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रविवार के अवकाश के बाद भी नहीं दूर हुई छुट्टी की खुमारी

Mon, 02 Sep 2019 10:39 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 02 Sep 2019 10:39 PM IST
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अंबेडकरनगर। जनता की सहूलियत को लेकर अधिकारी किस कदर बेपरवाह हैं, यह तस्वीर सोमवार को एक बार फिर सामने आई। रविवार के अवकाश की खुमारी इनके सिर से सोमवार को भी नहीं उतरी। सरकारी दफ्तर खुले तो डीएम सहित तमाम अफसर काफी देर से दफ्तर पहुंचे। इस दौरान दूरदराज से आए फरियादी भटकते रहे। अमर उजाला ने मौके पर जाकर ये हालात देखे।
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डीएम राकेश कुमार मिश्र ही निर्धारित समय से 46 मिनट बाद कलेक्ट्रेट मेें दाखिल हुए तो डीएफओ, सीएमओ, बीएसए, उपायुक्त उद्योग, उपनिदेशक कृषि व जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों के कार्यालय का भी यही हाल रहा। जनता दर्शन में डीएम से मिलने पहुंचे फरियादियों ने विलंब होने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जब आला हाकिम ही ऐसा करेंगे तो अन्य विभागों पर तो बुरा असर पड़ेगा ही। फरियादियों ने कहा कि पांच मिनट देर हो जाने पर डीएम के जनता दर्शन में प्रार्थना पत्र नहीं लिया जाता, लेकिन वह खुद पौन घंटा देर से पहुंच रहे हैं तो कोई जवाबदेही नहीं है।
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रविवार के अवकाश के दौरान आमतौर पर अफसरों की शनिवार शाम ही घरों की तरफ कूच करने की आदत पड़ी हुई है। ऐसे में सोमवार को अधिकारी ज्यादातर देरी से ही दफ्तरों में पहुंचते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अफसरों को अब सुबह नौ बजे से कार्यालय में बैठने के बजाए साढ़े नौ बजे तक की छूट दे दी है तो भी इस निर्देश का पालन करने की परवाह अधिकारियों को नहीं है। नतीजा यह कि तमाम उम्मीदें लेकर अधिकारियों से मिलने के पहुंचने के लिए आम लोगों को घंटों इंतजार करने या फिर निराश होकर लौट जाने को विवश होना पड़ता है।
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अमर उजाला टीम सुबह 9 बजकर 33 मिनट पर कलेक्ट्रेट पहुंची तो डीएम राकेश कुमार मिश्र नहीं पहुंच सके थे। मरथुआ सरैया के रामसूरत, मुसइतपुर के बनवारी तथा रामपुर बनेथू के प्रदीप कुमार मौजूद मिले। बताया कि जल्दी आ गए थे ताकि डीएम से मिलकर जल्दी वापस लौट सकें। हालांकि अभी तक साहब नहीं आ पाएं हैं। कुछ देर बाद यहां पहुंचे दिव्यांग प्रभाकर निवासी बक्सापुर भी डीएम का इंतजार करने को विवश हुए। बोले कि सोचा था जल्दी मुलाकात कर वापस लौट जाऊंगा, लेकिन पैर में दर्द होने की समस्या लगता है कि इंतजार करने में और बढ़ जाएगी। घड़ी की सुई में दस बजे चुके थे।
प्रदीप मौर्य निवासी मुंडेरा व सुरेश पाण्डेय निवासी शेखपुरा भी निर्धारित समय के आधे घंटे बाद तक डीएम के कलेक्ट्रेट न पहुंच पाने को लेकर परेशान दिखे। कई फरियादियों ने नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि सरकार ने अनिवार्य रूप से साढ़े नौ बजे तक दफ्तरों में बैठने का जब निर्देश दिया है तो इसका पालन सबसे पहले डीएम को जरूर करना चाहिए। जब ऐसे अधिकारी ही मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन नहीं करेंगे तो बाकी अफसरों की मनमानी कैसे रुक पाएगी।
फरियादियों के आने का क्रम इसके बाद भी जारी था, लेकिन डीएम की गाड़ी तब भी नजर नहीं आ रही थी। पूरे 46 मिनट बाद 10 बजकर 16 मिनट पर डीएम कलेक्ट्रेट पहुंच सके। इसके बाद उन्होंने अपने कक्ष पहुंचकर वहां आए फरियादियों की समस्याएं सुनीं। डीएम ने हालांकि आवासीय कार्यालय पर राजकीय कार्य में व्यस्त होने का हवाला दिया, लेकिन यह दावा करते समय वे यह भूल गए कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि साढ़े नौ बजे से कैंप कार्यालय की बजाए मुख्य कार्यालय में अधिकारी अपनी मौजूदगी सुनिश्चित करें।
