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जान जोखिम में डाल ट्रैक से आवागमन कर रहे लोग
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अंबेडकरनगर के अरियौना स्थित रेल ट्रैक से इस तरह जान जोखिम में डाल सामान को ले जाते ग्रामीण -संवाद
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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जमुनीपुर (अंबेडकरनगर)। अकबरपुर तहसील क्षेत्र अंतर्गत अरियौना से होकर गुजरे रेलवे ट्रैक से कभी भी अनहोनी घटित हो सकती है। यहां समपार की सुविधा न होने के कारण हर दिन ट्रैक से होकर बड़ी संख्या में ग्रामीणों व राहगीरों को जान जोखिम में डाल कर आवागमन करना पड़ता है। बाइक सवार जहां कड़ी मशक्कत कर ट्रैक पार करते हैं तो वहीं साइकिल सवारों को साइकिल उठाकर रेलवे ट्रैक से निकलना पड़ता है। जबकि ठेले आदि पर सामान लेकर जाने वाले नागरिकों को दो तीन व्यक्ति को साथ लेकर आना पड़ता है। इससे हर समय हादसे की संभावना बनी रहती है।
अरियौना गांव के बाहरी छोर से रेलवे ट्रैक गुजरा है। मुख्य मार्ग होने के चलते यहां से अयोध्या, लखनऊ, दिल्ली आदि शहरों के लिए ट्रेनों का आवागमन भी हर समय बना रहता है। रेलवे ट्रैक के कुछ ही दूर पर स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना है। यहां समपार मार्ग की सुविधा न होने से प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण व राहगीर जान जोखिम में डालकर अपने गंतव्य तक आवागमन करते हैं। सबसे ज्यादा समस्या बाइक सवारों व अन्य वाहनों को उठानी पड़ती है। बाइक सवारों को ट्रैक पार करने के दौरान किसी राहगीर या साथ में बैठे व्यक्ति का सहारा लेना पड़ता है तो वहीं साइकिल सवारों को हाथ में साइकिल लेकर ट्रैक पार करने की मजबूरी रहती है।
समस्या तब और गंभीर हो जाती है जब ठेले आदि पर लदे सामानों को लेकर ग्रामीणों को ट्रैक पार करना पड़ता है। इस दौरान ठेला चालकों को राहगीरों या ग्रामीणों की मदद लेनी पड़ती है। इसके बाद ही ट्रैक को पार करने में सफलता मिलती हैै। इस बीच कब ट्रेन आ जाए इसका भी डर बना रहता है।
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स्थानीय निवासी शैलेंद्र श्रीवास्तव, सुभाष शर्मा, शिव कुमार, आशा यादव, साधना व रामविशाल आदि का कहना है कि यहां समपार मार्ग न होने से हर समय अनहोनी की आशंका बनी रहती है। कई बार यहां समपार निर्माण के लिए आवाज उठाई गई, लेकिन इस तरफ ध्यान नहीं दिया जाता है। मजबूरी में जान दांव पर लगा कर ट्रैक पार कर आवागमन करना पड़ता है।
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अरियौना गांव के बाहरी छोर से रेलवे ट्रैक गुजरा है। मुख्य मार्ग होने के चलते यहां से अयोध्या, लखनऊ, दिल्ली आदि शहरों के लिए ट्रेनों का आवागमन भी हर समय बना रहता है। रेलवे ट्रैक के कुछ ही दूर पर स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना है। यहां समपार मार्ग की सुविधा न होने से प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण व राहगीर जान जोखिम में डालकर अपने गंतव्य तक आवागमन करते हैं। सबसे ज्यादा समस्या बाइक सवारों व अन्य वाहनों को उठानी पड़ती है। बाइक सवारों को ट्रैक पार करने के दौरान किसी राहगीर या साथ में बैठे व्यक्ति का सहारा लेना पड़ता है तो वहीं साइकिल सवारों को हाथ में साइकिल लेकर ट्रैक पार करने की मजबूरी रहती है।
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समस्या तब और गंभीर हो जाती है जब ठेले आदि पर लदे सामानों को लेकर ग्रामीणों को ट्रैक पार करना पड़ता है। इस दौरान ठेला चालकों को राहगीरों या ग्रामीणों की मदद लेनी पड़ती है। इसके बाद ही ट्रैक को पार करने में सफलता मिलती हैै। इस बीच कब ट्रेन आ जाए इसका भी डर बना रहता है।
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स्थानीय निवासी शैलेंद्र श्रीवास्तव, सुभाष शर्मा, शिव कुमार, आशा यादव, साधना व रामविशाल आदि का कहना है कि यहां समपार मार्ग न होने से हर समय अनहोनी की आशंका बनी रहती है। कई बार यहां समपार निर्माण के लिए आवाज उठाई गई, लेकिन इस तरफ ध्यान नहीं दिया जाता है। मजबूरी में जान दांव पर लगा कर ट्रैक पार कर आवागमन करना पड़ता है।