मूर्तिकार
Sun, 21 Sep 2025 12:02 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Sun, 21 Sep 2025 12:02 AM IST
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.दुर्गा प्रतिमा को अंतिम रूप दे रहे सूरज।
हजपुरा (अंबेडकरनगर)। क्षेत्र में 22 सितंबर से आरंभ होने वाले नवरात्र की तैयारियां पूरे जोर-शोर से चल रही हैं। स्थानीय मूर्तिकार मां दुर्गा की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में दिन-रात जुटे हुए हैं। सम्मनपुर के मकदूमपुर निवासी मूर्तिकार सूरज विद्यार्थी बचपन से ही कला के प्रति विशेष रूचि रखते हैं। उन्होंने बताया कि उनका पारिवारिक संबंध कोलकाता से रहा है और वहीं रहते हुए उन्होंने प्रतिमा निर्माण की बारीकियां सीखी हैं। पिछले 15 वर्षों से वे अपने क्षेत्र में दुर्गा और गणेश प्रतिमाओं का निर्माण कर रहे हैं।
सूरज विद्यार्थी ने बताया कि किसी भी प्रतिमा का निर्माण कम से कम सात महीने पहले शुरू करना पड़ता है। इस दौरान कच्चे माल का चयन, डिजाइन, आकार, रंग और सजावट के हर पहलू पर महीनों तक बारीकी से कार्य किया जाता है। यह एक धैर्य और परिश्रम का कार्य है, जिसमें हर चरण में अत्यंत सावधानी बरती जाती है। प्रतिमाओं के निर्माण में प्रयुक्त कच्चा माल, जैसे मिट्टी, रंग, पुताई के उपकरण और सजावटी सामग्री मुख्य रूप से कोलकाता से मंगाई जाती है। सूरज ने बताया कि महंगे कच्चे माल के कारण इस वर्ष मूर्तियों की कीमतों में वृद्धि हुई है। तैयार मूर्तियों की कीमत 10 हजार रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक होती है, जो कि प्रतिमा के आकार, डिजाइन और जटिलता के अनुसार तय की जाती है। इस वर्ष दुर्गा उत्सव को भव्य बनाने के लिए कलाकारों की मेहनत और समर्पण देखते ही बनता है।
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सूरज विद्यार्थी ने बताया कि किसी भी प्रतिमा का निर्माण कम से कम सात महीने पहले शुरू करना पड़ता है। इस दौरान कच्चे माल का चयन, डिजाइन, आकार, रंग और सजावट के हर पहलू पर महीनों तक बारीकी से कार्य किया जाता है। यह एक धैर्य और परिश्रम का कार्य है, जिसमें हर चरण में अत्यंत सावधानी बरती जाती है। प्रतिमाओं के निर्माण में प्रयुक्त कच्चा माल, जैसे मिट्टी, रंग, पुताई के उपकरण और सजावटी सामग्री मुख्य रूप से कोलकाता से मंगाई जाती है। सूरज ने बताया कि महंगे कच्चे माल के कारण इस वर्ष मूर्तियों की कीमतों में वृद्धि हुई है। तैयार मूर्तियों की कीमत 10 हजार रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक होती है, जो कि प्रतिमा के आकार, डिजाइन और जटिलता के अनुसार तय की जाती है। इस वर्ष दुर्गा उत्सव को भव्य बनाने के लिए कलाकारों की मेहनत और समर्पण देखते ही बनता है।
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