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Ambedkar Nagar News: नाबालिग की जमीन बेचने का बैनामा निरस्त
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अंबेडकरनगर। भीटी क्षेत्र के जलालपुर परशुरामपुर में नाबालिग की जमीन बिना कानूनी अधिकार और न्यायालय की अनुमति के बेचने के मामले में सिविल जज सीनियर डिवीजन शिखा यादव की अदालत ने बैनामा निरस्त कर दिया। अदालत ने माना कि नाबालिग की अचल संपत्ति बेचने के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था।
वादी प्रमेश कुमार उर्फ प्रवेश कुमार के अनुसार, बचपन में माता-पिता का निधन होने के बाद वह अपने भाई अवधेश कुमार की देखरेख में रहते थे। भाभी से अनबन के चलते करीब पांच वर्ष की उम्र में वह घर छोड़कर चले गए। इसके बाद कई वर्षों तक लखनऊ और नोएडा में काम किया। 17 दिसंबर 2016 को घर लौटने पर चाची ने बताया कि उनके भाई ने उनकी जमीन बेच दी है।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि हिंदू अप्राप्तवयता एवं संरक्षकता अधिनियम के तहत भाई स्वतः नाबालिग का नैसर्गिक संरक्षक नहीं होता। अवधेश को संरक्षक नियुक्त करने का सक्षम न्यायालय से कोई आदेश भी नहीं था। इसके बावजूद 23 अप्रैल 2004 को जमीन का बैनामा कर दिया गया। प्रतिवादी अवधेश ने अपने जवाब में कहा कि राधेश्याम, रामनयन और दिलीप ने उसे शराब पिलाकर जबरन कागजात पर हस्ताक्षर कराए थे। उसे जमीन के बदले कोई रकम भी नहीं मिली थी। अदालत ने पाया कि बैनामा नाबालिग के हित या कानूनी आवश्यकता के लिए किए जाने का कोई प्रमाण नहीं दिया गया। इसी आधार पर बैनामा निरस्त करने का आदेश दिया।
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न्यायालय ने डीसीएम सशर्त अवमुक्त करने का दिया आदेश : अंबेडकरनगर। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप कुमार ने इब्राहिमपुर थाने में निरुद्ध डीसीएम को उसके पंजीकृत स्वामी राम सूरत यादव के पक्ष में सशर्त अवमुक्त करने का आदेश दिया है। राम सूरत यादव ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर वाहन संख्या यूपी 30 टी 1720 को मुक्त करने की मांग की थी। यह डीसीएम सड़क हादसे के एक मामले में थाने में निरुद्ध है। पुलिस आख्या के अनुसार, वाहन का तकनीकी परीक्षण कराया जा चुका है। आवेदक ने पंजीयन प्रमाणपत्र, बीमा, फिटनेस और प्रदूषण प्रमाणपत्र सहित दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिनसे वाहन का स्वामित्व प्रमाणित हुआ।
न्यायालय ने कहा कि लंबे समय तक थाने में खड़े रहने से वाहन का यांत्रिक मूल्य घटने और कल-पुर्जे खराब होने की आशंका है। आदेश के तहत वाहन स्वामी मुकदमे के दौरान न्यायालय की अनुमति के बिना डीसीएम बेच या हस्तांतरित नहीं कर सकेगा और न ही उसके स्वरूप में बदलाव करेगा। (संवाद)
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वादी प्रमेश कुमार उर्फ प्रवेश कुमार के अनुसार, बचपन में माता-पिता का निधन होने के बाद वह अपने भाई अवधेश कुमार की देखरेख में रहते थे। भाभी से अनबन के चलते करीब पांच वर्ष की उम्र में वह घर छोड़कर चले गए। इसके बाद कई वर्षों तक लखनऊ और नोएडा में काम किया। 17 दिसंबर 2016 को घर लौटने पर चाची ने बताया कि उनके भाई ने उनकी जमीन बेच दी है।
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मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि हिंदू अप्राप्तवयता एवं संरक्षकता अधिनियम के तहत भाई स्वतः नाबालिग का नैसर्गिक संरक्षक नहीं होता। अवधेश को संरक्षक नियुक्त करने का सक्षम न्यायालय से कोई आदेश भी नहीं था। इसके बावजूद 23 अप्रैल 2004 को जमीन का बैनामा कर दिया गया। प्रतिवादी अवधेश ने अपने जवाब में कहा कि राधेश्याम, रामनयन और दिलीप ने उसे शराब पिलाकर जबरन कागजात पर हस्ताक्षर कराए थे। उसे जमीन के बदले कोई रकम भी नहीं मिली थी। अदालत ने पाया कि बैनामा नाबालिग के हित या कानूनी आवश्यकता के लिए किए जाने का कोई प्रमाण नहीं दिया गया। इसी आधार पर बैनामा निरस्त करने का आदेश दिया।
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न्यायालय ने डीसीएम सशर्त अवमुक्त करने का दिया आदेश : अंबेडकरनगर। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप कुमार ने इब्राहिमपुर थाने में निरुद्ध डीसीएम को उसके पंजीकृत स्वामी राम सूरत यादव के पक्ष में सशर्त अवमुक्त करने का आदेश दिया है। राम सूरत यादव ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर वाहन संख्या यूपी 30 टी 1720 को मुक्त करने की मांग की थी। यह डीसीएम सड़क हादसे के एक मामले में थाने में निरुद्ध है। पुलिस आख्या के अनुसार, वाहन का तकनीकी परीक्षण कराया जा चुका है। आवेदक ने पंजीयन प्रमाणपत्र, बीमा, फिटनेस और प्रदूषण प्रमाणपत्र सहित दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिनसे वाहन का स्वामित्व प्रमाणित हुआ।
न्यायालय ने कहा कि लंबे समय तक थाने में खड़े रहने से वाहन का यांत्रिक मूल्य घटने और कल-पुर्जे खराब होने की आशंका है। आदेश के तहत वाहन स्वामी मुकदमे के दौरान न्यायालय की अनुमति के बिना डीसीएम बेच या हस्तांतरित नहीं कर सकेगा और न ही उसके स्वरूप में बदलाव करेगा। (संवाद)