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बिजली की बदहाली ने बढ़ार्ईं किसानों की मुश्किलें

Mon, 11 Jul 2022 11:54 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 11 Jul 2022 11:54 PM IST
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Poverty of electricity increased the problems of farmers
अंबेडकरनगर। मौसम की नाराजगी के साथ ही बिजली की बदहाल सप्लाई व्यवस्था भी किसानों पर भारी पड़ रही है। बिजली की अघोषित कटौती ने धान किसानों की चिंता बढ़ा दी है। समय पर सिंचाई न हो पाने के कारण खेतों में पड़ी दरारें भी किसानों के माथे पर चिंता की लकीर गहरा रही है। इससे एक तरफ जहां रोपाई के बाद धान की फसल के सूखने की आशंका है तो वहीं गन्ने की फसल भी बर्बाद होने की कगार पर है। मौसम की बेरुखी के साथ ही पटरी से उतरी विद्युत सप्लाई व्यवस्था के कारण किसानों को सिंचाई के लिए ट्यूबवेल से पानी तक नहीं मिल पा रहा है।
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जुलाई माह का दूसरा सप्ताह शुरू होने के बाद भी आसमान से आग बरस रही है। रूठे मानसून का सबसे ज्यादा खामियाजा धान व गन्ना किसानों को भुगतना पड़ रहा है। धान की रोपाई के दौरान खेतों में पानी की सख्त जरूरत होती है। रोपाई का कार्य तो किसान किसी प्रकार के वैकल्पिक प्रबंध से कर कर ले रहे हैं, लेकिन समय पर सिंचाई नहीं हो पा रही।
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भीषण गर्मी में तेज धूप के बीच सिंचाई को पानी न मिलने के कारण ही खेतों में दरारें तक पड़ने लगी हैं। सिंचाई न हो पाने से धान की फसल में दीमक लगने का दंश भी मुसीबत बढ़ाने लगा है। सिंचाई न हो पाने से धान के साथ ही गन्ने की फसल भी सूखने की कगार पर पहुंच गई है। ऐसे में जब धान व गन्ने की फसल को जब सिंचाई की सबसे ज्यादा जरूरत है तो ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को अघोषित बिजली कटौती के संकट से भी जूझना पड़ रहा है।
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किसानों को जरूरत के हिसाब से समुचित बिजली नहीं मिल पा रही है। जो बिजली मिल भी रही है, उसमें लो वोल्टेज की समस्या कायम रहने से सिंचाई के लिए ट्यूबवेल इत्यादि का संचालन नहीं हो पाता। जो ट्यूबवेल चलते भी हैं, उनमें से पानी काफी धीमी स्पीड के साथ निकलता है। इससे एक बीघा फसल की सिंचाई करने में ही छह से सात घंटे तक का समय लग जाता है।

चौपट होगी फसल, घटेगी पैदावार
कटरिया सम्मनपुर के किसान रामजीत ने मौसम की बेरुखी पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे जिले में सूखे जैसा माहौल बन रहा। ऐसे में बिजली संकट के कारण सिंचाई की समुचित व्यवस्था न हो पाने से इस बार फसल तो चौपट होगी ही साथ ही पैदावार भी घटेगी। किसान जयप्रकाश का कहना था कि मौसम की मार ने वैसे ही कमर तोड़ रखी है। ऐसे में अघोषित बिजली कटौती के सिंचाई के लिए ट्यूबवेल तक नहीं चल पा रहे हैं। आसमान छूती डीजल की कीमत से इंजन से पंप का संचालन करना भी काफी भारी पड़ रहा है। जमुनपुर के राम आशीष वर्मा ने कहा कि बारिश न होने व लगातार पानी के दोहन से नीचे गिरे भूमिगत जल स्तर के कारण भी सिंचाई में काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
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