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Ambedkar Nagar News: 90 दिन में हुई मात्र 6.7 प्रतिशत गेहूं की खरीद
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अंबेडकरनगर। 60 दिन से अधिक समय बीत गए लेकिन अब तक 92 क्रय केंद्रों पर 86 हजार 700 मीट्रिक टन की तुलना में मात्र 6.71 प्रतिशत गेहूं की खरीद ही हो सकी है। क्रय केंद्रों पर किसानों की आवक कम होने के चलते गेहूं खरीद गति नहीं पकड़ रही। दरअसल आढ़ती किसानों के घर व खलिहान पर पहुंचकर उपज की खरीद कर रहे। ऐसे में किसान क्रय केंद्र पर न जाकर आढ़तियों के हाथ उपज की बिक्री करना बेहतर समझ रहे।
जिले में गेहूं खरीद की गति तमाम प्रयासों के बावजूद नहीं तेज हो पा रही है। क्योंकि क्रय केंद्रों पर किसानों की आवक लगातार कम होती जा रही है। इसका मुख्य कारण आढ़तियों का किसानों के घर व खलिहान में पहुंचकर ही उपज की खरीदारी करना है। गेहूं का समर्थन मूल्य 2275 प्रति क्विंटल है जबकि आड़ती भी लगभग इतनी ही राशि दे रहे हैं। ऐसे में किसान घर बैठे ही उपज की बिक्री कर ले रहे। क्रय केंद्र तक की दौड़ लगाने से बचत हो रही है।
गेहूं खरीद की धीमी गति होने का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक 1555 किसानों से 5821.13 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो सकी है जो कि निर्धारित लक्ष्य 86 हजार 700 मीट्रिक टन की तुलना में 6.7 प्रतिशत है। मालूम हो कि जिले के अलग-अलग क्षेत्र में सात एजेंसी के कुल 92 क्रय केंद्र स्थापित हैं। इन क्रय केंद्रों पर एक मार्च से खरीदारी शुरू की गई।
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खाद्य एवं विपणन अधिकारी कार्यालय के अनुसार खाद्य विभाग के 25 केंद्रों पर 580 किसानों का 297.8 एमटी, पंजीकृत सहकारी समिति के पांच केंद्रों पर 19 किसानों का 62.3 एमटी, पीसीएफ के 40 केंद्रों पर 602 किसानों से 2310.37 एमटी, नैफेड के चार केंद्र पर 10 किसानों से 28.6, पीसीयू के छह केंद्रों पर 91 किसानों से 249.14 एमटी, यूपीएसएस के छह केंद्रों पर 65 किसानों से 194.95 एमटी, मंडी समिति के एक केंद्रों पर 37 किसानों से 1626 एमटी, भारतीय खाद्य निगम के पांच केंद्र पर 151 किसानों से 715.37 मिट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई है।
सक्रिय किए गए मोबाइल क्रय केंद्र
मोबाइल क्रय केंद्रों को सक्रिय किया गया है। इनके द्वारा गांव-गांव जाकर गेहूं की खरीद की जा रही है। किसानों को चाहिए कि वे क्रय केंद्र पर पहुंचकर उपज की बिक्री करें। - विनीता मिश्रा, खाद्य एवं विपणन अधिकारी
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जिले में गेहूं खरीद की गति तमाम प्रयासों के बावजूद नहीं तेज हो पा रही है। क्योंकि क्रय केंद्रों पर किसानों की आवक लगातार कम होती जा रही है। इसका मुख्य कारण आढ़तियों का किसानों के घर व खलिहान में पहुंचकर ही उपज की खरीदारी करना है। गेहूं का समर्थन मूल्य 2275 प्रति क्विंटल है जबकि आड़ती भी लगभग इतनी ही राशि दे रहे हैं। ऐसे में किसान घर बैठे ही उपज की बिक्री कर ले रहे। क्रय केंद्र तक की दौड़ लगाने से बचत हो रही है।
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गेहूं खरीद की धीमी गति होने का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक 1555 किसानों से 5821.13 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो सकी है जो कि निर्धारित लक्ष्य 86 हजार 700 मीट्रिक टन की तुलना में 6.7 प्रतिशत है। मालूम हो कि जिले के अलग-अलग क्षेत्र में सात एजेंसी के कुल 92 क्रय केंद्र स्थापित हैं। इन क्रय केंद्रों पर एक मार्च से खरीदारी शुरू की गई।
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खाद्य एवं विपणन अधिकारी कार्यालय के अनुसार खाद्य विभाग के 25 केंद्रों पर 580 किसानों का 297.8 एमटी, पंजीकृत सहकारी समिति के पांच केंद्रों पर 19 किसानों का 62.3 एमटी, पीसीएफ के 40 केंद्रों पर 602 किसानों से 2310.37 एमटी, नैफेड के चार केंद्र पर 10 किसानों से 28.6, पीसीयू के छह केंद्रों पर 91 किसानों से 249.14 एमटी, यूपीएसएस के छह केंद्रों पर 65 किसानों से 194.95 एमटी, मंडी समिति के एक केंद्रों पर 37 किसानों से 1626 एमटी, भारतीय खाद्य निगम के पांच केंद्र पर 151 किसानों से 715.37 मिट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई है।
सक्रिय किए गए मोबाइल क्रय केंद्र
मोबाइल क्रय केंद्रों को सक्रिय किया गया है। इनके द्वारा गांव-गांव जाकर गेहूं की खरीद की जा रही है। किसानों को चाहिए कि वे क्रय केंद्र पर पहुंचकर उपज की बिक्री करें। - विनीता मिश्रा, खाद्य एवं विपणन अधिकारी