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Ambedkar Nagar News: तीन तरफ नदी, बीच में लाचार गांव, पुल तक नहीं

Thu, 23 Jul 2026 10:41 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jul 2026 10:41 PM IST
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River on three sides, helpless village in the middle, no bridge either
जलालपुर के करमुल्लाहपुर गांव जाने के लिए बना लकड़ी का पुल।संवाद
जलालपुर (अंबेडकरनगर)। एक तरफ जहां गांवों के विकास के लिए करोड़ों रुपयों की योजनाओं के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ भियांव विकासखंड के लखमीपुर पूर्व का करमुल्लाहपुर गांव आज भी एक पक्के पुल का इंतजार कर रहा है। नदी का जल्स्तर बढ़ने से ग्रामीणों द्वारा बनाया गया पुल टूटकर बह गया। फिलहाल, जिला प्रशासन ने ग्रामीणों की आवाजाही के लिए नावें लगा दी हैं, लेकिन इनसे नदी पार करना भी किसी खतरे से कम नहीं है।
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तीन तरफ से तमसा नदी से घिरे इस गांव में बारिश का मौसम आते ही जिंदगी थम जाती है। जब नदी का जलस्तर बढ़ता है, तो गांव को जोड़ने वाला लकड़ी का पुल डूबकर बह जाता है। इसके बाद बच्चों की पढ़ाई रुक जाती है, गर्भवती महिलाओं और मरीजों को अस्पताल ले जाना मुश्किल हो जाता है और गांव के युवाओं का भविष्य भी नदी की धार में फंसकर रह जाता है।
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करमुल्लाहपुर के ग्रामीणों ने मजबूरी में ही अपनी व्यवस्था खुद बना ली है। हर साल ग्रामीण चंदा जुटाकर तमसा नदी पर लकड़ी का एक अस्थायी (कच्चा) पुल बनाते हैं, जिस पर 15 से 20 हजार रुपये का खर्च आता है। लेकिन बारिश तेज होते ही यह पुल टूट जाता है या बह जाता है। हाल ही में पुल टूट गया, इससे पांच लोग नदी में गिरकर घायल हो गए। पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। (संवाद)
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150 मीटर दूर सड़क, लेकिन पहुंचने में लगते हैं दो घंटे
विडंबना यह है कि गांव से मुख्य मार्ग रामगढ़-जलालपुर मार्ग महज 150 मीटर की दूरी पर है। यदि नदी पर पुल बन जाए, तो बच्चे सिर्फ पांच मिनट में स्कूल और मरीज कुछ ही मिनटों में अस्पताल पहुंच सकते हैं। लेकिन पुल न होने के कारण ग्रामीणों को लगभग पांच किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है। इससे स्कूली बच्चों को रोज दो घंटे का जोखिम भरा सफर तय करना पड़ता है, जबकि बारिश के दिनों में कई बच्चे स्कूल जाना ही छोड़ देते हैं।

फाइलों से बाहर नहीं निकल सका पुल
ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने गांव का दौरा करके सेतु निर्माण निगम को पुल बनाने के निर्देश दिए थे। उस समय लोगों में उम्मीद जगी थी कि अब दशकों पुरानी समस्या से राहत मिलेगी। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी न तो सर्वे का काम आगे बढ़ा और न ही निर्माण शुरू हो सका। ग्रामीणों का आरोप है कि कागजों और फाइलों में भले ही पुल बन गया हो, लेकिन जमीन पर आज भी सिर्फ बहती नदी और लोगों का अंतहीन इंतजार ही बचा है।


अब वोट नहीं, पहले पुल
ग्रामीण राकेश यादव, अनमोल शुक्ला, गोपी यादव, कैलाश यादव, पप्पू यादव, बद्री यादव, ग्राम प्रधान रिंकू गौड़, कैलाश शुक्ला, मूलचंद यादव, विद्यावती देवी और अमरनाथ शुक्ला समेत कई लोगों का कहना है कि उन्होंने सांसद, विधायक और प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार ज्ञापन सौंपा, लेकिन हर बार सिर्फ खोखले आश्वासन ही मिले। आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है, अब जो भी नेता वोट मांगने आएगा, उससे पहला सवाल यही होगा कि करमुल्लाहपुर का पुल कब बनेगा? हमने भाषण और वादे बहुत सुन लिए, अब हमें सिर्फ सड़क और पक्का पुल चाहिए।


चारपाई पर नदी पार करने को मजबूर मरीज
ग्रामीण शेर बहादुर यादव ने बताया कि सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है, जब किसी गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होती है या किसी गंभीर मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में अक्सर लोग मरीज को चारपाई या कंधों पर लादकर नदी पार कराने को मजबूर होते हैं।

शादी पर भी भारी पड़ रहा पुल का न होना
ग्रामीण रवि कुमार ने बताया कि पुल न होने का असर अब लोगों के सामाजिक जीवन पर भी बुरी तरह पड़ रहा है। गांव के कई युवकों की उम्र 40 से 45 वर्ष हो चुकी है, लेकिन उनका विवाह नहीं हो पा रहा है। जब भी कोई रिश्तेदार शादी की बात के लिए गांव आता है और यहां उफनती नदी, टूटा हुआ पुल और खराब रास्ता देखता है, तो बिना रिश्ता तय किए ही लौट जाता है।



तमसा नदी पर बने अस्थायी पुल के डूबने से ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। डीएम ईशा प्रिया के निर्देश पर अधिकारियों के साथ गांव का स्थलीय निरीक्षण किया है। समस्या के त्वरित समाधान के लिए तुरंत एक नाव उपलब्ध करा दी गई है, जबकि दूसरी नाव खरीदने के निर्देश ग्राम प्रधान को दे दिए हैं। ग्रामीण यहां पीपा पुल बनाने की मांग कर रहे हैं। संबंधित विभाग के अधिकारियों से बात करके जल्द ही स्थायी समाधान निकाला जाएगा।
- मधुमिता सिंह, एसडीएम जलालपुर
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