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जिले में 36 हजार से अधिक बच्चे हैं कुपोषित

Mon, 13 Jan 2020 10:48 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 13 Jan 2020 10:48 PM IST
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over 36000 cases of Malnutrition  found
अंबेडकरनगर। राष्ट्रीय पोषण मिशन के तहत बीते दिसंबर माह में चले अभियान में 1 लाख 28 हजार 630 बच्चों की जांच की गई। इसमें 8 हजार 506 बच्चे अतिकुपोषित जबकि 27 हजार 721 को कुपोषित की श्रेणी में रखा गया। 19 हजार 448 ऐसे बच्चे सामान्य श्रेणी में पाए गए, जिन्हें नवंबर माह में कुपोषित श्रेणी में रखा गया था। यह हाल तब है जबकि अफसर पोषण मिशन को लेकर तमाम दावे करते हैं।
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वहीं, ये आंकड़े सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग व आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को निर्देशित किया गया है कि न सिर्फ कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों का पुष्टाहार बढ़ाया जाए बल्कि अतिकुपोषित बच्चों को जिला अस्पताल परिसर में बनाए गए राज्य पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जाए ताकि उन्हें अतिकुपोषित की श्रेणी से बाहर लाया जा सके।
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देश को कुपोषणमुक्त करने के लिए केंद्र व प्रदेश सरकारों द्वारा विभिन्न प्रकार की योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक माह राष्ट्रीय पोषण मिशन योजना के तहत अभियान चलाकर छह वर्ष तक के बच्चों का न सिर्फ वजन किया जाता है बल्कि विभिन्न प्रकार की जांच भी स्वास्थ्य विभाग व आंगनबाड़ी की संयुक्त टीम द्वारा की जाती है। इसके अलावा कुपोषित बच्चे न पैदा हों, इसके लिए गर्भवती महिलाओं की आंगनबाड़ी व आशा द्वारा गर्भधारण के दौरान ही न सिर्फ बेहतर देखभाल की जाती है बल्कि पास के सरकारी अस्पताल में उनका पंजीकरण कराकर समय समय पर स्वास्थ्य जांच भी कराई जाती है। यदि खून की कमी होती है तो न सिर्फ आयरन की गोलियां दी जाती हैं बल्कि पौष्टिक आहार दिए जाने पर भी जोर दिया जाता है।
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तमाम प्रयास के बावजूद जिले में कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों की संख्या जिले में कम नहीं हो रही। जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय के सीडीपीओ शेषकुमार वर्मा ने बताया कि गत दिसंबर माह में राष्ट्रीय पोषण स्वास्थ्य मिशन योजना के तहत अभियान चला। 1 लाख 26 हजार 630 बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण हुआ था। इसमें 8 हजार 506 बच्चे अतिकुपोषित, जबकि 27 हजार 721 बच्चे कुपोषित की श्रेणी में चिंहांकित हुए। वहीं पूर्व माह से कुपोषित श्रेणी में चिह्नित किए गए 19 हजार 484 बच्चे सामान्य श्रेणी में रखे गए। बताया कि स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों व आंगनबाडिय़ों को निर्देशित किया गया है कि जो बच्चे अतिकुपोषित श्रेणी व कुपोषित श्रेणी में चिंहित किए गए हैं, उनके पुष्टाहार में वृद्धि की जाए। सामान्य बच्चों को प्रतिमाह तीन पैकेट व कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों को 5-5 पैकेट दिए जाने का निर्देश संबंधित क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों को दिया गया है। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि अतिकुपोषित श्रेणी के जो बच्चे अति गंभीर हैं, उन्हें जिला अस्पताल परिसर में बने राज्य पोषण पुनर्वास केंद्र में ले जाकर उनका समुचित इलाज कराएं।
सीडीपीओ शेषनाथ वर्मा ने नागरिकों से आह्वान किया कि सिर्फ अभियान चलाने से जिले को कुपोषण मुक्त नहीं किया जा सकता है। इसके लिए सभी को सहयोग करना होगा। लोगों को चाहिए कि वे अपने छह वर्ष तक के बच्चों का समय समय पर जांच कराते रहें। यदि वे कुपोषित की श्रेणी में आते हैं, तो तत्काल उनका इलाज कराएं। अतिकुपोषित बच्चे ज्यादातर जन्म से ही होते हैं। ऐसे में गर्भवती को चाहिए कि वे गर्भधारण के समय संतुलित आहार पर अधिक ध्यान दें। साथ ही आयरन युक्त भोजन ग्रहण करने पर भी जोर दें। कार्ड के अनुसार समय समय पर टीका भी लगवाती रहें।

बीते दिसंबर माह में चले अभियान में 8 हजार 506 अतिकुपोषित बच्चे चिह्नित किए गए हैं। उनके लिए अतिरिक्त पुष्टाहार की व्यवस्था की गई है। राष्ट्रीय पोषण मिशन योजना के तहत प्रत्येक माह अभियान चलाया जाता है। प्रत्येक माह अतिकुपोषित व कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी या फिर वृद्धि होती रहती है।
- विनोद कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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