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Ambedkar Nagar News: पूरी रात हूटर की आवाज से गूंजता रहा पियारेपुर
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श्रवणक्षेत्र (अंबेडकरनगर)। अहिरौली थाना क्षेत्र के पियारेपुर गांव में बीते दिनों सियार के हमले के बाद वन विभाग की टीम ने शनिवार लगभग पूरी रात गांव के आसपास के क्षेत्रों में कांबिंग की। पूरी रात रह-रह कर हूटर की आवाज गांव में गूंजती रही।
बीते दिनों पियारेपुर गांव में सियार के झुंड ने अचानक ग्रामीणों पर हमला कर दिया था, इसमें दो ग्रामीण घायल हो गए थे। उनका सीएचसी कटेहरी में इलाज कराया गया था। इस घटना से ग्रामीणों के बीच भय व्याप्त हो गया। दूसरे दिन सुबह वन विभाग के अधिकारी व एसडीएम आदि ने पहुंचकर घटना की जानकारी ग्रामीणों से ली। इसके बाद वन विभाग ने गांव में कांबिंग कराने का निर्णय लिया था। इसी क्रम में शनिवार रात डीएफओ डॉ. उमेश तिवारी के नेतृत्व में वन दरोगा व सिपाही पियारेपुर गांव पहुंच गए। वहां ग्रामीणों से जरूरी जानकारी ली।
इसके बाद गांव के आसपास का पैदल भ्रमण किया, हूटर भी बजाया गया। देर रात तक अधिकारी व कर्मचारी गांव में बने रहे। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों को जागरूक भी किया। कहा कि रात के समय पशुशाला में लाइट जलाकर रखें। मुर्गा व बकरी पर जंगली पशु ज्यादा हमला करते हैं, क्योंकि वे उनका आहार होते हैं। ऐसे में जरूरी है कि ऐसे जानवरों को खुले में न रखें। उन्हें किसी बंद झोपड़ी में रखें। कहा कि नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ कछार में रहने वाले जानवर जब आबादी क्षेत्र में आते हैं तो वह कुछ आक्रामक हो जाते हैं। इससे सावधान रहने की जरूरत है।
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बीते दिनों पियारेपुर गांव में सियार के झुंड ने अचानक ग्रामीणों पर हमला कर दिया था, इसमें दो ग्रामीण घायल हो गए थे। उनका सीएचसी कटेहरी में इलाज कराया गया था। इस घटना से ग्रामीणों के बीच भय व्याप्त हो गया। दूसरे दिन सुबह वन विभाग के अधिकारी व एसडीएम आदि ने पहुंचकर घटना की जानकारी ग्रामीणों से ली। इसके बाद वन विभाग ने गांव में कांबिंग कराने का निर्णय लिया था। इसी क्रम में शनिवार रात डीएफओ डॉ. उमेश तिवारी के नेतृत्व में वन दरोगा व सिपाही पियारेपुर गांव पहुंच गए। वहां ग्रामीणों से जरूरी जानकारी ली।
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इसके बाद गांव के आसपास का पैदल भ्रमण किया, हूटर भी बजाया गया। देर रात तक अधिकारी व कर्मचारी गांव में बने रहे। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों को जागरूक भी किया। कहा कि रात के समय पशुशाला में लाइट जलाकर रखें। मुर्गा व बकरी पर जंगली पशु ज्यादा हमला करते हैं, क्योंकि वे उनका आहार होते हैं। ऐसे में जरूरी है कि ऐसे जानवरों को खुले में न रखें। उन्हें किसी बंद झोपड़ी में रखें। कहा कि नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ कछार में रहने वाले जानवर जब आबादी क्षेत्र में आते हैं तो वह कुछ आक्रामक हो जाते हैं। इससे सावधान रहने की जरूरत है।
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