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Ambedkar Nagar News: सहकारी समितियों पर एक भी बोरी डीएपी खाद उपलब्ध नहीं

Wed, 23 Nov 2022 11:57 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 23 Nov 2022 11:57 PM IST
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Not even a single bag of DAP fertilizer is available on cooperative societies
अंबेडकरनगर। साधन सहकारी समितियों पर एक भी बोरी डीएपी खाद उपलब्ध नहीं हैं। बीते दिनों जिले में पहुंची खाद कुछ ही घंटों में खत्म हो गई। किसानों के बीच इसे लेकर हाहाकार की स्थिति है। 91 समितियों से डीएपी नदारद होने से किसान परेशान हैं। दलहनी व तिलहनी फसलों की बुआई के लिए इसकी जरूरत है। ऐसे में किसानों को एक-एक बोरी खाद के लिए भटकना पड़ रहा है।
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डीएपी खाद को लेकर किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जिम्मेदारों की अदूरदर्शिता का खामियाजा इन्हें भुगतना पड़ रहा है। इन दिनों सरसों, मटर, आलू, चना, मसूर समेत अन्य दलहनी व तिलहनी फसलों की बुआई चल रही है। इसके लिए डीएपी खाद की सख्त जरूरत है। इसके मुताबिक खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
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मौजूदा माह में फसलों की बुआई तेजी से चल रही है। ऐसे में जब खाद की ज्यादा जरूरत है, तब डीएपी नदारद है। आलम यह है कि विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित 93 साधन सहकारी समितियों में एक भी बोरी डीएपी नहीं है। खाद की उपलब्धता समय पर न होने से किसानों को फसलों की बुआई में विलंब हो रहा है। एक-एक बोरी खाद के लिए किसान परेशान हैं।
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सहकारी संघ जलालपुर के प्रभारी सतीराम ने कहा कि 18 नवंबर को 400 बोरी डीएपी मिली थी। 21 नवंबर को समाप्त हो गई। डीएपी लेने पहुंचे बड़ागांव के सेवाराम व राजितराम ने कहा कि बड़ी उम्मीदों के साथ आए थे लेकिन मायूसी हाथ लगी है। अब निजी दुकान से खाद लेनी पड़ेगी।
साधन सहकारी समिति रेवई में खाद नदारद मिली। समिति के सचिव यशवंत ने कहा कि 20 नवंबर को 400 बोरी डीएपी मिली थी। 22 नवंबर को समाप्त हो गई। बुधवार को खाद के लिए पहुंचे कर्बला कासिमपुर के संतोष कुमार ने नाराजगी जताते हुए कहा कि किसानों के हित को देखते हुए समितियों पर अविलंब खाद की उपलब्धता कराई जाए।
इसके अलावा सहकारी समिति बड़ेपुर में सिर्फ यूरिया मिली। सचिव सालिकराम यादव ने बताया कि दो दिन बाद डीएपी आने की उम्मीद है।
विकास खंड कटेहरी की आधा दर्जन समितियों पर कहीं भी मौजूदा समय में डीएपी खाद नहीं है। साधन सहकारी समिति प्रतापपुर चमुर्खा में 300 बोरी एनपीके खाद दो दिन पहले आई थी। इसमें से 200 बोरी समिति के सदस्यों को व 100 बोरी का नकद वितरण किया गया। इसके अलावा औरंगनगर में 250 बोरी डीएपी 21 नवंबर को आई थी। उसी दिन समाप्त हो गई।
साधन सहकारी समिति अन्नावां, खेमापुर, अशरफपुर बरवां, सुमेरपुर, आशाजीतपुर कला व मरथुआ सरैया समेत अन्य समितियों पर डीएपी पूरी तरह से नदारद है। प्रतापपुर चमुर्खा के किसान अशोक कुमार व बरहा नियामक चक के सुभाष गुप्ता ने कहा कि डीएपी न होने से बोआई में विलंब हो रहा है। मदनगढ़ के मयाराम व सेमरा के मनीराम ने कहा कि यदि शीघ्र ही डीएपी नहीं उपलब्ध हुई तो फसलों को नुकसान हो सकता है।
पीसीएफ भीटी पर 21 नवंबर को 400 बोरी डीएपी आई थी। सचिव दुर्गाप्रसाद पांडेय ने बताया कि 22 नवंबर को खाद समाप्त हो गई। मौके पर आठ सौ बोरी यूरिया उपलब्ध है। भीटी विकास खंड के लगभग एक दर्जन समितियों पर कहीं भी डीएपी नहीं है।
भीटी स्थित समिति पर डीएपी लेने पहुंचे सिकान घनश्याम व राजेंद्र कुमार ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अब तो मजबूरन निजी दुकान से अधिक दाम पर डीएपी लेनी पड़ेगी। एक तो पहले से ही तमाम प्रकार की आर्थिक मुश्किलें हैं, उस पर से डीएपी की कमी ने और भी खड़ी कर दी हैं।
विकास खंड बसखारी की सभी नौ समितियों पर डीएपी पूरी तरह नदारद है। बुधवार को साधन सहकारी समिति बसखारी पर खाद लेने पहुंचे किसानों को मायूस होकर लौटना पड़ा। नाराज किसान शिवपाल व शेरबहादुर ने कहा कि जिस समय डीएपी की सख्त जरूरत होती ह, उसी समय खाद नदारद हो जाती है।
एक-एक बोरी के लिए भटकना पड़ता है। इसके अलावा साधन सहकारी समिति हरैया, मसड़ा मोहनपुर, दौलतपुर हाजलपट्टी, सिंघपुर, तरौली मुबारकपुर से भी किसानों को मायूस हो लौटना पड़ा।
विकास खंड जहांगीरगंज की साधन सहकारी समिति श्यामपुर अलऊपुर में भी खाद नदारद मिली। सचिव फूलचंद्र यादव ने बताया कि 21 नवंबर को 250 बोरी डीएपी आई थी। एक ही दिन में समाप्त हो गई। शीघ्र ही खाद मिलने की संभावना है।
समिति पर पहुंचे किसान शमीम व बुधिराम ने कहा कि दलहनी व तिलहनी फसलों की बुआई में डीएपी बड़ी बाधा बन रही है। यदि समय पर खाद उपलब्ध होती तो अब तक फसलों की बोआई भी हो जाती।

जिले को आठ हजार एमटी खाद का लक्ष्य मिला था। लक्ष्य की तुलना में 8200 एमटी खाद उपलब्ध हो चुकी है। 2600 एमटी खाद के लिए बीते दिनों डीएम के माध्यम से शासन को पत्र भेजा गया है। अयोध्या में रैक लगते ही जिले को खाद उपलब्ध हो जाएगी।
-सुशील कुमार, प्रबंधक, पीसीएफ
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