{"_id":"83c16274f35973a5c7adbafc2b40931e","slug":"on-the-status-of-sensitive-no-resources-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"संवेदनशील का दर्जा पर संसाधन नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संवेदनशील का दर्जा पर संसाधन नहीं
अबेडकरनगर/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 03 Dec 2015 11:08 PM IST
विज्ञापन
स्थानीय अभिसूचना इकाई के मामले में तो यह लापरवाही काफी चिंताजनक है। हालात यह हैं कि इस टीम में उपनिरीक्षक के सभी 6 पद खाली चल रहे हैं। अन्य पदों पर भी सृजन के सापेक्ष तैनाती नहीं है।
विज्ञापन
संसाधनों की कमी से जूझ रही इस इकाई ने बीते वर्षों में कई सटीक जानकारी प्रशासन को उपलब्ध कराई है तो कुछ विफलताएं भी इसके खाते में दर्ज हैं। इन सबके बीच मैनपावर की कमी प्रशासन की इस सबसे महत्वपूर्ण इकाई माने जाने वाली टीम पर भारी पड़ रही हैै।
विज्ञापन
उल्लेखनीय है कि टांडा में हिंदू नेता रामबाबू गुप्त और उसके बाद उनके भतीजे राममोहन गुप्त की हत्या के साथ ही जहांगीरगंज नरियांव में हुई गुटीय संघर्ष की घटनाओं ने इस जिले को संवेदनशील श्रेणी में शुमार कर रखा है। किसी भी पर्व आदि के मामले में इस जिले की सुरक्षा एवं शांति व्यवस्था को लेकर चिंता ऊपर तक दिखाई पड़ती है, लेकिन बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की तरफ किसी का ध्यान नहीं है।
विज्ञापन
प्रशासन के लिए गोपनीय सूचना समय रहते उपलब्ध कराकर अभिसूचना इकाई उससे निपटने का आधार तैयार करती है । संवेदनशील मामलों में इस इकाई की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। जिले में इस टीम पर जिम्मेदारी तो बढ़ी है, लेकिन आवश्यक संसाधनों का टोटा सा पड़ा रहता है। सबसे ज्यादा दिक्कत मैनपावर को लेकर है।