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बारिश का कहर, मकान ढहने से बालिका व अधेड़ की मौत
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अंबेडकरनगर के तौकला गांव में इसी मकान के ढहने से बालिका की हुई मौत
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
अंबेडकरनगर। कई दिनों से हो रही बारिश ने बीते 24 घंटे के भीतर जिले में जमकर कहर बरपाया। अलग-अलग स्थानों पर मकान ढहने से दबकर बालिका व अधेड़ की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य ग्रामीण घायल हो गए। बरसात के चलते करीब एक दर्जन मकान व छप्पर ढह गए। उधर, शनिवार देर शाम से हुई तेज बारिश के चलते शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह जलभराव का संकट भी गहरा गया। इसका जायजा लेने तथा समस्या का निस्तारण कराने के लिए अधिकारियों को टीम को मौके पर भेजना पड़ा।
कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश ने बीते 24 घंटे में जिले में जमकर कहर बरपाया। न सिर्फ जान, बल्कि माल का भी नुकसान हुआ। अलग-अलग थाना क्षेत्र में कच्चे घर ढहने से एक बालिका व अधेड़ की मौत हो गई। महरुआ थाना क्षेत्र के रामनगर कर्री के मजरा तौकला गांव निवासी पप्पू की पुत्री सोनू (17) व नेहा (15) अपनी चचेरी बहन राधा (10) पुत्री अर्जुन के साथ छप्पर के नीचे सोई हुई थी।
बताया जाता है कि मध्यरात्रि के बाद लगभग तीन बजे अचानक पड़ोसी राकेश के कच्चे घर की दीवार ढह गई। इससे छप्पर भी ढह गया। घटना से चीख पुकार मच गई। आसपास के ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए। जानकारी पुलिस को देने के साथ ही मलबा हटाए जाने का कार्य प्रारंभ हो गया। अथक प्रयास के बाद मलबा हटाया गया, लेकिन तब तक राधा की मौत हो चुकी थी। गंभीर रूप से घायल सोनू व नेहा का स्थानीय स्तर पर इलाज कराया गया, लेकिन तबीयत में सुधार न होने पर प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल सुल्तानपुर रेफर कर दिया गया।
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इस बीच जानकारी होते ही तहसीलदार भीटी ज्ञानेंद्र यादव व थानाध्यक्ष महरुआ नागेंद्र सरोज टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और जानकारी हासिल की। शव का पंचनामा कर परिवारीजनों को सौंप दिया। तहसीलदार ने पीड़ित परिवार को आश्वस्त किया कि आपदा के तहत जरूरी सहायता प्रदान की जाएगी।
उधर, हंसवर थाना अंतर्गत रायपुर गांव निवासी फूलचंद्र (55) की भी दीवार के मलबे की चपेट में आने से मौत हो गई। बताया जाता है कि फूलचंद्र छप्पर के नीचे सो रहे थे। तेज बारिश के बीच शनिवार को देर रात पड़ोसी राजमन के कच्चे घर की दीवार अचानक ढह गई। इससे छप्पर भी ढह गया, जिससे फूलचंद्र उसकी चपेट में आ गया।
चीख पुकार सुनकर पहुंचे ग्रामीणों ने परिवारीजनों की मदद से मलबा हटाकर जब तक उन्हें बाहर निकाला, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। इस बीच जानकारी होने पर रविवार सुबह एसडीएम टांडा अभिषेक पाठक ने गांव पहुंचकर घटनास्थल का जायजा लिया। इसके अलावा जलालपुर, आलापुर व भीटी थाना क्षेत्र में हुए हादसे में जहां तीन अन्य लोग घायल हो गए, वहीं आधा दर्जन से अधिक छप्पर व कच्चे घर भी ढह गए।
तालाब बन गईं सड़कें, आवागमन में दिक्कतें
