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Ambedkar Nagar News: सत्य और धर्म की रक्षा ही जीवन का सर्वोच्च आदर्श
Tue, 16 Sep 2025 12:52 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Tue, 16 Sep 2025 12:52 AM IST
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बसखारी (अंबेडकरनगर)। क्षेत्र के नवदुर्गा महाविद्यालय खसरोपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का समापन यज्ञ के साथ सोमवार को हुआ। पंडित जगजीवन पांडेय ने कहा कि यज्ञ केवल अग्नि में आहुति देने का अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि यह जीवन का वह पथ है जो त्याग, अनुशासन और कर्तव्यपालन की शिक्षा देता है।
यज्ञ हमें यह सिखाता है कि मनुष्य अपनी इच्छाओं और अहंकार की आहुति देकर दूसरों के कल्याण में योगदान करें। जब तक समाज का प्रत्येक वर्ग यज्ञ की इस भावना को अपने जीवन में नहीं उतारेगा, तब तक सच्चे अर्थों में धर्म की स्थापना संभव नहीं है। वेदों और पुराणों में यज्ञ को जीवन का आधार बताया गया है। अग्नि में दी जाने वाली प्रत्येक आहुति केवल धूप या अन्न की नहीं होती, बल्कि यह संकल्प होता है कि हम सत्य, न्याय और करुणा के मार्ग पर चलेंगे। आज आवश्यकता है कि यज्ञ की परंपरा को केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उसके वास्तविक संदेश को समझकर समाज के सुधार और राष्ट्र के उत्थान में लगाया जाए।भागवत कथा हमें यह सिखाती है कि जीवन में चाहे कैसी भी परिस्थिति आए, धर्म का मार्ग कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन से यह उदाहरण दिया कि सत्य और धर्म की रक्षा ही जीवन का सर्वोच्च आदर्श है। आचार्य ने कहा कि शिक्षा का महत्व निर्विवाद है, किंतु केवल डिग्री ही पर्याप्त नहीं। यदि नई पीढ़ी गीता और भागवत से प्रेरणा लेकर सत्य, परिश्रम और सदाचार को जीवन में उतारे, तो वह राष्ट्र के लिए नई दिशा तय कर सकती है। समापन अवसर पर भक्तों ने वेदमंत्रों के बीच हवन में आहुति दी और सुख-समृद्धि, शांति एवं समाज कल्याण की कामना की।
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यज्ञ हमें यह सिखाता है कि मनुष्य अपनी इच्छाओं और अहंकार की आहुति देकर दूसरों के कल्याण में योगदान करें। जब तक समाज का प्रत्येक वर्ग यज्ञ की इस भावना को अपने जीवन में नहीं उतारेगा, तब तक सच्चे अर्थों में धर्म की स्थापना संभव नहीं है। वेदों और पुराणों में यज्ञ को जीवन का आधार बताया गया है। अग्नि में दी जाने वाली प्रत्येक आहुति केवल धूप या अन्न की नहीं होती, बल्कि यह संकल्प होता है कि हम सत्य, न्याय और करुणा के मार्ग पर चलेंगे। आज आवश्यकता है कि यज्ञ की परंपरा को केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उसके वास्तविक संदेश को समझकर समाज के सुधार और राष्ट्र के उत्थान में लगाया जाए।भागवत कथा हमें यह सिखाती है कि जीवन में चाहे कैसी भी परिस्थिति आए, धर्म का मार्ग कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
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भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन से यह उदाहरण दिया कि सत्य और धर्म की रक्षा ही जीवन का सर्वोच्च आदर्श है। आचार्य ने कहा कि शिक्षा का महत्व निर्विवाद है, किंतु केवल डिग्री ही पर्याप्त नहीं। यदि नई पीढ़ी गीता और भागवत से प्रेरणा लेकर सत्य, परिश्रम और सदाचार को जीवन में उतारे, तो वह राष्ट्र के लिए नई दिशा तय कर सकती है। समापन अवसर पर भक्तों ने वेदमंत्रों के बीच हवन में आहुति दी और सुख-समृद्धि, शांति एवं समाज कल्याण की कामना की।
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