डीएम से मिलने के लिए आलापुर से चलकर भाजपा जिला उपाध्यक्ष दिनेश पांडेय भी ठीक साढ़े नौ बजे कलेक्ट्रेट पहुंच गए थे। पौने दस बजे करीब वे वाहन से निकले तो डीएम के न पहुंच पाने को लेकर कई फरियादियों ने शिकायत भी दर्ज कराई। दिनेश ने कहा कि वे स्वयं यह सोचकर आए थे कि डीएम से समय से मुलाकात हो जाएगी। फरियादियों की नाराजगी देखते हुए इसके बाद वे डीएम कक्ष के सामने बरामदे तक गए और काफी देर तक फरियादियों के साथ बने रहे। दिनेश ने अमर उजाला से कहा कि निश्चित तौर पर सभी अधिकारियों को समय सीमा का ध्यान रखना चाहिए। ऐसी स्थिति कतई उचित नहीं है।
मैं कैंप कार्यालय में कार्य में व्यस्त था। इस वजह से थोड़ा विलंब हो गया। कलेक्ट्रेट पहुंचने वाले सभी फरियादियों की समस्याएं सुनीं जाती हैं और उनका निराकरण भी किया जाता है।
राकेश कुमार मिश्र, डीएम
घड़ी में 10 बजकर 18 मिनट हो चुके थे, लेकिन प्रभागीय वनाधिकारी एसएन यादव अपने दफ्तर नहीं पहुंच सके थे। उनके कार्यालय कक्ष का ताला खुला मिला। कार्यालय में सभी कर्मचारियों की उपस्थिति भी सुनिश्चित नही हो सकी थी। चार कर्मचारी एक कक्ष में बैठकर गपशप करने में व्यस्त दिखे। उनसे टीम ने जब साहब के आने के बारे में सवाल किया तो जवाब मिला कि रास्ते में हैं, कुछ समय लगेगा आ रहे हैं।
टीम 10 बजकर 25 मिनट पर जिला उद्योग कार्यालय पहुंची। यहां पर उपायुक्त उद्योग आशुतोष सहाय मौजूद तो नहीं मिले, लेकिन उनके कक्ष में एसी चल रही थी। साहब के आने के पहले सरकारी खर्च पर कमरा पूरी तरह ठंडा हो जाए इसकी चिंता ज्यादा थी, लेकिन समय से दफ्तर पहुंचने की नही। कार्यालय में मौजूद मिले कर्मचारी ने बताया कि साहब पहुंचने वाले हैं। टीम करीब 7 मिनट तक कार्यालय में अलग अलग कक्षों का जायजा लेती रही, लेकिन तब तक साहब की आमद नहीं हो चुकी थी। यहां अन्य पटलों के कर्मचारी पहुंचे चुके थे, जो अपने कार्यों में व्यस्त दिखे। उपायुक्त से बात की गई तो बोले रास्ते में हूं, 5 मिनट में आ रहा हूं।
टीम इसके बाद 10 बजकर 35 मिनट पर बेसिक शिक्षा विभाग कार्यालय पहुंची। बीएसए अतुल कुमार सिंह मौजूद नही थे। टीम ने कार्यालय का निरीक्षण किया तो लेखाधिकारी समेत कई पटल सहायक अपने कक्ष में नहीं दिखे। खास बात यह कि परिसर में गंदगी बिखरी दिखी। कार्यालय में व्याप्त मनमानी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिस समय कार्यालय में सुचारु कामकाज होना चाहिए था, उस समय कक्ष की सफाई का कार्य चल रहा था। बीएसए से फोन पर हुई वार्ता में पता चला कि वह विद्यालय निरीक्षण के लिए निकले हैं।
पूर्वाह्न करीब 10 बजकर 50 मिनट पर टीम कृषि विभाग कार्यालय पहुंची। यहां पर उपकृषि निदेशक आरडी बागला व जिला कृषि अधिकारी डॉ धर्मराज सिंह कार्यालय में मौजूद नहीं थे। विभाग के हॉल में पशु पालन के लिए प्रशिक्षण चल रहा था। अन्य कर्मचारी अपने कार्य में व्यस्त मिले। दूरभाष पर दोनों अधिकारियों से वार्ता हुई तो कहा गया कि 10 मिनट में कार्यालय पहुंच रहा हूं।
टीम सोमवार सुबह करीब 10 बजकर 10 मिनट पर मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय पहुंची। यहां पर सीएमओ कक्ष का ताला तो खुल गया था, लेकिन साहब मौजूद नहीं थे। सामने स्थित कक्ष में काम कर रहे लिपिक से पूछा गया तो बताया कि साहब के आने का समय हो गया है, और आ ही रहे होंगे। उनके सीयूजी नंबर पर फोन किया गया, तो वह नेटवर्क में नहीं था। डिप्टी सीएमओ भी कार्यालय नहीं पहुंच सके थे। कार्यालय के अन्य कक्ष में भी सन्नाटा छाया था। ऊपरी तल पर स्थित अन्य पटल पर तैनात अधिकारी व कर्मचारी नहीं पहुंच सके थे।

टीम सुबह करीब साढ़े 10 बजे विकास भवन के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग कार्यालय पहुंची। अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सिंह प्रताप देव नहीं मिले। कार्यालय के अधिकांश कर्मचारी पहुंच चुके थे। इनमें से अधिकांश अपने कार्य भी संभाल रहे थे। कर्मचारी से जब पूछा गया कि साहब कब आएंगे तो जवाब मिला कि आने का समय हो रहा है। रास्ते में ही होंगे। मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया, लेकिन फोन नहीं लगा।
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