शनिवार देर शाम से हुई तेज बारिश का सिलसिला रविवार को सुबह तक जारी रहा। हालांकि रविवार को जिले के ज्यादातर क्षेत्रों में दिन में बूंदाबांदी ही हुई। शनिवार लगभग पूरी रात हुई बारिश से जिले में जगह-जगह जलभराव हो गया। शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में प्रमुख मार्ग व बाजारों की सड़कें जलाशय में तब्दील हो गईं। समुचित जलनिकासी न होने से ज्यादातर गांवों की गलियों में पानी भर गया। जलभराव हो जाने से लोगों को आवागमन में दिक्कतें हुईं। अकबरपुर नगर के अकबरपुर अयोध्या मार्ग पर शीतला आश्रम से लेकर बनगांव मोड़ तक, सब्जी मण्डी, शहजादपुर चौक, बस स्टेशन क्षेत्र, पटेलनगर तिराहा, कृषि भवन के निकट, पीडब्ल्यूडी कार्यालय, अकबरपुर विद्युत उपकेंद्र, कोतवाली के निकट, कलेक्ट्रेट के निकट के अलावा भीटी बाजार, केदारनगर बाजार, बसखारी बाजार, किछौछा, दरगाह क्षेत्र, जहांगीरगंज, रामनगर, राजेसुल्तानपुर, महरुआ, हजपुरा, सम्मनपुर, मालीपुर आदि क्षेत्र में प्रमुख मार्ग व बाजारों में जलभराव हो गया। इससे लोगों को आवागमन में मुश्किलें उठानी पड़ीं। इस बीच लगातार बढ़ रही जलभराव की समस्या से लोगों में नाराजगी भी दिखी। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रमाकांत मिश्र ने कहा कि जलभराव समस्या को दूर कराने के लिए जिम्मेदारों को ठोस कदम उठाना होगा।
पूरी तरह चौपट हुई मेंथा की फसल
लगातार हो रही बारिश ने मेंथा की फसल को पूरी तरह से चौपट कर दिया। इससे मेंथा किसानों को तगड़ी आर्थिक चपत लगी है। मेंथा किसान आलोक कुमार व संदीप ने कहा कि इस बार फसल अच्छी थी। उम्मीद थी कि काफी आर्थिक लाभ होगा, लेकिन बारिश ने सारी उम्मीदों को तोड़ दिया। न सिर्फ खेतों में खड़ी फसल सड़ गई, बल्कि पेराई के रखी उपज भी सड़ने लगी है। इससे बड़ी आर्थिक चपत लगी है। बूढ़नपुर के महेश व राजेंद्र तथा हजपुरा के लईक ने कहा कि अब मेंथा फसल में कुछ नहीं शेष रह गया। बारिश ने सब कुछ बर्बाद कर दिया है। गोविंद गनेशपुर के राजेंद्र व मरथुआ सरैया के गयादीन पांडेय ने कहा कि धान की रोपाई के लिए बेरन बोई थी। जलनिकासी की समुचित व्यवस्था न होने से खेत में पानी भर गया। लगातार पानी भरा रहने से बेरन सड़ गई। अब दोबारा बेरन तैयार करने में न सिर्फ समय लगेगा, बल्कि आर्थिक नुकसान भी होगा। यदि बेरन तैयार भी होगी, तो इसका उपज पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
45 हजार लोगों की गुल रही बिजली
शनिवार पूरी रात हुई तेज बारिश ने जिले की विद्युत आपूर्ति भी छिन्नभिन्न कर दी। कहीं शॉर्ट सर्किट से केबल जल गई, तो कहीं पेड़ की डाल गिरने से जर्जर हो चुके तार क्षतिग्रस्त हो गए। इससे संबंधित क्षेत्र की लगभग 45 हजार की आबादी को रविवार लगभग पूरे दिन बिजली नहीं मिल सकी। इसके अलावा जिला मुख्यालय पर भी बिजली का आवागमन रविार को पूरे दिन होता रहा। राजेसुल्तानपुर, जहांगीरगंज, रामनगर, महरुआ, भीटी, कटेहरी व रफीगंज में केबिल जलने, तार टूटने व विद्युत खंभे के क्षतिग्रस्त होने से उपभोक्ताओं को रविवार लगभग पूरे दिन विद्युत आपूर्ति से वंचित रहना पड़ा। इससे उन्हें विभिन्न प्रकार की मुश्किलें उठानी पड़ी। सबसे अधिक समस्या पेयजल को लेकर हुई।
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कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश ने बीते 24 घंटे में जिले में जमकर कहर बरपाया। न सिर्फ जान, बल्कि माल का भी नुकसान हुआ। अलग-अलग थाना क्षेत्र में कच्चे घर ढहने से एक बालिका व अधेड़ की मौत हो गई। महरुआ थाना क्षेत्र के रामनगर कर्री के मजरा तौकला गांव निवासी पप्पू की पुत्री सोनू (17) व नेहा (15) अपनी चचेरी बहन राधा (10) पुत्री अर्जुन के साथ छप्पर के नीचे सोई हुई थी।
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इस बीच जानकारी होते ही तहसीलदार भीटी ज्ञानेंद्र यादव व थानाध्यक्ष महरुआ नागेंद्र सरोज टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और जानकारी हासिल की। शव का पंचनामा कर परिवारीजनों को सौंप दिया। तहसीलदार ने पीड़ित परिवार को आश्वस्त किया कि आपदा के तहत जरूरी सहायता प्रदान की जाएगी।
उधर, हंसवर थाना अंतर्गत रायपुर गांव निवासी फूलचंद्र (55) की भी दीवार के मलबे की चपेट में आने से मौत हो गई। बताया जाता है कि फूलचंद्र छप्पर के नीचे सो रहे थे। तेज बारिश के बीच शनिवार को देर रात पड़ोसी राजमन के कच्चे घर की दीवार अचानक ढह गई। इससे छप्पर भी ढह गया, जिससे फूलचंद्र उसकी चपेट में आ गया।
