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निर्धारित समय से तीन माह बाद शुरु हुआ पीपा पुल
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राजेसुलतानपुर (अंबेडकरनगर)। सरयू नदी के कम्हरिया घाट पर अपने निर्धारित समय से लगभग तीन माह बाद पीपे के पुल पर आवागमन शुरू हो गया। इससे अब राहगीरों व सरयू नदी के किनारे स्थित ग्रामीणों को आवागमन में काफी सुविधा मिलेगी। पीपे के पुल से आवागमन न होने के चलते नागरिकों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था।
सरयू नदी के कम्हरिया घाट पर पीपे के पुल पर 15 नवंबर से 15 जून तक आवागमन होता है। परंतु इस बार नदी की धारा अधिक चौड़ी होने के कारण पीपे कम पड़ जाने के कारण पीपे के पुल का निर्माण कार्य समय से नहीं पूरा हो सका था। इसके कारण कार सवारों को मजबूर होकर बिड़हर घाट होकर खलीलाबाद के रास्ते गोरखपुर का सफर करना पड़ता था। इससे अधिक दूरी तय करने के साथ-साथ समय भी अधिक लगता था।
मंगलवार से पीपे के पुल पर आवागमन शुरू होने से कम्हरिया, मदैनिया, गढ़वल व राजेसुलतानपुर के अलावा आजमगढ़ के नागरिकों को गोरखपुर का सफर तय करने में कम दूरी व कम समय तय करना होगा। इसके अलावा सरयू नदी के दूसरे पार के रापतपुर, भभया, बेलघाट, सिकरीगंज, उरुवा व गोलाघाट के निवासियों को अंबेडकरनगर व आजमगढ़ तक का सफर करने में आसानी होगी। पीपे का पुल शुरू न होने पर लोगों को मजबूर होकर 40 से 45 किलोमीटर अधिक दूरी तय करनी पड़ती थी।
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अब पुल पर आवागमन चालू होने से यह दूरी कम हो गयी। लोक निर्माण विभाग गोरखपुर के अवर अभियंता गौरव श्रीवास्तव ने बताया कि इस बार नदी की चौड़ाई अधिक होने के कारण पीपे का पुल विलंब से शुरू हुआ है। ये प्रदेश का सबसे लंबा पीपे का पुल है। 128 पीपे जोड़कर पुल इस बार बनाया गया है।
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सरयू नदी के कम्हरिया घाट पर पीपे के पुल पर 15 नवंबर से 15 जून तक आवागमन होता है। परंतु इस बार नदी की धारा अधिक चौड़ी होने के कारण पीपे कम पड़ जाने के कारण पीपे के पुल का निर्माण कार्य समय से नहीं पूरा हो सका था। इसके कारण कार सवारों को मजबूर होकर बिड़हर घाट होकर खलीलाबाद के रास्ते गोरखपुर का सफर करना पड़ता था। इससे अधिक दूरी तय करने के साथ-साथ समय भी अधिक लगता था।
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मंगलवार से पीपे के पुल पर आवागमन शुरू होने से कम्हरिया, मदैनिया, गढ़वल व राजेसुलतानपुर के अलावा आजमगढ़ के नागरिकों को गोरखपुर का सफर तय करने में कम दूरी व कम समय तय करना होगा। इसके अलावा सरयू नदी के दूसरे पार के रापतपुर, भभया, बेलघाट, सिकरीगंज, उरुवा व गोलाघाट के निवासियों को अंबेडकरनगर व आजमगढ़ तक का सफर करने में आसानी होगी। पीपे का पुल शुरू न होने पर लोगों को मजबूर होकर 40 से 45 किलोमीटर अधिक दूरी तय करनी पड़ती थी।
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अब पुल पर आवागमन चालू होने से यह दूरी कम हो गयी। लोक निर्माण विभाग गोरखपुर के अवर अभियंता गौरव श्रीवास्तव ने बताया कि इस बार नदी की चौड़ाई अधिक होने के कारण पीपे का पुल विलंब से शुरू हुआ है। ये प्रदेश का सबसे लंबा पीपे का पुल है। 128 पीपे जोड़कर पुल इस बार बनाया गया है।