चीख पुकार सुनकर पहुंचे ग्रामीणों ने परिवारीजनों की मदद से मलबा हटाकर जब तक उन्हें बाहर निकाला, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। इस बीच जानकारी होने पर रविवार सुबह एसडीएम टांडा अभिषेक पाठक ने गांव पहुंचकर घटनास्थल का जायजा लिया। इसके अलावा जलालपुर, आलापुर व भीटी थाना क्षेत्र में हुए हादसे में जहां तीन अन्य लोग घायल हो गए, वहीं आधा दर्जन से अधिक छप्पर व कच्चे घर भी ढह गए।
तालाब बन गईं सड़कें, आवागमन में दिक्कतें
शनिवार देर शाम से हुई तेज बारिश का सिलसिला रविवार को सुबह तक जारी रहा। हालांकि रविवार को जिले के ज्यादातर क्षेत्रों में दिन में बूंदाबांदी ही हुई। शनिवार लगभग पूरी रात हुई बारिश से जिले में जगह-जगह जलभराव हो गया। शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में प्रमुख मार्ग व बाजारों की सड़कें जलाशय में तब्दील हो गईं। समुचित जलनिकासी न होने से ज्यादातर गांवों की गलियों में पानी भर गया। जलभराव हो जाने से लोगों को आवागमन में दिक्कतें हुईं। अकबरपुर नगर के अकबरपुर अयोध्या मार्ग पर शीतला आश्रम से लेकर बनगांव मोड़ तक, सब्जी मण्डी, शहजादपुर चौक, बस स्टेशन क्षेत्र, पटेलनगर तिराहा, कृषि भवन के निकट, पीडब्ल्यूडी कार्यालय, अकबरपुर विद्युत उपकेंद्र, कोतवाली के निकट, कलेक्ट्रेट के निकट के अलावा भीटी बाजार, केदारनगर बाजार, बसखारी बाजार, किछौछा, दरगाह क्षेत्र, जहांगीरगंज, रामनगर, राजेसुल्तानपुर, महरुआ, हजपुरा, सम्मनपुर, मालीपुर आदि क्षेत्र में प्रमुख मार्ग व बाजारों में जलभराव हो गया। इससे लोगों को आवागमन में मुश्किलें उठानी पड़ीं। इस बीच लगातार बढ़ रही जलभराव की समस्या से लोगों में नाराजगी भी दिखी। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रमाकांत मिश्र ने कहा कि जलभराव समस्या को दूर कराने के लिए जिम्मेदारों को ठोस कदम उठाना होगा।
पूरी तरह चौपट हुई मेंथा की फसल
लगातार हो रही बारिश ने मेंथा की फसल को पूरी तरह से चौपट कर दिया। इससे मेंथा किसानों को तगड़ी आर्थिक चपत लगी है। मेंथा किसान आलोक कुमार व संदीप ने कहा कि इस बार फसल अच्छी थी। उम्मीद थी कि काफी आर्थिक लाभ होगा, लेकिन बारिश ने सारी उम्मीदों को तोड़ दिया। न सिर्फ खेतों में खड़ी फसल सड़ गई, बल्कि पेराई के रखी उपज भी सड़ने लगी है। इससे बड़ी आर्थिक चपत लगी है। बूढ़नपुर के महेश व राजेंद्र तथा हजपुरा के लईक ने कहा कि अब मेंथा फसल में कुछ नहीं शेष रह गया। बारिश ने सब कुछ बर्बाद कर दिया है। गोविंद गनेशपुर के राजेंद्र व मरथुआ सरैया के गयादीन पांडेय ने कहा कि धान की रोपाई के लिए बेरन बोई थी। जलनिकासी की समुचित व्यवस्था न होने से खेत में पानी भर गया। लगातार पानी भरा रहने से बेरन सड़ गई। अब दोबारा बेरन तैयार करने में न सिर्फ समय लगेगा, बल्कि आर्थिक नुकसान भी होगा। यदि बेरन तैयार भी होगी, तो इसका उपज पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
45 हजार लोगों की गुल रही बिजली
शनिवार पूरी रात हुई तेज बारिश ने जिले की विद्युत आपूर्ति भी छिन्नभिन्न कर दी। कहीं शॉर्ट सर्किट से केबल जल गई, तो कहीं पेड़ की डाल गिरने से जर्जर हो चुके तार क्षतिग्रस्त हो गए। इससे संबंधित क्षेत्र की लगभग 45 हजार की आबादी को रविवार लगभग पूरे दिन बिजली नहीं मिल सकी। इसके अलावा जिला मुख्यालय पर भी बिजली का आवागमन रविार को पूरे दिन होता रहा। राजेसुल्तानपुर, जहांगीरगंज, रामनगर, महरुआ, भीटी, कटेहरी व रफीगंज में केबिल जलने, तार टूटने व विद्युत खंभे के क्षतिग्रस्त होने से उपभोक्ताओं को रविवार लगभग पूरे दिन विद्युत आपूर्ति से वंचित रहना पड़ा। इससे उन्हें विभिन्न प्रकार की मुश्किलें उठानी पड़ी। सबसे अधिक समस्या पेयजल को लेकर हुई।